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नृत्योत्सव: जयपुर घराने का दमकता कथक

समारोह में जयपुर घराने के गुरुआचार्य गणेश हीरालाल हैसल व गुरु हीरालाल हैसल के शिष्य विनोद हैसल की प्रस्तुति आकर्षण का केंद्र रही। उन्होंने जोहानिसबर्ग और अन्य अफ्रीकी देशों में कथक नृत्य शैली का प्रचार-प्रसार किया।

गुरु नंदिनी सिंह ने परंपरागत लास्यात्मक और नजाकत भरे नृत्य से मोहित किया।

कथक में जयपुर घराने के गुरुओं और कलाकारों की अपनी अलग शैली है। दमदार पैर के काम और जोश से भरपूर कथक की झलक कलांतरण नृत्य समारोह में देखने को मिली। इसका आयोजन कथक नृत्यांगना व गुरु नंदिनी सिंह और वसुकी नाट्यशाला ने किया था। इस कथक महोत्सव में कथक नृत्यांगना पूर्णिमा रॉय, लीना मालाकर, शेफाली गोयल तायल, साबेरी मिश्रा और गुरु राजेंद्र गंगानी ने पहली शाम कथक नृत्य पेश किया। कमानी सभागार में समारोह की दूसरी संध्या में युवा नर्तक अभिमन्यु लाल और वरिष्ठ कलाकार डॉ विनोद हैसल ने प्रस्तुति से समां बांध दिया। वहीं गुरु नंदिनी सिंह ने परंपरागत लास्यात्मक और नजाकत भरे नृत्य से मोहित किया। युवा नृत्यांगनाएं शुभदा शर्मा, गणगौर शर्मा और विनोदिनी हैसल ने अपनी प्रतिभा का सुंदर प्रदर्शन किया।

समारोह में जयपुर घराने के गुरुआचार्य गणेश हीरालाल हैसल व गुरु हीरालाल हैसल के शिष्य विनोद हैसल की प्रस्तुति आकर्षण का केंद्र रही। उन्होंने जोहानिसबर्ग और अन्य अफ्रीकी देशों में कथक नृत्य शैली का प्रचार-प्रसार किया। कथक नृत्य के साथ विनोद हैसल बेहतरीन ड्रम वादक भी हैं। वे अंतरराष्ट्रीय ड्रम कंपनी के निदेशक हैं। इस कंपनी ने लगभग 30 देशों में अपनी प्रस्तुतियां दी हैं। उन्हें हिंद रत्न अवार्ड और नृत्य विध सम्मान से सम्मानित किया जा चुका है। डॉ विनोद हैसल ने शिव स्तुति से नृत्य आरंभ किया। इसके बोल थे-रविशरणम गम किशोर चंद्रशेखर। उन्होंने तेरह ताल में अपने नृत्य को पिरोया। आरोह-अवरोह का अंदाज पैर के काम से दर्शाया। एक परण में राधा के रूप वर्णन के साथ सम पर राधा को दर्शाया। तीन धा से सजी रचना की प्रस्तुति मोहक थी। वहीं चक्रदार फरमाइशी रचना-तक थंग तक दुग नग-नग पेश की। इसकी प्रस्तुति में राधा कृष्ण से नृत्य करने का आग्रह करती नजर आ रही थीं। विनोद हैसल जैसे कलाकारों से काफी उम्मीदें जागती हैं कि वे अपनी समृद्ध धरोहर को अगली पीढ़ी को भरोसे के साथ सौंपेंगे, ताकि नृत्य परंपरा की जड़ें गहरी जमी रहें।

समारोह में गुरु गीतांजलि लाल के शिष्य अभिमन्यु ने गायन प्रतिभा का प्रदर्शन किया। उन्होंने शिव स्तुति शिव हर हर से नृत्य आरंभ किया। तीन ताल में शुद्ध नृत्य पेश किया। उठान, गोपूछा परण, तिहाइयों, आरोह-अवरोह को नृत्य में पिरोया। उन्होंने द्रौपदी चीर हरण के प्रसंग को अभिनय में दर्शाया। इसके संवाद महाभारत तो निश्चित थी, द्युत क्रीड़ा का मिला निमंत्रण व जिनके रक्षक हो मनमोहन का प्रयोग उन्होंने बड़े सटीक अंदाज में किया। कथक नृत्यांगना व गुरु नंदिनी सिंह ने शिव स्तुति से नृत्य आरंभ किया। इसके बोल थे-ओमकार शिव शंभू हर-हर महादेव।

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