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‘पाकिस्तान के खिलाफ एक भी शब्द नहीं बोल सकते जम्मू कश्मीर के नेता’

केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने रविवार को कहा कि कश्मीरी नेता भारत के खिलाफ कुछ भी कह सकते हैं लेकिन उनमें अलगाववादियों और पाकिस्तान के खिलाफ एक शब्द कहने तक की हिम्मत नहीं है।

Author जम्मू | Updated: December 5, 2016 10:31 AM
केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह

केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने रविवार को कहा कि कश्मीरी नेता भारत के खिलाफ कुछ भी कह सकते हैं लेकिन उनमें अलगाववादियों और पाकिस्तान के खिलाफ एक शब्द कहने तक की हिम्मत नहीं है। जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला का नाम लिए बिना सिंह ने उनकी टिप्पणी के लिए उनकी आलोचना की जिसमें उन्होंने नगरोटा हमले को विभिन्न केंद्रीय मंत्रियों की बयानबाजी का नतीजा बताया था।
सिंह ने एक कार्यक्रम से इतर संवाददाताओं से कहा, ‘‘मैं नहीं समझता हूं कि ऐसे बचकाना बयानों पर कोई प्रतिक्रिया देने की जरूरत है, लेकिन दुर्भाग्य से जो लोग कहते हैं कि भारत के या भारत के मंत्रियों के बयानों ने पाकिस्तान को…. आतंकी हमले करने के लिए उकसाया है, तो उनके लिए मैं कहना चाहता हूं कि उनमें इतनी हिम्मत आए कि वह पाकिस्तान और भारत में रहने वाले उसके समर्थकों के खिलाफ या आतंकवाद का समर्थन करने वालों के खिलाफ एक शब्द कह सकें।’

सिंह ने कहा कि कश्मीर केंद्रित नेता ऐसा नहीं कर सकते हैं क्योंकि वे जानते हैं कि भारत एक पूर्ण लोकतांत्रिक देश है और इसका दिल बड़ा है और वे कुछ भी बोल सकते हैं और अगर वे पाकिस्तान या अलगाववादियों के खिलाफ एक शब्द भी कहेंगे तो वे उन्हें परेशानी में डाल देेंगे।

गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने शनिवार (3 दिसंबर) को कहा कि कश्मीर में अशांति का ठीकरा सिर्फ पाकिस्तान पर नहीं फोड़ा जा सकता, क्योंकि यह राज्य के लोगों से संवाद नहीं कर रही सरकार की ‘गलतियों’ का नतीजा है। बारामुला में नेशनल कांफ्रेंस के एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उमर ने कहा, ‘इस गलतफहमी में नहीं रहें कि कश्मीर में आग पाकिस्तान ने लगाई है। यह हमारी गलतियों का नतीजा है।’ उमर ने कहा, ‘घाटी में मौजूदा राजनीतिक हालात या अशांति के लिए सिर्फ पाकिस्तान को जिम्मेदार करार देना सच को तोड़-मरोड़कर पेश करने की तरह है।’ पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, ‘जम्मू-कश्मीर की लोगों की राजनीतिक भावना तब भी वैसी ही थी जब कोई बाहरी दखल नहीं था और यह राजनीतिक भावना ही राज्य के विशेष दर्जे का आधार है, जिसे संविधानेत्तर तंत्रों के जरिए कमजोर किया गया है।’

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