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जम्मू-कश्मीर: पर्यटन विभाग के विज्ञापन पर छिड़ा विवाद, ‘हरि पर्वत’ हुआ ‘कोह ए मारन’ कश्मीरी पंडितों में रोष

कश्मीरी पंडितों का कहना है कि हरि पर्वत का न सिर्फ सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्त्व है बल्कि यह देवी सारिका का वास स्थल भी है। यहां तक कि शंकराचार्य मंदिर को अरबी नाम देने कोशिश की गई।

Author जम्मू | May 23, 2016 2:56 AM
कश्मीरी पंडित (फाइल फोटो)

कश्मीरी पंडितों के संगठनों ने कश्मीर फोर्ट उत्सव पर प्रसिद्ध ‘हरि पर्वत’ को ‘कोह ए मारन’ नाम दिए जाने को लेकर जम्मू-कश्मीर पर्यटन विभाग की रविवार को तीखी आलोचना की। रूट्स इन कश्मीर (आरआइ) के प्रवक्ता अनूप भट ने बताया, ‘ऐसे समय में जब भाजपा सरकार विस्थापित कश्मीरी पंडितों को फिर से बसाने के बारे में गंभीरता से चर्चा कर रही है, जम्मू-कश्मीर में इसकी खुद की सरकार ऐसे कार्यों (हरि पर्वत को कोह ए मारन नाम देकर) से इसकी कोशिशों को कमतर करने का काम कर रही है।’

उन्होंने अखबारों में हाल में आए जम्मू-कश्मीर पर्यटन के विज्ञापन की निंदा की जिसमें हरि पर्वत को कोह ए मारन बताया गया है। इसके चलते विवाद छिड़ गया है। अनूप ने कहा कि हरि पर्वत का न सिर्फ सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्त्व है बल्कि यह देवी सारिका का वास स्थल भी है। यहां तक कि शंकराचार्य मंदिर को अरबी नाम देने कोशिश की गई। पनून कश्मीर सहित विस्थापित कश्मीरी पंडितों के संगठनों, ऑल स्टेट कश्मीरी पंडित कान्फ्रेंस ने शनिवार (21 मई) को घटना की निंदा की और इसकी जांच की मांग की।

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