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Varanasi: काशी विश्वनाथ कॉरिडोर से 17वीं सदी की ज्ञानवापी मस्जिद को खतरा, बाबरी विध्वंस को याद कर रहे मुस्लिम

ज्ञानवापी मस्जिद के एक सदस्य ने कहा कि बाबरी जैसी ही स्थिति इस मस्जिद की भी हो सकती है। उन्होंने कहा कि मुझे आज भी वह नारा याद है जो 1992 में बाबरी मस्जिद गिराए जाने के बाद कारसेवक लगाते थे।

वाराणसी में काशी विश्वानाथ कॉरिडोर के लिए हो रहा है काम फोटो सोर्स- इंडियन एक्सप्रेस

उत्तर प्रदेश के वाराणसी में स्थित काशी विश्वनाथ मंदिर से लेकर गंगा के तट तक बनने वाले ‘काशी कॉरिडोर’ योजना की शुरुआत मोदी सरकार के दौरान हुई। इस योजना से जहां एक तरफ लोगों को इस बात की ख़ुशी है कि इससे गंदगी खत्म होने के साथ मंदिर आने-जाने वाले लोगों को सहूलियत मिलेगी, तो वहीं दूसरी तरफ यहां मुस्लमों को मंदिर से सटकर बनी ज्ञानवापी मस्जिद को लेकर चिंता सता रही है। उनका मानना है कि ‘काशी कॉरिडोर’ निर्माण के दौरान उनकी मस्जिद को नुकसान पहुंचाया जा रहा है। टाइम्स ऑफ़ इंडिया में छपी खबर के मुताबिक 25 अक्टूबर, 2018 को एजाज मोहम्मद इस्लाही रात को जैसे ही 10 बजे रात को ज्ञानवापी मस्जिद से लौटे तो उनका फोन बजने लगा और फोन रिसीव करते ही आवाज आई कि ‘मस्जिद का चबूतरा तोड़ा जा रहा है।’

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मस्जिद के चूबतरे को तोड़ने को लेकर विवाद: टाइम्स ऑफ़ इंडिया के अनुसार फोन पर मस्जिद के चबूतरे को तोड़े जाने की बात सुनकर इस्लाही तुरंत मस्जिद की ओर दौड़े, जहां पहले से ही सैकड़ों की संख्या में मुस्लिम समुदाय के लोग जुटे हुए थे। बताया गया कि काशी विश्वनाथ मंदिर के गेट नंबर 4 के पास बने ज्ञानवापी मस्जिद का चबूतरा कॉरिडोर के निर्माण के लिए तोड़ा जा रहा है। इस मस्जिद के केयरटेकर बताते हैं कि 17वीं शताब्दी की इस मस्जिद को चबूतरे को गुस्साई भीड़ के चलते तोड़ना बंद कर दिया गया। इसके बाद जिला प्रशासन ने फिर से इसे बनवा दिया। बता दें कि यह मस्जिद सुन्नी वक्फ बोर्ड की संपत्ति है। जिसे लेकर अब भी मुस्लिमों की चिंता खत्म नहीं हुई है।

काशी विश्वानाथ कॉरिडोर के लिए निर्माण कार्य जारी

बाबरी मस्जिद जैसी हो सकती है स्थिति: काशी विश्वनाथ मंदिर के निकट बनी ज्ञानवापी मस्जिद की प्रशासनिक कमेटी के सदस्य अंजुमन इंतेजामिया और वाराणसी के जॉइंट सेक्रटरी एसएम यासीन ने कहा कि ‘अयोध्या की बाबरी मस्जिद जैसी स्थिति ज्ञानवापी मस्जिद की भी हो सकती है।’ उन्होंने आगे कहा कि मुझे आज भी 1992 में बाबरी मस्जिद गिराए जाने के बाद का वह नारा याद है जो कारसेवक लगाते थे और वह नारा था, अयोध्या तो झांकी है, काशी-मथुरा अभी बाकी है। मस्जिद के इमाम मुफ्ती अब्दुल बातिन नोमानी के मुताबिक हमें काशी कॉरिडोर को लेकर कोई आपत्ति नहीं है, हमें तो बस उस पर जिस तरीके से काम हो रहा है, उससे हम चिंतित हैं। उन्होंने कहा कि हमें अयोध्या की तरह यहां भी भीड़ के हमले की आशंका है। इस बीच यासीन कहते हैं कि 1991 और 1992 के बीच जब बाबरी मस्जिद गिराई जा रही थी तब चारों ओर ये आवाज सुनाई दे रही थी कि बीजेपी नीत उत्तर प्रदेश की कल्याण सिंह सरकार अयोध्या के सौंदर्यीकरण के लिए मस्जिद को साफ़ कर रही है।

पीएम नरेंद्र मोदी ने किया काशी विश्वानाथ कॉरिडोर का मुआयना

प्रशासन का बयान: हालांकि इस मामले में वाराणसी प्रशासन का कहना है कि मुस्लिमों का डर आधारहीन है। यहां डीएम सुरेंद्र सिंह ने टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया, “मस्जिद पूरी तरह से बैरिकेड्स से सुरक्षित है। वहां कोई नुकसान नहीं हुआ है और न ही होगा। सीसीटीवी कैमरे और सुरक्षाकर्मियों को तैनात कर मस्जिद की सुरक्षा के लिए सरकार की ओर से से पर्याप्त आश्वासन दिया जा रहा है। हालांकि इस दौरान उन्होंने यह भी कहा कि जिस चबूतरे को लेकर सवाल खड़ा किया जा रहा है, वह मस्जिद का हिस्सा ही नहीं है। वह सुन्नी वक्फ बोर्ड के कब्जे में तो है लेकिन कोई धार्मिक स्थान नहीं है।

इस दौरान संकट मोचन मंदिर के महंत, आईआईटी (BHU) के प्रोफेसर विश्वंभर नाथ मिश्रा ने टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया कि अयोध्या के बाद मथुरा और काशी को लेकर दक्षिणपंथी लोगों द्वारा लगाए गए नारों को कोई नहीं भूला है। लेकिन वाराणसी का सामाजिक ताना-बाना बहुत मजबूत है। काशी विश्वनाथ मंदिर के पूर्व महंत राजेंद्र तिवारी ने कहा कि अयोध्या के बाद काशी को राजनीतिक एजेंडे में बदल दिया गया है। ये मुश्किल समय हैं।

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