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नाटक के ल‍िए भीख तक मांगने को तैयार थे करुणान‍िध‍ि, जिंदगी में नहीं हारे एक भी चुनाव

Karunanidhi Death Latest News, Kalaignar Karunanidhi Latest News: करुणानिधि जब 20 साल के हुए तो राजनीति की तरफ उनका झुकाव और भी बढ़ गया। वह द्रविड़ियन मूवमेंट के प्रचार-प्रसार के लिए जगह-जगह पर नाटक करते थे। उनके पास पैसे नहीं थे, लेकिन फिर भी वह किसी भी कीमत पर नाटकों को मंचित करने के लिए तैयार थे।

तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री एम करुणानिधि (फोटो सोर्स- एक्सप्रेस आर्काइव फोटो)

द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) प्रमुख और तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री एम करुणानिधि के निधन से पूरे देश में मातम पसर गया है। चेन्नई में कावेरी अस्पताल के सामने मौजूद करुणानिधि के समर्थकों का रो-रोकर बुरा हाल है। हर कोई इस दिग्गज नेता के जाने के गम में दुखी है। हो भी क्यों न, आखिर आज देश ने बेहद दिग्गज नेता को अलविदा कह दिया है। पांच बार मुख्यमंत्री के तौर पर तमिलनाडु की सेवा करने वाले करुणानिधि का नाम देश के लोकप्रिय नेताओं में शुमार था। सोशल मूवमेंट्स के जरिए 14 साल की उम्र में ही राजनीति से जुड़ने वाले इस नेता ने अपने जीवनकाल में ऐसे कई काम किए हैं, जिनकी वजह से उनके समर्थक उन्हें सालों तक नहीं भूलेंगे।

एक राजनेता होने के साथ ही करुणानिधि स्क्रीनराइटर और प्लेराइटर भी थे। उन्होंने तमिल सिनेमा और थियेटर्स के लिए कई बार लिखा था। बचपन से ही लिखने का शौक रखने वाले करुणानिधि के लेखन ने उन्हें द्रविड़ियन मूवमेंट का एक दिग्गज नेता बनाया था। उन्होंने अपने युवावस्था में द्रविड़ियन मूवमेंट की विचारधारा के प्रचार प्रसार के लिए कई नाटकों का मंचन किया था।

करुणानिधि जब 20 साल के हुए तो राजनीति की तरफ उनका झुकाव और भी बढ़ गया। वह द्रविड़ियन मूवमेंट के प्रचार-प्रसार के लिए जगह-जगह पर नाटक करते थे। उनके पास पैसे नहीं थे, लेकिन फिर भी वह किसी भी कीमत पर नाटकों को मंचित करने के लिए तैयार थे। वह नाटकों का मंचन करने के लिए इस कदर दृढ़ संकल्पित थे कि पैसों की समस्या के समाधान के लिए वह भीख तक मांगने को तैयार थे। द हिंदू के मुताबिक करुणानिधि नाटकों के मंचन के लिए भीख मांगने से लेकर, अपनी किसी चीज को बेचने और किसी अमीर व्यक्ति को ड्रामे के पैसे देने के लिए मनाने के लिए भी हमेशा तैयार रहते थे।

करुणानिधि के नाम एक ऐसा रिकॉर्ड रहा है जिसके बारे में कोई और नेता केवल कल्पना ही कर सकता है। करुणानिधि ने पहली बार 1957 के चुनाव के जरिए विधानसभा में प्रवेश किया था और उसके बाद से उन्होंने अपने जीवन में एक भी चुनाव नहीं हारा था। 7 अगस्त को करुणानिधि ने लंबी बीमारी के बाद कावेरी अस्पताल में आखिरी सांस ली, उनके निधन के बाद तमिलनाडु में सात दिन के राजकीय शोक का ऐलान किया गया है।

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