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मोदी सरकार की मंत्री पर भड़के पंजाब के मिनिस्टर, मंच पर ही उपराष्ट्रपति से की शिकायत

केन्द्रीय मंत्री हरसिमरत कौर की इस बात से पंजाब के जेल मंत्री और स्थानीय विधायक सुखजिंदर सिंह रंधावा भड़क गए। इसके बाद सुखजिंदर सिंह रंधावा ने तुरंत इसकी शिकायत मंच पर मौजूद उप-राष्ट्रपति वेंकैया नायडु से की।

कार्यक्रम के दौरान हंगामा करते नेता। (PTI Photo)

सोमवार को पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह और उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडु ने डेरा बाबा नानक-करतारपुर साहिब कॉरिडोर की आधारशिला रखी। इस दौरान केन्द्रीय मंत्री नितिन गडकरी, हरसिमरत कौर बादल और हरदीप पुरी, अकाली दल के नेता सुखविंदर सिंह बादल आदि भी मौजूद रहे। इस कार्यक्रम में राजनैतिक बयानबाजी भी खूब हुई और एक बार को कार्यक्रम में हंगामे की स्थिति बन गई। दरअसल हंगामे की शुरुआत उस वक्त हुई जब केन्द्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल भाषण दे रहीं थी। हरसिमरत कौर बादल ने अपने भाषण में 1984 के सिख दंगों का जिक्र किया कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि “84 में सिख कत्लेआम के दोषियों को 34 साल बाद सजा मिलने से उन्हें भरोसा है कि बड़े मगरमच्छ भी जल्द फांसी पर लटकेंगे। कई प्रधानमंत्रियों ने धार्मिक स्थलों को ढह-ढेरी करने का काम किया।”

केन्द्रीय मंत्री हरसिमरत कौर की इस बात से पंजाब के जेल मंत्री और स्थानीय विधायक सुखजिंदर सिंह रंधावा भड़क गए। इसके बाद सुखजिंदर सिंह रंधावा ने तुरंत इसकी शिकायत मंच पर मौजूद उप-राष्ट्रपति वेंकैया नायडु से की। इस बीच मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह और कांग्रेस अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने उन्हें शांत कराया। बात यहीं पर खत्म नहीं हुई, जब सुनील जाखड़ की बोलने की बारी आयी तो उन्होंने अकालियों पर यह कहकर निशाना साधा कि “नशे से पंजाब को बर्बाद करने वाले मगरमच्छों का भी सफाया करेंगे।” जाखड़ के इस बयान पर मजीठिया व अकाली वर्कर भड़क गए। इसके चलते काफी देर गहमा-गहमी का माहौल रहा।

सुखजिंदर रंधावा ने शिलापट्ट पर लगायी काली टेपः पंजाब सरकार में मंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा, अकालियों द्वारा करतारपुर कॉरिडोर का क्रेडिट लेने से भी नाराज दिखाई दिए। यही वजह है कि इसी नाराजगी में सुखजिंदर रंधावा ने शिलापट्ट पर शिरोमणि अकाली दल के नेताओं का नाम देखकर विरोधस्वरुप अपने नाम के ऊपर काली टेप लगा दी। इसके साथ ही उन्होंने मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह और पंजाब के पीडब्लूडी मंत्री विजय सिंगला के नाम पर भी काली टेप लगा दी। हालांकि बाद में इस शिलापट्ट को डिजिटल बोर्ड से बदल दिया गया। रंधावा का कहना है कि “अकाली दल राज्य में कई साल सत्ता में रहा। इस दौरान अकालियों ने कभी भी करतारपुर कॉरिडोर को कभी भी गंभीरता से नहीं लिया। अब चूंकि वो केन्द्र में भाजपा के साथ गठबंधन में हैं, इसलिए करतारपुर कॉरिडोर का क्रेडिट लेने की कोशिश कर रहे हैं।”

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