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कोर्स में ईसाई और इस्लाम धर्म पर पाठ: भड़के विहिप को आशंका- बड़े होकर धर्म परिवर्तन कर लेंगे बच्चे

विहिप कार्यकर्ताओं ने गुरुवार को मंगलुरु में प्रदर्शन किए। उन्होंने कहा कि वे 9वीं में पढ़ाए जा रहे इस अध्याय को हटाने के लिए कर्नाटक सरकार को एक मांगपत्र भेजेंगे।

masjidतस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक रूप से किया गया है।

कर्नाटक में स्कूली किताबों में ईसाई और इस्लाम धर्म पर आधारित एक पाठ पर विश्व हिंदू परिषद नाराज है। संगठन का दावा है कि इस तरह के अध्याय की वजह से ‘युवाओं का दिमाग भ्रमित’ होगा और धर्म परिवर्तन का खतरा बढ़ेगा। दरअसल, विहिप को अध्याय के आखिरी में दिए गए एक अभ्यास कार्य पर आपत्ति है। इसमें छात्र-छात्राओं से कहा गया है कि वे चर्चों और मस्जिदों में जाएं और क्रिसमस और रमजान के रीति-रिवाजों के बारे में लिखें। विहिप को अध्याय से ज्यादा इस अभ्यास कार्य पर आपत्ति है। उनका आरोप है कि ये दोनों समुदाय हिंदुत्व के बारे में जानने के प्रति कोई दिलचस्पी नहीं दिखाते।

द टेलिग्राफ की रिपोर्ट के मुताबिक, विहिप कार्यकर्ताओं ने गुरुवार को मंगलुरु में प्रदर्शन किए। उन्होंने कहा कि वे 9वीं में पढ़ाए जा रहे इस अध्याय को हटाने के लिए कर्नाटक सरकार को एक मांगपत्र भेजेंगे। मंगलुरु विहिप सचिव शिवानंद मेंडन ने कहा, ‘हम बस यही चाहते हैं कि इस अध्याय को हटाया जाए जिससे युवाओं का दिमाग भ्रमित होगा।’ बता दें कि मंगलुरु को सांप्रदायिक नजरिए से बेहद संवेदनशील माना जाता है। जिस चैप्टर को लेकर सारा विवाद है, वह 9वीं के सामाजिक विज्ञान के इतिहास खंड में पढ़ाए जाने वाले चार अध्यायों में से एक है। इस किताब को पिछले साल कांग्रेस सरकार ने कोर्स में शामिल किया था।

इस अध्याय में ईसाइयत और इस्लाम पर तीन-तीन पन्ने हैं। इसके बाद पाठ्य सामग्री पर आधारित अभ्यास कार्य हैं। अभ्यास कार्य के आखिर में छात्र-छात्राओं को सुझाव दिया गया है कि वे चर्चों और मस्जिदों में जाएं। विहिप नेता ने कहा, ‘हमारे बच्चे ही सिर्फ क्यों मस्जिदों और चर्चों में जाएं जब वे (दूसरे समुदाय के लोग) ऐसा नहीं करते। दूसरे धर्मों की समझ रखने में मुझे कोई आपत्ति नहीं है। लेकिन मुद्दा मुस्लिमों और ईसाइयों की सोच है, जो अपने बच्चों को हिंदुत्व के बारे में समझने का मौका नहीं देते।’ विहिप नेता ने पूछा, ‘इस बात की क्या गारंटी है कि हिंदू बच्चे इस तरह की गतिविधियों में शामिल होने के बाद दूसरे धर्मों से प्रभावित नहीं होंगे और बड़े होने के बाद दूसरा धर्म स्वीकार नहीं कर लेंगे।’ विहिप नेता के मुताबिक, उन्होंने स्कूली दिनों में खुद इस्लाम और ईसाइयत के बारे में पढ़ा है। मेंडन के मुताबिक, वक्त बदल चुका है। उन्होंने कहा, ‘हम तेजी से हो रहे धर्म परिवर्तन के पीड़ित हैं, ऐसे में और ज्यादा चांस नहीं ले सकते।’

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