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कर्नाटक: 60 से अधिक प्रतिष्ठित व्यक्तियों ने मुख्यमंत्री बोम्मई को लिखा पत्र, सांप्रदायिक घृणा फैलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग

संप्रदायिक घृणा के खिलाफ पत्र लिखने वालों में मशहूर इतिहासकार रामचंद्र गुहा और कविता लंकेश (गौरी लंकेश की बहन) भी शामिल हैं।

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कर्नाटक के मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई (Express file photo)

कर्नाटक में 60 से अधिक शिक्षाविदों, लेखकों, फिल्म निर्माताओं और सेवानिवृत्त सिविल सेवकों ने मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई को पत्र लिखकर सांप्रदायिकता फैलाने वालों के खिलाफ मुकदमा चलाने का आग्रह किया है। उन्होंने अपने पत्र में लिखा है कि जिम्मेदार पदों पर बैठे लोग भी अल्पसंख्यकों के खिलाफ सांप्रदायिक घृणा और हिंसा को भड़काने का काम कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री को पत्र लिखने वाले सभी 60 से अधिक लोगों ने बसवराज बोम्मई से मिलने के लिए समय मांगा था, लेकिन करीब 1 महीने बीतने के बाद भी समय ना मिलने के कारण इन सभी ने एक पत्र लिखा। मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में कर्नाटक के राष्ट्र कवि के रूप में प्रतिष्ठित कुवेम्पु ने “सर्व जनांगदा शांति थोटा (विभिन्न समुदायों के लिए शांति का बगीचा)” के रूप में वर्णित किया था, जो अब अल्पसंख्यक समुदायों के खिलाफ नफरत और हिंसा के लिए जाना जाता था।

पत्र में प्रतिष्ठित व्यक्तियों ने आरोप लगाते हुए कहा है “यह और भी अधिक चिंताजनक है कि जिम्मेदार पदों पर बैठे कुछ लोग, जिनमें कई लोग शामिल हैं, जिन्होंने भारत के संविधान के अक्षर और भावना को बनाए रखने और पालन करने की शपथ ली है, वे अब खुले तौर पर उस गंभीर प्रतिज्ञा का उल्लंघन कर रहे हैं और अल्पसंख्यक सदस्यों को निशाना बना रहे हैं।”

पत्र में आगे कहा गया है, “जिम्मेदार पदों पर बैठे लोग धमकी, सतर्कता, हिंसा, संपत्ति के जबरन अधिग्रहण के साथ-साथ सामाजिक और आर्थिक बहिष्कार को मान्य, समर्थन और यहां तक ​​​​कि बढ़ावा देने के लिए भी प्रेरित कर रहे हैं, ऐसा प्रतीत होता है। सभी का उद्देश्य उन्हें (अल्पसंख्यकों) द्वितीय श्रेणी का नागरिक बनाना है जो अब अपने संवैधानिक अधिकार के आनंद की उम्मीद नहीं कर सकते हैं।” माना जा रहा है कि यह पत्र इसलिए लिखा गया है क्योंकि पिछले कुछ महीनों में भाजपा सांसदों और मंत्रियों ने कई विवादित बयान दिए हैं।

पत्र पर जिन लोगों के हस्ताक्षर हैं, उनमें इतिहासकार रामचंद्र गुहा, लेखक शशि देशपांडे, अम्मू जोसेफ, पोइल सेनगुप्ता, फिल्म निर्माता गिरीश कासरवल्ली, एम.एस. सत्यू और कविता लंकेश (मृत पत्रकार गौरी लंकेश की बहन), सार्वजनिक स्वास्थ्य के प्रोफेसर मोहन राव, पूर्व राजनयिक चिरंजीव सिंह, सेवानिवृत्त सिविल सेवक येलप्पा रेड्डी और एन.टी. अब्रू, शिक्षाविद चंदन गौड़ा और एस जफेट शामिल हैं।

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