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रिपोर्टर पर गुर्राए सिद्धारमैया- जानते नहीं तो मुंह बंद रखो, महादयी विवाद मोदी को सुलझाना है सोनिया को नहीं

शनिवार (05 मई) को एक चुनावी रैली में पीएम नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस पर महादयी मुद्दे पर राजनीति करने का आरोप लगाया था और कहा था कि इस मुद्दे पर कांग्रेस लोगों को बहला रही है।

सिद्धारमैया ने कहा कि महादयी नदी परियोजना पर केंद्र सरकार को फैसला लेना है, न कि सोनिया गांधी को।

कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया सोमवार को उस वक्त झल्ला उठे जब एक पत्रकार ने उनसे महादयी नदी विवाद पर सवाल पूछ दिए। उन्होंने रिपोर्टर को नसीहत दी कि जब मामले की जानकारी न हो तो बेवजह और बेबुनियाद सवाल नहीं पूछने चाहिए। दरअसल, सिद्धारमैया पीएम नरेंद्र मोदी के आरोपों पर जवाब दे रहे थे। सिद्धारमैया ने कहा कि महादयी नदी परियोजना पर केंद्र सरकार को फैसला लेना है, न कि सोनिया गांधी को। पीएम मोदी ने आरोप लगाया था कि साल 2007 में सोनिया गांधी ने कहा था कि महादयी नदी का पानी कर्नाटक की तरफ नहीं मोड़ा जा सकता है। इस पर जब पत्रकार ने पूछा कि क्या सचमुच सोनिया गांधी ने महादयी का पानी रोका था। इस पर सिद्धारमैया बिफर पड़े और कहने लगे कि जब पूरे मामले की जानकारी न हो तो चुपचाप रहिए।

शनिवार (05 मई) को एक चुनावी रैली में पीएम नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस पर महादयी मुद्दे पर राजनीति करने का आरोप लगाया था और कहा था कि इस मुद्दे पर कांग्रेस लोगों को बहला रही है। पीएम मोदी ने दावा किया कि साल 2007 के गोवा विधान सभा चुनाव में सोनिया गांधी ने गडग की एक चुनावी रैली में कहा था कि महादयी नदी का पानी कर्नाटक को नहीं दिया जाएगा। पीएम मोदी ने कहा कि अब कांग्रेस उस मुद्दे पर राजनीति करने का असली चेहरा दिखा रही है। इसके अगले दिन बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने भी सिद्धारमैया पर किसान हितों की उपेक्षा का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा था कि अगर सिद्धारमैया सरकार ने तरीके से काम किया होता तो महादयी का पानी सूखा प्रभावित किसानों को मिल रहा होता।

बता दें कि महादयी नदी का विवाद कर्नाटक और गोवा के बीच करीब चालीस साल पुराना है। यह नदी कर्नाटक से निकलती है और गोवा होते हुए अरब सागर में मिलती है। कर्नाटक में 29 और गोवा में 58 किलोमीटर बहने के बाद अरब सागर में गिरती है। कर्नाटक के उत्तरी जिलों में पानी का संकट की वजह से कर्नाटक सरकार महादयी नदी पर बैराज बनाकर इसके पानी को उत्तरी कर्नाटक के जिलों में भेजना चाहता है लेकिन गोवा सरकार इस पर आपत्ति जताती रही है। गोवा सरकार का तर्क है कि इससे उसके राज्य के लोगों को पानी कम पड़ पाएगा। इसके अलावा पश्चिम घाट की पारिस्थितिकी पर भी बुरा असर पड़ेगा।

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