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कर्नाटक में इस जातीय गणित के भरोसे 72 सीटें जीतना चाहते हैं अमित शाह?

बीजेपी की केंद्रीय चुनाव समिति ने रविवार को पीएम नरेंद्र मोदी और पार्टी अध्यक्ष अमित शाह के साथ कुल 140 नामों पर मंथन किया, मगर उनमें से सिर्फ 72 को ही पहली लिस्ट में शामिल किया जा सका है।
दक्षिण कन्नड़ जिले में कार्यकर्ताओं के सम्मेलन में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह(फोटो-ट्विटर)

कर्नाटक विधानसभा चुनाव के लिए बीजेपी ने सबसे पहले उम्मीदवारों की लिस्ट जारी की है। रविवार (08 अप्रैल) देर शाम पार्टी ने 72 उम्मीदवारों के नामों का एलान किया है। पार्टी की तरफ से सीएम पद के उम्मीदवार बी एस येदियुरप्पा को भी पहली लिस्ट में ही स्थान दिया गया है। वो शिकारीपुरा सीट से चुनाव लड़ेंगे। बीजेपी ने टिकट बंटवारे से पहले खूब माथापच्ची की है और सभी जातियों के लोगों को प्रतिनिधित्व दिया है। पहली सूची में घोषित 72 उम्मीदवारों में से सबसे ज्यादा लिंगायतों को टिकट दिया गया है। इस समुदाय के 21 लोगों को पार्टी ने पहली सूची में टिकट दिया है। लिंगायतों के बाद पार्टी का फोकस ओबीसी पर है। इस समुदाय से कुल 19 लोगों को टिकट दिया गया है। राज्य के मैसूर इलाके में खासा प्रभुत्व रखने वाले वोक्कालिगा समुदाय को भी बीजेपी ने तरजीह देते हुए उस समुदाय के 10 लोगों को उम्मीदवार बनाया है।

बीजेपी की सूची के मुताबिक, 10 अनुसूचित जाति (एससी) के उम्मीदवारों को भी टिकट दिया गया है। अनुसूचित जनजाति (एसटी) के 6 और ब्राह्मण जाति से पांच उम्मीदवार चुनाव में खड़े किए गए हैं। एक उम्मीदवार कोवाडा जाति से ताल्लुक रखता है। इनमें से अधिकांश पार्टी के पुराने और दिग्गज नेता हैं। सिर्फ तीन बाहरियों को ही पार्टी ने पहली सूची में जगह दी है। येदियुरप्पा सरकार में चर्चित रहे जनार्दन रेड्डी के भाई सोमशेखर रेड्डी को फिलहाल टिकट नहीं दिया गया है। वो बेल्लारी सिटी से टिकट मांग रहे हैं।

सूत्रों के मुताबिक, बीजेपी की केंद्रीय चुनाव समिति ने रविवार को पीएम नरेंद्र मोदी और पार्टी अध्यक्ष अमित शाह के साथ कुल 140 नामों पर मंथन किया, मगर उनमें से सिर्फ 72 को ही पहली लिस्ट में शामिल किया जा सका है। उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही बाकी नामों का भी एलान कर दिया जाएगा। कर्नाटक विधान सभा की कुल 224 सीटों के लिए 12 मई को चुनाव होने हैं। बीजेपी की कोशिश है कि मौजूदा कांग्रेस की सिद्धारमैया सरकार को चुनावों में हराकर न सिर्फ वहां बीजेपी की सरकार बनाए, बल्कि दक्षिणी किले में सेंध लगाते हुए विजय अभियान को जारी रखा जाय।

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