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कर्नाटक: सीएम कैंडिडेट येदुरप्पा बेअसर? राम माधव ने डाला डेरा, पीएम मोदी हर हफ्ते करेंगे दो सभा

राम माधव ने वहां पहुंचकर राष्ट्रीय स्वयंसेवकों और जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं से मुलाकात की और फीडबैक लिया है। कहा जा रहा है कि अपने दौरे में राम माधव ने किसी भी बीजेपी नेता से मुलाकात नहीं की।
PM मोदी और अमित शाह का स्‍वागत करते हुए बीएस येदियुरप्पा। (File Photo)

कर्नाटक चुनाव में अब करीब एक महीने का वक्त रह गया है। ऐसे में चुनाव प्रचार ने तेजी पकड़ ली है। कांग्रेस की तरफ से मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी मोर्चा संभाले हुए हैं। राहुल अब तक पांच बार राज्य का दौरा कर चुके हैं और इस दौरान वो 30 में से 28 जिलों का दौरा कर चुके हैं। कहा जा रहा है कि राज्यभर में कांग्रेस को जनता के बीच से बेहतर रिस्पॉन्स मिल रहा है। इस बीच, बीजेपी ने भी अपनी चुनावी रणनीति को और मजबूत करते हुए पार्टी महासचिव राम माधव को बेंगलुरू भेजा। राम माधव ने वहां पहुंचकर राष्ट्रीय स्वयंसेवकों और जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं से मुलाकात की और फीडबैक लिया है। कहा जा रहा है कि अपने दौरे में राम माधव ने किसी भी बीजेपी नेता से मुलाकात नहीं की।

पार्टी के सीएम कैंडिडेट बी एस येदुरप्पा लिंगायत समुदाय से आते हैं लेकिन 220 लिंगायत मठों के संतों द्वारा कांग्रेस के समर्थन का एलान करने से बीजेपी को झटका लगा है। सूत्रों के मुताबिक पार्टी के अंदर इस बात की भी चर्चा हो रही है कि क्या येदुरप्पा की लिंगायतों पर पकड़ कमजोर हुई है? पार्टी राम माधव को भेजकर पूर्वोत्तर में जीत का मॉडल कर्नाटक में भी दोहराना चाहती है। साथ ही प्रदेश में मोदी लहर भी पैदा करना चाहती है, ताकि अंतिम समय में वोटर लामबंद हो सकें। बता दें कि पार्टी ने 72 उम्मीदवारों की पहली लिस्ट में कुल 21 लिंगायतों को भी टिकट दिया है।

इधर, चर्चा है कि अगले हफ्ते से पीएम नरेंद्र मोदी कर्नाटक में चुनावी रैलियों को संबोधित करेंगे। राज्य बीजेपी ने पीएम से 15 सभा करने का अनुरोध किया है लेकिन माना जा रहा है कि पीएम 8 से 10 जनसभा को संबोधित कर सकते हैं। पिछले महीने उन्होंने कर्नाटक में कुल चार सभाएं की थीं। इस बीच चर्चा है कि आरएसएस ने भी सर्वे कराया है, जिसमें बीजेपी की लहर बहुत अच्छी नहीं कही गई है। साल 2014 में मोदी लहर के दौरान 28 में से 17 लोकसभा सीटों पर बीजेपी की जीत हुई थी लेकिन इस बार लिंगायत, दलित, अल्पसंख्यक और क्षेत्रीय अस्मिता के नाम पर कांग्रेस लंबी लकीर खींचती दिख रही है। राज्य में 12 मई को चुनाव है, 15 मई को नतीजे आएंगे।

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