Gujarat MLA Jignesh Mevani would campaign against the BJP in Karnataka, Madhya Pradesh and Rajasthan Assembly polls - गुजरात में पहली बार बने हैं MLA, कर्नाटक-मध्यप्रदेश-राजस्थान में बीजेपी को हराने के लिए लगा रहे जोर - Jansatta
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गुजरात में पहली बार बने हैं MLA, कर्नाटक-मध्यप्रदेश-राजस्थान में बीजेपी को हराने के लिए लगा रहे जोर

35 साल के मेवाणी दलित नेता हैं और गुजरात में दलित आंदोलन के अगुवा रहे हैं।

जिग्नेश मेवानी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी।

गुजरात विधान सभा में पहली बार निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनकर पहुंचे जिग्नेश मेवाणी ने बीजेपी के खिलाफ कर्नाटक में भी झंडा बुलंद किया है। 35 साल के मेवाणी दलित नेता हैं और गुजरात में दलित आंदोलन के अगुवा रहे हैं। कर्नाटक के चिकमंगलूर में उन्होंने शुक्रवार (29) दिसंबर को एलान किया कि वो 2018 में होने वाले विधान सभा चुनावों में कर्नाटक के साथ-साथ मध्य प्रदेश और राजस्थान में बीजेपी के खिलाफ प्रचार करेंगे। बता दें कि इस साल कुल आठ राज्यों में विधान सभा चुनाव होने हैं।

‘द टेलीग्राफ’ से बात करते हुए जिग्नेश ने कहा कि उन्होंने गुजरात चुनावों में लोगों से कभी भी ये नहीं कहा कि इस पार्टी को वोट दो बल्कि उन्होंने लोगों को कहा कि बीजेपी को हराने के लिए वोट करो। जिग्नेश ने कहा कि उन्हें इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि कौन सा दल जीत रहा है, उन्हें तो सिर्फ बीजेपी की हार से मतलब है। उन्होंने कहा कि कर्नाटक, मध्य प्रदेश और राजस्थान में भी ऐसा ही दोहराया जाएगा।

चिकमंगलूर में साम्प्रदायिक सद्भाव के लिए एक कार्यक्रम के बाद उन्होंने एलान किया कि जाति, धर्म और राजनीतिक दलों से ऊपर उठकर कर्नाटक के कार्यकर्ता एक अलग गठबंधन बनाएं और 10,12 या 15 लोगों को नामांकित करें। कांग्रेस से इन लोगों की जगह अपने उम्मीदवार हटाने का दबाव बनाएं ताकि वहां दलितों, पिछड़ों, अल्पसंख्यकों और गरीबों की आवाज विधान सभा में उठाई जा सके। बता दें कि जिग्नेश चिकमंगलूर में एक शूफी मस्जिद की जगह मंदिर बनाने की भगवा ब्रिगेड की कोशिशों के बाद उपजे तनाव को शांत कराने वहां पहुंचे थे।

बता दें कि गुजरात के वडगाम से निर्दलीय चुनाव जीतने के बाद जिग्नेश ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर बड़ा बयान देते हुए उन्हें हिमालय चले जाने और वहां किसी मंदिर में जाकर घंटी पकड़ लेने की सलाह दी थी। जिग्नेश गुजरात में 2016 में हुए उना दलित कांड के बाद चर्चा में आए थे, जब उन्होंने दलित समाज को लामबंद कर मरे हुए पशुओं को उठवाने से मना कर दिया था। उन्होंने दलितों को मैला उठाने से बी मना करा दिया था। इसके बाद राज्यभर में घूम-घूमकर दलितों को एकजुट किया था।

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