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संस्कृत को लोकप्रिय बनाने को छापते थे मैगजीन, अब भाजपा ने बनाया राज्यसभा उम्मीदवार; जानें पार्टी ने क्यों खेला इस चेहरे पर दांव

एक संस्कृत मैगजीन का छापाखाना चलाने वाले शख्स को बीजेपी ने कर्नाटक से अपना राज्यसभा उम्मीदवार बनाया है। वह लंबे समय से संघ से जुड़े थे और कर्नाटक में सामाजिक काम करते रहते थे।

karnataka bjp, k narayanबीजेपी ने कर्नाटक में के नारायण को बनाया राज्यसभा उम्मीदवार।

बीजेपी अपने प्रत्याशियों और मुख्यमंत्रियों के चयन से अकसर हैरान करती रही है। अब भाजपा ने कर्नाटक से राज्यसभा के लिए एक छापाखाना चलाने वाले शख्स को राज्यसभा उम्मीदवार घोषित कर दिया है। कोरोना से अशोक गस्ती की मौत के बाद यहां एक सीट खाली हो गई है। बीजेपी ने 63 साल के के नारायण को उपचुनाव के लिए नया उम्मीदवार चुना है।

नारायण कर्नाटक में पिछड़ी जाति देवांगा या बुनकर समाज से आते हैं और कर्नाटक बीजेपी में अब तक उनकी कोई खास पहचान नहीं थी। वह स्पैन प्रिंट नाम से एक प्रिंटिंग फर्म चलाते हैं। संघ परिवार उनके काम से काफी प्रभावित है। वह ‘संभाषण संदेश’ नाम की पत्रिका निकालते हैं जो कि संस्कृत के प्रचार प्रसार का काम करती है। कई वर्षों से इस पत्रिका को निकालने के अलावा वह तटीय कर्नाटक में सामाजिक कार्यों में लगे हैं।

कर्नाटक के मुख्यमंत्री बीएस येदुरप्पा ने कहा, ‘मैं के नारायण को हृदय से बधाई देता हूं। राज्यसभा के लिए उन्हें पार्टी उम्मीदवार चुनाव गया है।’ यह फैसला पार्टी की हालिया नीतियों पर आधारित ही नजर आ रहा है। दरअसल बीजेपी बीएस येदुरप्पा को राज्य के बाहर के मामलों में बहुत कम ही या न के बराबर शामिल करती है। जून 2019 में कर्नाटक में राज्यसभा के चुनाव हुए थे। तब भी बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व ने बीएस येदुरप्पा की बात नहीं मानी थी।

येदुरप्पा ने लंबे समय से पार्टी वर्कर रहे एरन्ना कडाड़ी का नाम उम्मीदवार के रूप में सुझाया था। वह लिंगायत समुदाय से आते थे। लेकिन भाजपा ने अशोक गस्ती को मौका दिया था। माना जा रहा है कि गस्ती और नारायण का नामांकन भाजपा के राष्ट्रीय संयोजक सचिव बीएल संतोष के कहने पर हुआ है। वह कर्नाटक के ही रहने वाले हैं। कर्नाटक में 1 दिसंबर को राज्यसभा की एक सीट के लिए उपचुनाव कराया जाएगा।

कोरोना से संक्रिमित होने के बाद अशोक गस्ती का 55 वर्ष की आयु में निधन हो गया था। वह रायचूर के रहने वाले थे और बीजेपी के जमीनी स्तर के कार्यकर्ता रहे। उन्हें निर्विरोध राज्यसभा सदस्य चुना गया था। वह एबीवीपी के सक्रिय सदस्य रह चुके थे। सविता समाज से उनका संबंध था।

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