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कर्नाटक चुनाव: येदियुरप्पा के बेटे ने पहली बार बताया क्‍यों वापस ल‍िया नाम, पापा के पास आई एक कॉल और…

माना जा रहा है कि बीजेपी के इस फैसले की वजह यह है कि जब पीएम कर्नाटक में प्रचार करने आएं तो राजनीति में वंशवाद के मुद्दे पर राहुल गांधी और कांग्रेस को घेर सकें। गौरतलब है कि पिछले सप्ताह एक रैली में पीएम ने कहा था कि वे कामदार हैं ना कि राहुल गांधी की तरह नामदार।

कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा के बेटे बीवाई विजयेन्द्र चुनाव प्रचार के दौरान पार्टी अध्यक्ष अमित शाह के साथ। (फोटो-twitter/@@BYVijayendra)

23 अप्रैल को बीजेपी के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार बीएस येदियुरप्पा के बेटे बीवाई विजयेन्द्र वरुणा सीट से पर्चा भरने के लिए सारी तैयारियां कर चुके थे। समर्थकों का जमावड़ा लग चुका था। पेपर्स तैयार किये जा चुके थे। अचानक एक कॉल आता है, और कार्यकर्ताओं का जश्न थम जाता है। ये फोन बीजेपी के मुख्यमंत्री उम्मीदवार येदियुरप्पा को आता है। बीवाई विजयेन्द्र एनडीटीवी के साथ एक इंटरव्यू में इसका खुलासा किया है। बीवाई विजयेन्द्र ने बताया, “23 अप्रैल को राज्य बीजेपी के अध्यक्ष येदियुरप्पा जी को एक कॉल आया, कहा गया कि विजयेन्द्र को नामांकन दाखिल नहीं करना चाहिए, पापा ने मुझे निर्देश दिया कि पर्चा नहीं भरना है, सिर्फ पार्टी का काम पूरा करो और वापस आ जाओ, मैंने कभी पूछने की जरूरत नहीं समझी कि क्या कारण है, ऐसा क्यों हुआ, क्योंकि पापा ने मुझे खुद निर्देश दिया था।

ये कॉल उस दिन सुबह 11 बजे आया था।” विजयेन्द्र दावा करते हैं कि इस बारे में उन्होंने अपने पिता जी से कभी सवाल नहीं पूछा। जब उनसे पूछा गया कि क्या ये फैसला दिल्ली में आलाकमान की ओर से लिया गया था, और क्या ये माना जाना चाहिए ये कि फोन भी दिल्ली से आया था। विजयेन्द्र कहते हैं कि वे इस बारे में निश्चित रूप से कुछ भी नहीं कह सकते हैं। विजयेन्द्र कहते हैं, “इस प्वाइंट से हमें आगे बढ़ना था।”

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बता दें कि विजयेन्द्र ने मैसूर के वरुणा में कई सप्ताह का चुनाव प्रचार किया था। ऐसा माना जा रहा था कि वह इस सीट पर कांग्रेस के मुख्यमंत्री उम्मीदवार और वर्तमान सीएम सिद्धारमैया के बेटे के खिलाफ चुनाव में उतरने वाले थे। जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्हें इस फैसले पर आश्चर्य हुआ। विजयेन्द्र बताते हैं, “शॉक से ज्यादा ये मेरे लिए दुख की बात थी, इसलिए नहीं कि मुझे टिकट नहीं दिया गया था, बल्कि इसलिए क्योंकि कई कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने बीजेपी ज्वाइन की थी, वे मुझे सपोर्ट कर रहे थे।” माना जा रहा है कि बीजेपी के इस फैसले की वजह यह है कि जब पीएम कर्नाटक में प्रचार करने आएं तो राजनीति में वंशवाद के मुद्दे पर राहुल गांधी और कांग्रेस को घेर सकें। गौरतलब है कि पिछले सप्ताह एक रैली में पीएम ने कहा था कि वे कामदार हैं ना कि राहुल गांधी की तरह नामदार। विजयेन्द्र भी मानते हैं कि ऐसा हो सकता है। विजयेन्द्र ने कहा कि उनके पिता को पार्टी से पूरा समर्थन है और वह चुनाव जीतेंगे।

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