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तीन साल की बच्ची का रेप कर बोला लड़का – स्कूल में सेक्स के बारे में जो कुछ सुना उसको महसूस करना चाहता था

पुलिस ने आरोपी को जुवेनाइल कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे दो दिन के लिए पुलिस हिरासत में भेज दिया।

bullying, child bullying, Girl bullying, anti-bullying Facebook page, child harassment, Justice for Ashley, International news, Hindi news, Latest International newsइस तस्वीर का इस्तेमाल केवल प्रतीक के तौर पर किया गया है।

बेंगलुरु में 14 साल के एक लड़के पर अपने ही घर में पड़ोस में रहने वाली तीन वर्षीय बच्ची का रेप करने का आरोप लगा है। यह मामला एचएएल पुलिस थाना क्षेत्र का है। एक पुलिस अधिकारी द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार बुधवार को आरोपी लड़के के पड़ोस में रहने वाले सिक्यूरिटी गार्ड की बेटी शाम को साढ़े सात बजे की करीब आरोपी के घर टीवी देखने के लिए गई। उस समय आरोपी घर में अकेला था। उसने इस मौके का फायदा उठाते हुए घर का दरवाजा अंदर से बंद कर लिया। इसके बाद आरोपी ने बच्ची के साथ रेप किया और उससे इस बारे में किसी को न बताने के लिए कहा। बच्ची का रेप करने के बाद आरोपी वहां से फरार हो गया।

इसके बाद रोते-रोते बच्ची घर जाने लगी तो पड़ोसियों ने देखा कि बच्ची की फ्रॉक पर खून के धब्बे लगे थे। पड़ोसियों ने इसकी जानकारी बच्ची के परिजनों को दी, जिसके बाद उसके परिजन उसे अस्पताल लेकर गए जहां पर डॉक्टरों ने बच्ची के साथ रेप होने की बात कही। बच्ची ने तुरंत ही इसकी शिकायत पुलिस में की। एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि पुलिस की एक टीम आरोपी को पकड़ने उसके घर पहुंची तो वह पुलिस को वहां नहीं मिला। इसके बाद पुलिस ने उसे आस-पास के इलाकों में ढूंढा तो वह एक दुकान पर बैठा हुआ मिला। पुलिस ने उसे हिरासत में लेकर पूछताछ की तो उसने बताया कि वह अपने दोस्तों के साथ अक्सर सेक्स और पोर्न वीडियो के बारे में बात करता रहता था। इन्ही बातों से प्रभावित होकर आरोपी लड़के ने इस कृत्य को अंजाम दिया।

आरोपी ने पुलिस से कहा कि उसे नहीं पता कि उसने क्या किया लेकिन वह बस इस चीज को महसूस कर उसका अनुभव करना चाहता था जिसके बारे में वह स्कूल में अपने दोस्तों के साथ बात किया करता था। पुलिस ने आरोपी को जुवेनाइल कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे दो दिन के लिए पुलिस हिरासत में भेज दिया। मनोचिकित्सकों का कहना है कि आरोपी लड़के के दिमाग पर इन बातों का काफी गहरा प्रभाव पड़ा है। यह किशोरोव्सथा ऐसी उम्र है जब मां-बाप को अपने बच्चों पर पूरी तरह से कंट्रोल होना चाहिए। मनोचिकित्सक ने यह भी कहा कि इस उम्र में बच्चा भटके नहीं इसके लिए परिजनों को बच्चों का अच्चे से मार्गदर्शन करना चाहिए और उन्हें अच्छे-बुरे की पहचान करानी चाहिए।

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