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छात्रों और श‍िक्षकों के यौन शोषण के आरोपी प्र‍िंस‍िपल को 24 घंटे में म‍िली बेल, अगले ही द‍िन आया स्‍कूल

केंद्रिय विद्यालय में हुई यौन शोषण की घटना के आरोपी प्रिंसिपल को बेल मिल गई है। आरोपी प्रिंसिपल को अभी सिर्फ बेल ही मिली है लेकिन उसने स्कूल में आना शुरु कर दिया है।

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बंगलुरु के सदाशिवनगर के केंद्रिय विद्यालय में हुई यौन शोषण की घटना के आरोपी प्रिंसिपल को बेल मिल गई है। आरोपी प्रिंसिपल को अभी सिर्फ बेल ही मिली है लेकिन उसने स्कूल में आना शुरु कर दिया है। प्रिंसिपल पर स्कूल की छात्रों और शिक्षकों के साथ यौन शोषण करने का आरोप है। पुलिस ने प्रिंसिपल के खिलाफ पोस्को एक्त के तहत मुकदमा कर रखा है। इस केस में सबसे चौंकाने बात तो यह कि गिरफ्तारी के अगले दिए ही बेल मिलने के बाद प्रिंसिपल ने स्कूल में वापसी कर ली। केंद्रीय विद्यालय के प्रिंसिपल कुमार ठाकुर पर स्कूल के शिक्षकों और छात्रों ने आरोप लगाया है कि प्रिंसिपल ने उनके साथ यौन शोषण किया है। उनका कहना है कि सोशल मैसेंजर वट्सऐप के जरिए प्रिंसिपल उनसे अश्लील बातें किया करता था।

डीसीपी चंद्रगुप्त द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार प्रिंसिपल पर यह भी आरोप है कि वह शिक्षकों को धमकाता था कि अगर वह इसकी खबर पुलिस को देंगी या उसके खिलाफ केस दर्ज कराएंगी तो वह उनकी तनख्या रोक देगा. इस केस से जुड़े एक अधिकारी ने बताया कि आरोपी प्रिंसिपल 12वीं कक्षा की छात्राओ को अकेले अपने कमरे में बुलाकर उनसे गंदी-गंदी बातें किया करता था। इस बात की जानकारी छात्राओं में से किसी ने अपनी शिक्षक को दी। अधिकारी ने कहा कि हम इस बात से बहुत चकित हैं कि बेल मिलने के बाद आरोपी फिर से स्कूल चला गया। उसने बाकी दिनों की ही तरह स्कूल में आकर रजिस्टर में एंट्री की। अधिकारी ने बताया कि सबसे ज्यादा हैरानी तो इस बात की हो रही है कि वापस आने के बाद वह उन छात्रा को ढूंढ रहा है जिसने उसके खिलाफ केस दर्ज कराया है।

आपको बता दें कि 14 जनवरी को स्कूल के शिक्षकों ने प्रिंसिपल के खिलाफ चाइल्ड हेल्पलाइन पर केस दर्ज कराया था। इसके बाद 24 जनवरी को चाइल्ड हेल्पलाइन के प्रधान अधिकारी ने इसकी सूचना राज्य के पुलिस कमिश्नर परवीन सूद को दी। परवीन सूद ने इसकी केस की जिम्मेदारी डीसीपी चंद्रगुप्त को सौंप रखी है।

वहीं इस मामले में राज्य शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि कर्नाटक चाइल्ड प्रोटेक्शन पॉलिसी के तहत इस प्रकार के आरोपियों को सस्पेंड कर देना चाहिए। उन्होंने मानव संसाधन मंत्रालय पर भी सवाल उठाए कि ऐसे व्यक्ति को सस्पेंड करने की बजाए छुट्टी पर क्यों भेज दिया।

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