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तमिलनाडु, कर्नाटक में कई जगहों पर हिंसा, तमिलनाडु के लिए छोड़े जाने वाले पानी की मात्रा घटाई

रामेश्वरम में नाम-तामिझार काचि सहित विभिन्न संगठनों के आंदोलित सदस्यों ने कर्नाटक के पंजीकरण वाले सात पर्यटक वाहनों को क्षतिग्रस्त कर दिया।

Author नई दिल्ली | September 13, 2016 01:42 am
कावेरी जल विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ कर्नाटक बंद के दौरान कन्नड़ समर्थक कार्यकर्ताओं ने टायर जलाकर राष्ट्रीय राजमार्ग जाम कर दिया। (PTI Photo by Shailendra Bhojak/ 9 Sep, 2016)

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को अपने पांच सितंबर के आदेश में संशोधन कर कर्नाटक को तमिलनाडु के लिए कावेरी नदी से छोड़े जाने वाले पानी की मात्रा घटाते हुए 20 सितंबर तक प्रतिदिन 12,000 क्यूसेक पानी जारी करने का आदेश दिया ताकि समीपवर्ती राज्य के किसानों की हालत में सुधार हो सके। कर्नाटक की अपील पर विचार के लिए छुट्टी के दिन बैठे, न्यायमूर्ति दीपक मिश्र और यूयू ललित के पीठ ने कर्नाटक के आवेदन के ‘लबो लहजे’ पर नाराजगी जताई और कहा कि उसके आदेश का अनुपालन नहीं करने के पीछे कानून और व्यवस्था की समस्या को आधार नहीं बनाया जा सकता। कर्नाटक के आवेदकों में से एक की उस अपील को पीठ ने खारिज कर दिया जिसमें सुप्रीम कोर्ट से तमिलनाडु के लिए 15,000 क्यूसेक पानी प्रतिदिन छोडने के लिए दिए गए आदेश को अगली सुनवाई तक इस आधार पर रोकने का आग्रह किया गया कि कावेरी जल न्यायाधिकरण की व्यवस्था में खामी है जिसमें जलाशय में एक खास माह में पानी की कमी के मुद्दे के बारे में कुछ नहीं कहा गया है।

पीठ ने कर्नाटक के ताजा आग्रह की सामग्री का संदर्भ देते हुए कहा ‘हम यह कहेंगे कि आवेदन का ‘लबो लहजा’ बहुत ही व्यथित करने वाला है।’ आगे पीठ ने कहा कि आंदोलन, दंगे या किसी भी तरह के उकसावे वाले घटनाक्रम आदेश में बदलाव की मांग का आधार नहीं बन सकते। पीठ ने कहा ‘इस अदालत के आदेश का सभी संबद्ध पक्षों को पालन करना होगा और कार्यपालक का दायित्व यह सुनिश्चित करना है कि आदेशों का पूरी भावना के साथ पालन किया जाए।’ तमिलनाडु के लिए पानी छोड़े जाने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश को लेकर कर्नाटक के कई हिस्सों से किसानों द्वारा विरोध प्रदर्शन किए जाने की खबर है। सुनवाई के दौरान पीठ ने कर्नाटक और तमिलनाडु के दावों और उनके जवाबों पर गौर किया और कहा कि वह मामले में निष्पक्षतापूर्वक क्षतिपूर्ति की अवधारणा को लागू करेगी। इसी के साथ ही पीठ ने अगली सुनवाई 20 सितंबर को तय कर दी। कर्नाटक की ओर से दाखिल उस आवेदन पर सुनवाई कर रहा था जिसमें कर्नाटक द्वारा तमिलनाडु के लिए कावेरी नदी से छोड़े जाने वाले पानी की मात्रा को 15,000 क्यूसेक से घटा कर 10,000 क्यूसेक करने का आदेश देने का आग्रह किया गया था। शनिवार को देर शाम दाखिल इस याचिका पर सुनवाई करने का सुप्रीम कोर्ट का निर्णय तब आया जब अदालत की रजिस्ट्री के समक्ष इसका जिक्र किया गया। रजिस्ट्री ने प्रधान न्यायमूर्ति टीएस ठाकुर के साथ परामर्श किया।

कर्नाटक ने अपनी याचिका में शीर्ष अदालत के पांच सितंबर के आदेश में बदलाव का अनुरोध किया था। सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु के किसानों को तत्काल राहत देने के तौर पर दस दिनों के लिए 15,000 क्यूसेक पानी छोड़े जाने का आदेश दिया था। आवेदन में मांग की गई कि दस दिन के बजाय सुप्रीम कोर्ट को केवल छह दिन तक पानी देने संबंधी आदेश देना चाहिए क्योंकि व्यापक आंदोलन और हर दिन हो रहे 500 करोड़ रुपए के नुकसान के मद्देनजर कर्नाटक खुद चिंताजनक स्थिति से गुजर रहा है। इस आवेदन में कर्नाटक ने कहा कि जनता का गहरा दबाव है और राज्य पुलिस को सार्वजनिक संपत्ति को क्षतिग्रस्त होने से रोकने में खासी मुश्किल का सामना करना पड़ रहा है। कर्नाटक ने आवेदन में कहा कि आपके द्वारा दी गई व्यवस्था से कर्नाटक के पूरे दक्षिणी हिस्से में तनाव पैदा हो गया है और जनजीवन बाधित हो गया है। किसानों का आंदोलन चल रहा है क्योंकि उनकी सूखी फसल को तमिलनाडु में किसानों की फसल के समकक्ष रख दिया गया है। तमिलनाडु में चावल की फसल होती है जिसके लिए कर्नाटक में होने वाली हल्की फसलों की तुलना में दोगुने पानी की जरूरत होती है।

आवेदन में कहा गया है कि किसान, खासकर मैसूरू, हासन, मान्ड्या और बेंगलुरु जिलों में सड़कों पर आ गए हैं जिससे आयकर और सेवाकर के रूप में राजस्व देने वाले और देश में 60 अरब डॉलर की विदेशी मुद्रा देने वाले बेंगलुरु का आईटी उद्योग प्रभावित हुआ है। आवेदन में सुरक्षा एजंसियों से मिली उस जानकारी का भी जिक्र है जिसमें कहा गया है कि अगर पानी का बहाव आगे जारी रखा गया तो स्थिति हाथ से निकल सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने पांच सितंबर को एक अंतरिम आदेश में कर्नाटक सरकार से तमिलनाडु को अगले दस दिन तक प्रतिदिन 15,000 क्यूसेक कावेरी जल छोड़ने को कहा था, जिससे कुछ हद तक तमिलनाडु के किसानों की दशा सुधर सके। साथ ही सर्वोच्च अदालत ने तमिलनाडु को भी न्यायाधिकरण के फैसले के मुताबिक कावेरी का पानी छोड़े जाने के लिए तीन दिन के अंदर निगरानी समिति से संपर्क करने को कहा था। निगरानी समिति न्यायाधिकरण के फैसले के क्रियान्वयन के लिए बनाई गई थी।
कावेरी पर सुप्रीम कोर्ट ने आदेश बदला

कावेरी नदी का पानी छोड़े जाने के मुद्दे पर कर्नाटक में जारी आंदोलन के विरोध में सोमवार को पड़ोसी राज्य तमिलनाडु और पुडुचेरी के विभिन्न हिस्सों में कुछ तमिल संगठनों ने कर्नाटक के खिलाफ प्रदर्शन किए और इसके कुछ वाणिज्यिक व सरकारी प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया। जबकि बेंगलुरु समेत कर्नाटक के कुछ हिस्सों में भी हिंसा की घटनाएं हुईं।  कन्नड़ फिल्म अभिनेताओं के खिलाफ सोशल मीडिया पर कथित ‘अपमानजनक’ टिप्पणियों को लेकर बेंगलुरु में कुछ लोगों द्वारा 22 वर्षीय एक तमिल युवक को कथित तौर पर पीटे जाने का वीडियो वायरल होने के एक दिन बाद तमिलनाडु और पुुडुचेरी में विरोध प्रदर्शन हुए हैं।

पुलिस ने बताया कि नाम-तामिझार काचि और तामिझागा वाझवुरच्च्माइ काचि जैसे संगठन तमिलनाडु के लिए कावेरी नदी का पानी छोड़े जाने के खिलाफ कर्नाटक में जारी आंदोलन के विरोध में सड़कों पर उतर आए। उसने बताया कि यहां स्थित एक लोकप्रिय रेस्तरां व रामेश्वरम में कर्नाटक के नंबर वाले पर्यटक वाहनों में तोड़फोड़ की गई । इसके साथ ही प्रदर्शनकारियों ने केंद्र शासित क्षेत्र पुडुचेरी में कर्नाटक बैंक की शाखा में हंगामा किया। पुलिस ने कहा कि रेस्तरां हमला मामले में चार लोग हिरासत में लिए गए हैं, जबकि पुडुचेरी में करीब 25 लोग हिरासत में लिए गए हैं। तमिलनाडु में कर्नाटक बैंक की शाखाओं को पुलिस सुरक्षा उपलब्ध कराई गई है । यहां सुबह हुई एक घटना में थंताई पेरियार द्रविड़ कषगम (टीपीडीके) से ताल्लुक रखने वाले प्रदर्शनकारियों ने कर्नाटक निवासी एक व्यक्ति के स्वामित्व वाले एक लोकप्रिय रेस्तरां में कथित तौर पर तोड़फोड़ की। एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि प्रदर्शनकारियों ने लोहे की छड़ों और लाठी-डंडों से रेस्तरां की खिड़कियों के शीशे तोड़ दिए। घटना के सिलसिले में संगठन से संबंधित चार लोगों को हिरासत में लिया गया है।

रामेश्वरम में नाम-तामिझार काचि सहित विभिन्न संगठनों के आंदोलित सदस्यों ने कर्नाटक के पंजीकरण वाले सात पर्यटक वाहनों को क्षतिग्रस्त कर दिया। प्रदर्शनकारी अग्नि तीर्थम के पास स्थित मंदिर की पार्किंग में घुस गए और वाहनों को क्षतिग्रस्त कर दिया। इरोड में कर्नाटक बैंक की शाखाओं के बाहर विरोध प्रदर्शन हुए और पुडुचेरी में भीड़ ने बैंक शाखा में घुसकर उत्पात मचाया व बैंक कर्मियों से परिसर खाली करने को कहा। कर्मचारी हड़बड़ी में वहां से भागने लगे और दहशतजदा ग्राहक भी बैंक से बाहर निकल आए।
वहां पास में ही मौजूद पुलिसकर्मी तुरंत बैंक पहुंचे और प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया। घटना के बाद कुछ घंटे तक बैंक बंद रहा, लेकिन बाद में यह फिर से खुल गया। हालांकि, पुलिस की सलाह के बाद इसे फिर से बंद कर दिया गया। तमिलनाडु में वेल्लूर में राजकीय विधि कॉलेज के छात्रों ने मुद्दे को लेकर कक्षाओं का बहिष्कार किया। पश्चिमी तमिलनाडु के इरोड, तिरुपुर और कोयंबटूर से कर्नाटक के मैसूरू, कामराजनगर और अन्य स्थानों के लिए बस सेवा लगातार आठवें दिन भी ठप रही।

इरोड से कर्नाटक के लिए दोपहिया वाहनों सहित वाणिज्यिक व गैर वाणिज्यिक वाहन बंद रहे, जबकि होसूर से अंतरराज्यीय परिवहन भी कर्नाटक में प्रदर्शनों के चलते प्रभावित रहा।
उधर बेंगलुरु समेत कर्नाटक के कुछ हिस्सों में भी हिंसा की घटनाएं बढ़ गई हैं। सिद्धरमैया सरकार ने अपने राज्य में तमिल लोगों की सुरक्षा का आश्वासन देते हुए तमिलनाडु सरकार से कन्नड़ लोगों की सुरक्षा करने को कहा है।  तमिलनाडु में अपने राज्य के वाहनों व कन्नड़ लोगों की संपत्ति पर कथित हमलों पर गुस्सा निकालते हुए कर्नाटक के बेंगलुरु, मांद्या, मैसूरू, चित्रदुर्ग और धारवाड़ जिलों में कन्नड़ कार्यकर्ताओं ने पड़ोसी राज्य के पंजीयन वाले ट्रकों पर पथराव किया या उन्हें आग के हवाले कर दिया। कर्नाटक के पुलिस महानिदेशक ओम प्रकाश ने कहा कि हालात तनावपूर्ण लेकिन नियंत्रण में हैं। पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक तमिलनाडु के कम से कम छह ट्रकों को आग के हवाले कर दिया गया या उन पर पथराव किया गया जबकि चेन्नई में मोबाइल की एक दुकान व बेंगलुरु में दो होटलों पर हमला किया गया। विभिन्न कन्नड़ समर्थित संगठनों के कार्यकर्ता सड़कों पर उतर आए हैं।
इस बीच, केंद्रीय मंत्री पोन राधाकृष्णन ने कर्नाटक में ‘तमिलों पर हमलों’ को लेकर चिंता जताई और कहा कि सुरक्षा की जिम्मेदारी राज्य की सत्तारूढ़ कांग्रेस पर है। उन्होंने कहा, ‘यदि कर्नाटक की कांग्रेस सरकार इसे (हमलों) रोकने के लिए तैयार नहीं है तो बुरे परिणाम निकल सकते हैं और कर्नाटक सरकार को उसकी जिम्मेदारी लेनी होगी।’
तमिल मनीला कांग्रेस के नेता एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री जीके वासन ने कहा कि कन्नड़ अभिनेताओं के खिलाफ पोस्ट लिखने पर तमिल युवक पर हमले को रोक पाने में पुलिस की विफलता उसके ‘मूकदर्शक’ बने रहने के बराबर है। यह राज्य सरकार के समस्या के प्रति लापरवाही भरा रवैया अपनाने की तरफ इशारा करता है।

 

 

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