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तमिलनाडु को दस दिन तक 3000 क्यूसेक पानी देने के निर्देश को कर्नाटक सुप्रीम कोर्ट में देगा चुनौती

सुप्रीम कोर्ट ने पांच सितंबर को कर्नाटक से तमिलनाडु के किसानों की दुर्दशा को ध्यान में रखते हुए उस राज्य को 10 दिन तक रोजाना 15000 क्यूसेक पानी छोड़ने को कहा था।

Author नई दिल्ली | September 20, 2016 5:04 AM
कावेरी जल विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ कर्नाटक बंद के दौरान कन्नड़ समर्थक कार्यकर्ताओं ने टायर जलाकर राष्ट्रीय राजमार्ग जाम कर दिया। (PTI Photo by Shailendra Bhojak/ 9 Sep, 2016)

तमिलनाडु और कर्नाटक के बीच मतभेदों को खारिज करते हुए कावेरी निगरानी समिति ने सोमवार को कर्नाटक को आदेश दिया कि वह तमिलनाडु को 21 सितंबर से 30 सितंबर के बीच रोजाना 3000 क्यूसेक पानी छोड़े। दिन भर चले विचार-विमर्श के बाद भी कर्नाटक और तमिलनाडु छोड़े जाने वाले पानी की मात्रा को लेकर सहमति पर नहीं पहुंच सके। समिति के इस फैसले पर कर्नाटक और तमिलनाडु ने नाराजगी जताई है। कर्नाटक मंगलवार को इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देगा। केंद्रीय जल संसाधन सचिव और समिति के अध्यक्ष शशि शेखर ने अपने अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए कर्नाटक से तमिलनाडु को 21 से 30 सितंबर तक रोजाना 3000 क्यूसेक पानी छोड़ने को कहा।

बैठक के बाद शेखर ने संवाददाताओं से कहा- वे सहमत नहीं हुए हैं। मंगलवार को जब मामला सुप्रीम कोर्ट में आएगा तो दोनों राज्य इस आदेश को चुनौती देने के लिए स्वतंत्र हैं या वे अदालत के समक्ष आदेश पर सहमति जता सकते हैं। निगरानी समिति पिछली 12 सितंबर को अपनी पहली बैठक में पर्याप्त सूचना के अभाव में कर्नाटक की ओर से छोड़े जाने वाले पानी की मात्रा पर किसी फैसले पर नहीं पहुंच सकी थी। समिति ने उनसे 15 सितंबर तक सूचना देने को कहा था। सुप्रीम कोर्ट ने पांच सितंबर को कर्नाटक से तमिलनाडु के किसानों की दुर्दशा को ध्यान में रखते हुए उस राज्य को 10 दिन तक रोजाना 15000 क्यूसेक पानी छोड़ने को कहा था। अंतरिम आदेश के बाद कर्नाटक में, खासतौर पर मंड्या जिले में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए थे।

शेखर ने कहा कि उन्होंने कई चीजों को ध्यान में रख कर फैसला किया है जिनमें कर्नाटक में पेयजल और सिंचाई के लिए पानी की जरूरत और तमिलनाडु में गर्मियों की फसलों के लिए पानी की जरूरत को ध्यान में रखा। उन्होंने कहा कि समिति की अगली बैठक अक्तूबर में किसी दिन होगी, वहीं 30 सितंबर के बाद जरूरत पड़ने पर तमिलनाडु को पानी छोड़ने के बारे में निर्णय लिया जाएगा। दोनों राज्य छोड़े जाने वाले पानी की मात्रा पर सहमति पर नहीं पहुंच सके, हालांकि उन्होंने इस बात पर रजामंदी जताई कि फरवरी 2017 से हालात का जायजा लेने के लिए समिति की बैठक तब तक हर महीने होनी चाहिए जब तक कावेरी प्रबंधन बोर्ड प्रभाव में नहीं आ जाता। प्रस्तावित बोर्ड से संबंधित मामला शीर्ष अदालत में लंबित है। समिति ने नदी के जल प्रवाह के आंकड़े उसी समय (रीयल टाइम में) समिति सचिवालय (नई दिल्ली), तमिलनाडु, कर्नाटक, केरल और पुडुचेरी के बीच प्रसारित करने के प्रस्ताव पर एक करार करने पर भी सहमति जताई।

केंद्रीय जल आयोग ऐसे उपकरणों पर काम कर रहा है जिन्हें रीयल-टाइम में आंकड़े मुहैया कराने के लिहाज से विभिन्न स्थानों पर लगाया जाएगा। प्रामाणिक आंकड़ों की कमी के कारण विभिन्न पक्षों के बीच आम-सहमति बनने में कठिनाई होती है। बैठक में कर्नाटक ने जहां थोड़ा भी पानी छोड़ने का जोरदार विरोध किया, वहीं तमिलनाडु ने कावेरी जल विवाद पंचाट के आदेश के मुताबिक पानी प्रवाहित करने का अनुरोध किया। उधर, कावेरी निगरानी समिति के इस आदेश को निराशाजनक और ह्यआघातह्ण बताते हुए कर्नाटक सरकार ने कहा कि वह मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में समिति के इस फैसले को चुनौती देगी। तमिलनाडु के किसानों ने भी निराशा जताते हुए कहा कि यह मात्रा बहुत कम है। राज्य के राजनीतिक दलों ने भी इस पर निराशा प्रकट की। कर्नाटक के गृहमंत्री जी परमेश्वर ने संवाददाताओं से कहा कि समिति का फैसला हमारे लिए निराशाजनक है। मंगलवार को हम इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे रहे हैं। सुपरवाइजरी कमेटी का फैसला राज्य के लिए एक और आघात है। उन्होंने कहा-ह्यहम बार-बार अन्याय का सामना कर रहे हैं। मुख्यमंत्री और मंत्रिपरिषद आगे की कार्रवाई के बारे में फैसला करेंगे।

उधर तमिलनाडु आॅल फार्मर्स फेडरेशंस के अध्यक्ष पीआर पांडियान ने कहा कि आदेश निराशाजनक है। उन्होंने चेन्नई में कहा-ह्यजितना पानी छोड़ने का आदेश दिया गया है वह सांबा की फसल की तैयारी के लिए भी पर्याप्त नहीं होगा।ह्ण पीएमके अध्यक्ष रामदॉस ने कहा कि न्याय के नाम पर यह तमिलनाडु के साथ अन्याय है। उन्होंने कहा कि इस आदेश का तमिलनाडु के किसानों के लिए कोई मतलब नहीं है।

 

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