ताज़ा खबर
 

कर्नाटक हाई कोर्ट कहा- टीपू सुल्तान सिर्फ अपने हितों के लिए लड़ा, क्यों मनाई जाए जयंती

पिछले साल जब कर्नाटक में कांग्रेस सरकार ने पहली बार टीपू जयंती मनाने का फैसला किया था तब भी इस पर काफी विवाद हुआ था।
Author नई दिल्ली | November 3, 2016 01:44 am
ब्रिटिश लाइब्रेरी में मौजूद टीपू सुल्तान की असली पेंटिंग।

कर्नाटक में टीपू सुल्तान की जयंती मनाने पर एक बार फिर विवाद बढ़ता दिख रहा है। कर्नाटक के कुर्ग के एक किसान केपी मंजूनाथ ने इस जयंती के आयोजन के खिलाफ कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। किसान की तरफ से दायर याचिका कर्नाटक हाईकोर्ट से अपील की गई है कि 10 नवंबर को होने वाले टीपू जयंती समारोह पर रोक लगाई जाए।

अब इस केस में इस साल सुनवाई करते हुए कर्नाटक हाई कोर्ट ने बुधवार को कहा कि टीपू सुल्तान कोई स्वतंत्रता सेनानी नहीं बल्कि सिर्फ एक राजा था, जो अपने हितों की रक्षा के लिए लड़ा। इसके बाद राज्य सरकार से टीपू जयंती मनाने का कारण भी पूछा। मुख्य न्यायाधीश एस कमल मुखर्जी की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा, ‘टीपू जयंती मनाने के पीछे तर्क क्या है?’ जस्टिस मुखर्जी ने कोडागू और प्रदेश के अन्य हिस्सों में सांप्रदायिक तनाव की आशंका के बीच टीपू जयंती मनाने के सरकार के फैसले पर सवाल उठाए। सरकारी वकील एमआर नाइक ने हालांकि जयंती मनाने के फैसले का बचाव किया। उन्होंने दलील दी कि टीपू महान योद्धा था। उसने अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी। याची के वकील साजन पुवइया ने तर्क दिया कि टीपू एक तानाशाह शासक था, जिसने कोदवा, कोंकणी और ईसाई सहित कई समुदायों के लोगों को मौत के घाट उतारा था। मामले की सुनवाई गुरुवार को भी जारी रहेगी।

राहुल गांधी पर टिप्पणी करने के मामले में कांग्रेस विधायक निलंबित; कहा- ‘गधे को घोड़ा नहीं बता सकते

पिछले साल जब कर्नाटक में कांग्रेस सरकार ने पहली बार टीपू जयंती मनाने का फैसला किया था तब भी इस पर काफी विवाद हुआ था। आरएसएस का आरोप है कि टीपू ने बड़े पैमाने पर मालाबार इलाके में धर्म परिवर्तन कराया था। ऐसे में टीपू जयंती नहीं मनाई जानी चाहिए। संघ ने टीपू सुल्तान को दक्षिण का औरंगजेब तक करार दे दिया। भारी विरोध के बावजूद भी पिछले साल मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की पहल पर पहले समारोह के दौरान कुर्ग में हिंसा भड़क उठी थी, जिसमें दो लोगों की जान चली गई थी।

आरएसएस के क्षेत्रीय प्रचार प्रमुख वी. नागराज ने कहा कि अंग्रेज़ों और मुस्लिम इतिहासकारों ने इसका वर्णन किया है कि टीपू ने बड़े पैमाने में हिंदुओं और ईसाईयों का धर्म परिवर्तन किया। इतना ही नहीं वो एक निरंकुश शासक था। ऐसे में संघ परिवार सिद्धारमैया सरकार के इस फैसले का विरोध करता है। दूसरी तरफ मुख्यमंत्री सिद्धारमैया का कहना है कि इस बार भी टीपू जयंती पिछली बार की तरह 10 नवम्बर को मनाया जाएगी। वहीं, लोकसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे का कहना है कि आरएसएस के इशारे पर कांग्रेस नहीं चलेगी। जब आरएसएस गोडसे दिवस मना सकती है तो टीपू सुल्तान दिवस मनाने में क्या हर्ज है?

 

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

  1. A
    Avinash
    Nov 3, 2016 at 2:53 pm
    तुम बी तो कट्टर हिन्दू हो..किस काम के हो?
    (0)(1)
    Reply
    1. B
      bitterhoney
      Nov 3, 2016 at 4:28 am
      भाजपा सरकार देश में केवल गाँधी जी के हत्यारे की जयंती धूम धाम से मनाना चाहती है. अन्य सारे योद्धा देशद्रोही घोषित किये जाएंगे.
      (3)(1)
      Reply
      1. Devisahai Meena
        Nov 3, 2016 at 7:17 am
        In such a way Rani laxmibai of Jhansi , Rana Pratap of Mewad , fought only for their own existence ? RSS going against national spirit , this way .
        (0)(0)
        Reply
        1. A
          Avinash
          Nov 3, 2016 at 2:52 pm
          बात तो ी है...बाबु कुंवर सिंह, झांसी रानी, प्रताप जी...सबने कूद के लिए लड़ा...देश का तो कांसेप्ट अंग्रेजों ने लाया था.
          (1)(0)
          Reply
          1. A
            atul
            Nov 3, 2016 at 12:01 pm
            टीपू एक कटर मुस्लिम था. Usne हिन्दू logo ko mara tha. अगर किसी को उसकी जयंती माननी है to वह खुद मुस्लिम बन जाये और जयंती मनाये.
            (1)(0)
            Reply
          2. S
            shivshankar
            Nov 3, 2016 at 12:23 pm
            आप को कैसे गलत फहमी हो गई की आप हिन्दू हैं किसी से भी नफरत आने वाला कभी हिन्दू हो ही नहीं सकता अपना DNA.चेक करवाइये हिन्दू कभी आरएसएस की शाखा मैं नहीं जाते
            (2)(1)
            Reply