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कर्नाटक: विधायिका पैनल की कंपनियों का सलाह- महिलाओं को ना दी जाए नाइट शिफ्ट

समिति का कहना है कि महिलाओं को सुबह या दोपहर की शिफ्ट दी जानी चाहिए
इस प्रस्ताव का महिला कर्मचारियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने विरोध किया

कर्नाटक में विधायकों की एक समीति ने प्रस्ताव जारी किया है कि महिलाओं को नाइट शिफ्ट पर ना बुलाया जाए और कंपनियों को सलाह दी गई है कि जितना हो सके महिलाओं को नाइट शिफ्ट से दूर ही रखा जाए। इस प्रस्ताव का महिला कर्मचारियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने विरोध किया। उनका कहना है कि यह प्रस्ताव राज्य को पीछे ले जाने वाला है और अगर इसे माल लिया जाएगा तो कार्यस्थल पर महिलाओं की जगह कम होती चली जाएगी। आलोचकों ने यह भी कहा कि 26 हफ्तों की मातृत्व छुट्टी देने का नियम भी कामकाजी महिलाओं को हतोस्ताहित करने वाला है।

विधानसभा में अपनी 32 रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए सोमवार को विधायिका की ओर से निर्मित महिला और बाल कल्याण समिति ने कहा कि वो IT और BT कंपनियों में महिला के रात की शिफ्ट में काम करने की पक्षधर नहीं है। समिति का कहना है कि महिलाओं को सुबह या दोपहर की शिफ्ट दी जानी चाहिए।

विधायिका पैनल ने चेयरमैन एनए हैरिस ने दावा किया कि महिलाओं के पास और भी कई काम होते हैं जैसे घर और बच्चों की देखभाल। अंग्रेजी न्यूज चैनल एनडीटीवी के मुताबिक, “एक महिला के पास हर किसी से ज्यादा सामाजिक जिम्मेदारियां होती हैं। वह अगली पीढ़ी को तैयार करती हैं और उनपर मातृक जिम्मेदारी भी होती है। अगर एक महिला रात को काम करती है तो यह मां के रूप में बच्चे की अनदेखी होगी और बच्चे की सही देखभाल नहीं हो सकेगी। ”

हैरिस ने आगे कहा कि एक पति अपनी पत्नी की सहायता तो कर सकता है लेकिन वह उसकी जगह मां नहीं बन सकता। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ बोलना आसान होता है लेकिन हमें यह समझना होगा कि परिवार के हर सदस्य से ज्यादा महिला पर सामाजिक जिम्मेदारी से होती है। कमेटी ने यह भी कहा कि नाइट शिफ्ट में महिलाओं की सुरक्षा भी एक चिंता का विषय है। चेयरमैन ने कहा कि पुरुष होने के नाते महिलाओं की सुरक्षा हमारी ज्यादा जिम्मेदारी है। यह कोई नई-सोच या पुरानी-सोच का मुद्दा नहीं है।

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