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मछली-चिकन खाकर मंदिर में जाने पर घिरे सीएम ने बीजेपी पर साधा निशाना

मुख्‍यमंत्री दक्षिणी कन्‍नड़ जिले के धर्मस्‍थल कस्‍बे में मंदिर जाने से पहले मांसाहारी भोजन करके गए थे, ऐसी रिपोर्ट छपी थी।

कर्नाटक के सीएम सिद्दारमैया। (FIle Photo)

कर्नाटक के मुख्‍यमंत्री सिद्धारमैया के मंदिर जाने से पहले मछली व चिकन खाने की बात पर विवाद हो गया है। सोमवार (23 अक्‍टूबर) को सिद्धारमैया ने इसपर हायतौबा मचाने के लिए विपक्षी भारतीय जनता पार्टी को जिम्‍मेदार ठहराया। उन्‍होंने ट्वीट कर कहा, ‘सरकार चलाने में नाकाम रही भाजपा अब इस बात पर परेशान है कि मंदिर जाने से पहले मैं क्‍या खाता हूं।” मुख्‍यमंत्री दक्षिणी कन्‍नड़ जिले के धर्मस्‍थल कस्‍बे में मंदिर जाने से पहले मांसाहारी भोजन करके गए थे, ऐसी रिपोर्ट द टाइम्‍स ऑफ इंडिया में छपी थी। जिसके बाद भाजपा ने सीएम को निशाने पर ले लिया। वहीं स्‍क्रॉल ने पुत्‍तुर कस्‍बे के पुजारी कृष्‍णा भट के हवाले से रिपोर्ट किया है, ”(शास्‍त्रों में) ऐसी किसी पाबंदी का उल्‍लेख नहीं है जो मांसाहार करने वालों को देवता के दर्शन से रोके।” हालांकि उन्‍होंने कहा कि मंदिर में कुछ सेवाओं के लिए श्रद्धालुओं को हिन्‍दू शास्‍त्रों के नियमों का पालन करना होता है। भट के मुताबिक, ”अश्‍लेष बलि देने वाले श्रद्धालु को उसके पहले दो दिन पूरी तरह शाकाहार पर जीना होता है।”

श्री क्षेत्र धर्मस्‍थल मंदिर के संचालक डी वीरेंद्र हेगड़े के निजी सहायक वीरू शेट्टी ने स्‍क्रॉल से कहा, ‘पूजा श्रद्धालु और भगवान के बीच का निजी मामला है। हम यह नहीं जांचते कि कोई मंदिर में प्रार्थना के लिए क्‍या खाकर आया है।”

रविवार को सिद्धारमैया ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर जुबानी प्रहार करते हुए कहा था कि ‘केंद्र राज्यों को जो देता है, वह उनका अधिकार है, दान नहीं।’ सीएम ने मोदी के उस कथन के जवाब में यह टिप्पणी की थी, जिसमें उन्होंने कहा था कि विकास का विरोध करने वाले राज्यों को केंद्र से समर्थन नहीं मिलेगा। रविवार को गुजरात में की गई मोदी की टिप्पणियों के जवाब में ट्वीट करते हुए सीएम ने कहा, “यह संविधान की समझ की कमी दर्शाता है। केंद्र राज्यों को जो देता है, वह दान नहीं है। वह हमारा अधिकार है।”

मोदी ने रविवार को वडोदरा ने कहा था, “हमारी प्राथमिकता विकास है। हम विकास का विरोध करने वालों (राज्य सरकारों) को एक कौड़ी नहीं देंगे।” मोदी ने यह भी कहा था कि गुजरात में तभी विकास हुआ, जब केंद्र की सरकार ने राज्य के हितों पर ध्यान दिया।

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