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गौरी लंकेश हत्याकांड: राज्य सरकार कह रही कि हो चुकी है हमलावरों की पहचान, हाथ लगे सबूत

मंत्री ने ज्यादा जानकारी देने से यह कहते हुए मना कर दिया कि इससे मामला खतरे में पड़ सकता है।
पत्रकार गौरी लंकेश की अज्ञात हमलावरों ने गोली मारकर हत्या कर दी। (तस्वीर- फेसबुक)

पत्रकार गौरी लंकेश के हत्यारों की पहचान हो चुकी है। कर्नाटक सरकार ने कहा कि उनके अपराध को साबित करने के लिए अभी सबूत इकट्ठा किए जा रहे हैं। एनडीटीवी के मुताबिक कर्नाटक के होम मिनिस्टर रामलिंगा रेड्डी ने कहा कि हम जानते हैं कि वह कौन लोग हैं, वहीं ज्यादा जानकारी देने से मंत्री ने यह कहते हुए मना कर दिया कि इससे मामला खतरे में पड़ सकता है। 55 साल की पत्रकार गौरी लंकेश की 5 सितंबर को बेंगलुरू में उनके ही घर में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। गौरी लंकेश के सीने में गोली मारने वाले ने हेलमेट पहन रखा था। वह गोली चलाते हुए सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गया था। मामले की जांच कर रही स्पेशल इनवेस्टिगेटिंग टीम ने होम मिनिस्टर के दावे की न तो पुष्टि की है और न ही इससे इनकार किया है। उन्होंने लंकेश के अंतिम संस्कार के दिन कहा था कि हत्यारों को जल्द ही पकड़ा जाएगा। गौरी लंकेश की हत्या से जुड़ा सुराग देने पर 10 लाख रुपये का इनाम भी घोषित किया गया था।

कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार है। गौरी लंकेश के केस में कोई प्रॉग्रेस नहीं होने पर आलोचना भी हो रही है। विभिन्न सरकारी अधिकारियों का कहना है कि उनकी हत्या के तार तर्कशास्त्री एमएम कलबर्गी हत्याकांड से भी जुड़े हो सकते हैं। कलबर्गी को 2015 में राज्य के धारवाड़ क्षेत्र में उनके घर में गोली मार दी गई थी।

इस हत्या में भी संदिग्धों की पहचान नहीं हो पाई है। लंकेश की हत्या की जांच करने वालों से जुडे़ सूत्रों के मुताबिक कलबर्गी की हत्या में इस्तेमाल की जाने वाली गोलियों की पहचान के लिए उन्हें संभवत: स्कॉटलैंड यार्ड भेजा था, यह जानने के लिए कि यह कहां बनी हैं, लेकिन वह अभी तक वापस ही नहीं आई हैं।

कन्नड़ की साप्ताहिक पत्रिका की संपादक गौरी लंकेश की 5 सितंबर को उनके घर के बाहर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। लंकेश नक्सलियों के अधिकारों के लिए लिखती थीं। बीजेपी ने इस मामले में सीबीआई जांच की मांग की है। बीजेपी का कहना है कि कर्नाटक की राज्य सरकार इस मामले की उचित जांच नहीं करवा पाएगी।

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