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थिएटर आर्टिस्ट ने संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार लेने से किया इनकार, मॉब लिंचिंग और धर्म के नाम पर हिंसा का विरोध

घुनंदना ने कहा, ‘‘मेरी अंतरात्मा, मेरे अंतर्यामी मुझे अनुमति नहीं देते हैं।’’ उन्होंने पुरस्कार लेने से इनकार करने के लिए माफी मांगते हुए कहा कि एक कवि और नाटक लेखक होने के नाते वह पुरस्कार स्वीकार नहीं कर सकते हैं, क्योंकि देश में अच्छे लोगों के साथ देश के नाम पर अन्याय हो रहा है।

Author बेंगलुरु | July 19, 2019 9:00 AM
प्रतीकात्मक फोटो (फोटो सोर्स: इंडियन एक्सप्रेस)

कर्नाटक के मशहूर थिएटर आर्टिस्ट एस रघुनंदना ने गुरुवार (18 जुलाई) को संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार स्वीकार करने से इनकार कर दिया। उन्होंने यह पुरस्कार मॉब लिंचिंग यानी ‘पीट-पीटकर लोगों की हत्या और भगवान व धर्म के नाम पर होने वाली ‘हिंसक’ घटनाओं के विरोध में और सामाजिक कार्यकर्ताओं की आवाज दबाने के प्रयास के खिलाफ अस्वीकार किया है। रघुनंदना ने कहा कि जब ईमानदार लोगों के खिलाफ ‘अन्याय’ किया जा रहा है तो वह ऐसे में पुरस्कार स्वीकार नहीं कर सकते हैं।

देश में अच्छे लोगों के साथ हो रहा अन्याय: पुरस्कार की घोषणा होने के दो दिन बाद रघुनंदना ने कहा, ‘‘मेरी अंतरात्मा, मेरे अंतर्यामी मुझे अनुमति नहीं देते हैं।’’ उन्होंने पुरस्कार लेने से इनकार करने के लिए माफी मांगते हुए कहा कि एक कवि और नाटक लेखक होने के नाते वह पुरस्कार स्वीकार नहीं कर सकते हैं, क्योंकि देश में अच्छे लोगों के साथ देश के नाम पर अन्याय हो रहा है। हालांकि, उन्होंने इस पुरस्कार के लिए धन्यवाद भी दिया। उन्होंने कहा कि संगीत नाटक अकादमी एक स्वायत्त संस्था है और रहेगी। यह पूरी तरह से लंबे समय से स्वायत्तता के अपने सिद्धांतों को बचाये हुए है।

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भगवान-धर्म के नाम पर मारे जा रहे लोग: कलाकार ने कहा, ‘‘आजकल भगवान और धर्म के नाम पर पीट-पीटकर लोगों की हत्या की जा रही है और हिंसा हो रही है। यहां तक कि कौन क्या खाता है, इसको लेकर भी ऐसा हो रहा है। सत्ता प्रत्यक्ष या परोक्ष तौर पर हत्या और हिंसा के लिए जिम्मेदार है।’’

वसुधैव कुटुम्बकम को तोड़ा-मरोड़ा जा रहा: रघुनंदना ने ऐसी व्यवस्था बनाए जाने के प्रयास पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा, ‘‘उच्च शिक्षा से लेकर स्कूल और कॉलेजों में हर जगह विद्यार्थियों को घृणा और अतार्किकता का पाठ पढ़ाया जा रहा है। भारतीय होने और वसुधैव कुटुम्बकम की पूरी भावना को ही तोड़ा-मरोड़ा जा रहा है और उसे समाप्त किया जा रहा है। मेरे जैसे करोड़ों लोग इस पर दुखी ही हो सकते हैं।’’

गरीब व शक्तिहीन लोगों को कराया जा रहा चुप: रघुनंदना ने आरोप लगाया कि सामाजिक कार्यकर्ताओं और विवेकशील बुद्धिजीवी लोगों की आवाज को दबाकर देश के शासकों ने गरीब और शक्तिहीन लोगों को चुप कराने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि यह स्थिति हमेशा से रही है। चाहे किसी भी पार्टी की सरकार हो या कोई भी सत्ता में हो।

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बुद्धिजीवी ही असली देशभक्त: कलाकार ने इन बुद्धिजीवियों को असली देशभक्त बताते हुए कहा कि यही वे लोग हैं जो मूल्यों की रक्षा के लिए सही रास्ते पर चल रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘‘यह विरोध नहीं है, यह निराशा से आया है और पुरस्कार स्वीकार नहीं करने की लाचारी से। मैं अकादमी का सम्मान करता हूं और उन सभी का, जिन्होंने अभी और पहले पुरस्कार स्वीकार किया है। अकादमी के सदस्यों का शुक्रिया अदा करता हूं और उनसे माफी मांगता हूं।’’

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