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कर्नाटक सेक्स स्कैंडल: BJP विधायक के खिलाफ पुलिस शिकायत वापस लेंगे एक्टिविस्ट दिनेश, बताई वजह

कार्यकर्ता के वकील ने कहा कि कुछ तकनीकी समस्याएं हैं, जिस कारण यह निर्णय किया गया।

Author नई दिल्ली | Updated: March 7, 2021 10:03 PM
Ramesh Jarkiholi, Ramesh Jarkiholi resignation, Ramesh Jarkiholi resigns, Ramesh Jarkiholi sexual harrasment, Ramesh Jarkiholi resignationकर्नाटक में भाजपा नेता रमेश जारकीहोली (Twitter: @RameshJarkiholi)

कर्नाटक में कथित तौर पर ‘सेक्स के बदले नौकरी’ कांड में रविवार को नया मोड़ आ गया, जब सामाजिक कार्यकर्ता दिनेश कल्लाहल्ली ने कहा कि वह भाजपा विधायक रमेश जारकिहोली के खिलाफ पुलिस शिकायत को वापस ले लेंगे, जिस कारण विधायक को इस्तीफा देना पड़ा था। दिनेश कल्लाहल्ली ने कहा कि वह शिकायत वापस लेंगे, क्योंकि वह जद (एस) के नेता एच. डी. कुमारस्वामी द्वारा लगाए गए पांच करोड़ रुपए के सौदे के आरोपों से दुखी हैं।

बहरहाल कार्यकर्ता के वकील ने कहा कि कुछ तकनीकी समस्याएं हैं, जिस कारण यह निर्णय किया गया। इस बीच, रमेश जारकिहोली के भाई बालचंद्र जारकिहोली ने आरोप लगाया कि राज्य में बड़ा षड्यंत्र हुआ, जिसमें चार टीम जारकिहोली को ‘बदनाम’ करने और पांच राज्यों में विधानसभा चुनावों से पहले भाजपा को निशाना बनाने में लगी हुई है। मामले में सीबीआई जांच की मांग करते हुए उन्होंने संवाददाताओं से कहा कि उनके भाई और एक महिला के कथित वीडियो से ‘‘छेड़छाड़’’ की गई है।

कार्यकर्ता ने जारकिहोली पर आरोप लगाया था कि उन्होंने महिला को कर्नाटक विद्युत वितरण निगम लिमिटेड में नौकरी देने के बहाने उसका यौन उत्पीड़न किया। संवाददाताओं से बात करते हुए कल्लाहल्ली ने कहा, ‘‘कुमारस्वामी के आरोपों से मैं काफी व्यथित हूं कि मैंने पांच करोड़ रुपए का सौदा किया। इसलिए मैंने शिकायत वापस लेने का फैसला किया है।’’

मालूम हो कि कर्नाटक के छह मंत्रियों ने बेंगलुरु के एक अदालत का रूख कर मीडिया संगठनों को उनके खिलाफ कोई भी ‘‘अपमानजनक या अनधिकृत सामग्री’’ प्रकाशित या प्रसारित करने से रोकने का अनुरोध किया है। मुख्यमंत्री बी एस येदियुरप्पा के नेतृत्व वाली सरकार के जिन छह मंत्रियों ने शुक्रवार को अदालत का रुख किया उनमें राज्य के श्रम मंत्री शिवराम हेबर, कृषि मंत्री बी सी पाटिल, सहकारिता मंत्री एस टी सोमशेखर और परिवार कल्याण एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री के सुधाकर शामिल हैं।

दो अन्य मंत्रियों में युवा सशक्तिकरण एवं खेल मंत्री के सी नारायण गौड़ा और शहरी विकास मंत्री भयारथी बासवराज शामिल हैं। मंत्रियों की संयुक्त याचिका पर सुनवाई करते हुए अतिरिक्त नगर सिविल सत्र न्यायाधीश ने अपना आदेश सुरक्षित रख लिया। मामले में शनिवार को फैसला सुनाए जाने की संभावना है। ये छह मंत्री उन 17 विधायकों में शामिल थे, जिन्होंने कांग्रेस-जद (एस) गठबंधन के नेतृत्व वाली सरकार के खिलाफ बगावत की थी, जिससे जुलाई 2019 में सरकार गिर गई थी और भाजपा के सत्ता में आने का रास्ता खुला था।

अपनी संबंधित पार्टियों से अयोग्य घोषित किए जाने के बाद ये विधायक भाजपा में शामिल हो गए और दिसंबर 2019 में भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ा और चुनाव जीतने के बाद मंत्री बने। रमेश जरकिहोली ने हाल ही में अपने खिलाफ आपत्तिजनक सीडी बरामद होने और यौन उत्पीड़न के आरोपों के बीच इस्तीफा दे दिया था । जरकिहोली उन 16 बागी विधायकों के साथ भाजपा में शामिल हुए थे ओर मंत्री बने थे।

मंत्रियों के इस कदम की पुष्टि करते हुए परिवार कल्याण एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री के सुधाकर ने ट्वीट कर कहा कि कुछ ‘‘ईमानदार’’ मंत्रियों की छवि खराब करने, उनका अपमान करने के इरादे से राजनीतिक साजिश की आशंका के बीच मंत्रियों ने अदालत का रुख किया है।

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