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कर्नाटकः IISc की ऐरोस्पेस लैबोरेट्री में धमाका, 1 वैज्ञानिक की मौत; 3 जख्मी

घायलों को आनन-फानन में पास के अस्पताल ले जाया गया। अभी तक मृतकों व घायलों की पहचान नहीं की जा सकी है।

लैब में यह हादसा दोपहर तीन बजे के आसपास हुआ, जिसमें 30 वर्षीय शोधकर्ता की जान चली गई। (फाइल फोटोः www.iisc.ac.in)

कर्नाटक के बेंगलुरू स्थित भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc) की ऐरोस्पेस लैबोरेट्री में बुधवार (पांच दिसंबर) को कथित तौर पर हाईड्रोजन सिलेंडर फट गया। सदाशिवनगर पुलिस के हवाले से न्यूज एजेंसी एएनआई ने बताया कि हादसे में एक वैज्ञानिक की मौत हो गई, जबकि वहां मौजूद तीन वैज्ञानिक गंभीर रूप से जख्मी हुए। आनन-फानन में उन्हें पास के अस्पताल ले जाया गया।

यह घटना दोपहर ढाई से तीन बजे के आसपास की है, जिसमें 30 वर्षीय रिसर्चर मनोज कुमार की जान चली गई। संस्थान के अधिकारियों के हवाले से मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया कि दो बजकर 20 मिनट पर ऐरोस्पेस विभाग की हायरसॉनिक एंड शॉकवेव वाली लैब में सिलेंडर फट गया था। हादसे के दौरान वहां आग लग गई थी और बुरी तरह धुआं फैल गया था।

धमाका इतना जोरदार था कि कुमार उसी दौरान दीवार से जा लड़े थे और मौके पर ही उनकी मौत हो गई। वहीं, अतुल्य, कार्तिक और नरेश कुमार को गंभीर चोटें आई, जिसके बाद उन्हें फौरन रमैया अस्पताल ले जाया गया। खबर लिखे जाने तक वे तीनों आईसीयू में भर्ती थे। घटनास्थल का जायजा लेने के बाद संस्थान के अधिकारियों ने कहा कि वे स्पष्ट नहीं हैं कि यह हादसा कैसे हुआ। शिकायत के आधार पर पुलिस मामले की तफ्तीश कर रही है।

हालांकि, अभी तक सदाशिवनगर पुलिस थाने ने इस मामले में एफआईआर दर्ज नहीं की है। पुलिस अधिकारी यह पता लगाने में जुटे हैं कि क्या यह वाकई में हादसा था? कहा जा रहा है कि संस्थान के ऐरोस्पेस इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर के.पी.जे रेड्डी और जी.जगदीश के निर्देशन में यह स्टार्ट-अप प्रॉजेक्ट चल रहा था। दोनों प्रफेसर शॉकवेव टेक्नॉलजी में विशेषज्ञता रखते हैं।

इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ साइंस विज्ञान, इंजीनियरिंग, डिजाइन और प्रबंधन सरीखे क्षेत्रों में शोध और उच्च शिक्षा कराने के लिए देश में जाना जाता है। बेंगलुरू के उत्तरी हिस्से में इसका कैंपस है, जो कि शहर के रेलवे स्टेशन से महज चार किमी दूर है।

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