कर्नाटक विधानसभा ने पास किया नया स्लॉटर कानून, ओवैसी बोले- इससे गरीबी, भुखमरी और बेरोजगारी बढ़ेगी

AIMIM चीफ ओवैसी ने कर्नाटक के नए स्लॉटर कानून के विरोध में बोलते हुए कहा है कि मवेशी वध कानून की वजह से राज्य में बेरोजगारी बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि गरीब लोगों से सेहतमंद और सस्ता खाना छीना गया है।

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कर्नाटक में एक रैली को संबोधित करते असदुद्दीन ओवैसी (फोटो-एक्प्रेस आर्काइव)

कर्नाटक में नए स्लॉटर कानून के पास होने के बाद से विपक्ष इस कानून का विरोध कर रहा है। कांग्रेस के बाद अब ओवैसी की पार्टी भी इस कानून के विरोध में उतर आई है।

ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) ने सिलसिलेवार तरीके से ट्वीट कर इस कानून के खिलाफ विरोध जताया है। एआईएमआईएम ने ट्वीट कर कहा- ” कर्नाटक के मवेशी वध कानून की वजह से गरीबों के पेट से सेहतमंद और सस्ता खाना छीना गया है। और तो और कानून ने लाखों लोगों को बेरोजगार कर दिया।

एक अन्य ट्वीट में ओवैसी का वीडियो शेयर कर कहा गया है कि जानवर, चमड़ी और गोश्त का करोबार करने वालों को परेशानी का सामना करना पड़ा रहा है। विपक्षी पार्टियां इस बिल को कर्नाटक की विधानसभा में रोकने में नाकाम रही है।

कर्नाटक के इस नए कानून में गाय की तस्करी और गो हत्या में शामिल होने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के प्रावधान है। कानून से संबंधित बिल पिछले साल दिसंबर में कर्नाटक विधानसभा में पारित हुआ था। इस दौरान कांग्रेस ने इसका जमकर विरोध किया था। बिल पास होने के दौरान कांग्रेस के विधायक सदन से बाहर चले गए थे। ‘कर्नाटक मवेशी वध रोकथाम और संरक्षण विधेयक-2020’ के तहत राज्य में गो हत्या अब कानून जुर्म है। इस कानून के तहत 13 साल से कम उम्र के भैंसों को मारा जाना भी अपराध की श्रेणी में आता है।

कानून के अनुसार मवेशियों की हत्या में शामिल होने पर कम से कम तीन साल की जेल का प्रावधान है। इसके अलावा 10 हजार से लेकर 50 हजार तक के जुर्माने का प्रावधान है। इस कानून के तहत स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने का भी प्रावधान है।

जब यह बिल विधानसभा में पारित हो रहा था तब, कांग्रेस नेता सिद्धरमैया के नेतृत्व में विपक्ष के विधायक विधानसभा अध्यक्ष की कुर्सी तक पहुंच गए थे। विपक्षी पार्टियां कांग्रेस और जेडीएस के सदस्यों ने जमकर नारेबाजी की थी। सिद्धरमैया ने बीजेपी सरकार पर आरोप लगाया था कि बगैर कार्य मंत्रणा समिति की बैठक में चर्चा किए इस बिल को विधानसभा में पेश किया गया है।

बता दें कि साल 2010 में बीएस येदियुरप्पा के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार ने पशु वध की रोकथाम और मवेशी संरक्षण विधेयक पारित कर दिया था। हालांकि सत्ता में कांग्रेस के आने और सिद्धारमैया के सीएम बनने के बाद कांग्रेस सरकार ने इस बिल को वापस ले लिया था।

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