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कोरोना का कहर- 12 घंटे, 40 Km भटकता रहा, किसी अस्पताल ने न दिया इलाज, एंबुलेंस में ही मौत

बताया जाता है कि सभी छह अस्पतालों ने संतोष और हमीद को यह कहते हुए लौटा दिया कि उनके पास ऑक्सीजन की कमी है, जबकि बेड नहीं है।

Coronavirus, Ambulance, National Newsकर्नाटक के बेंगलुरू में सुम्मनहल्ली श्मशान के बाहर लगी एंबुलेंस की कतार। (फोटोः पीटीआई)

कर्नाटक के बेंगलुरू में गुरुवार को कोरोना वायरस से संक्रमित 41 साल के शख्स की एंबुलेंस में ही जान चली गई। पीड़ित को इससे पहले शहर के छह अस्पतालों में ले जाया गया था। वह इस दौरान ऑक्सीजन और अस्पताल में बेड के लिए 12 घंटे तक 40 किलोमीटर तक भटकता रहा, पर इसे किसी भी अस्पताल में इलाज न मिल सका।

अंग्रेजी अखबार ‘टीओआई’ के मुताबिक, संतोष को बुधवार रात 10 बजे के आसपास सांस लेने में तकलीफ होने लगी थी। संतोष के परिवार के साथ इस दौरान रहे हमीद नाम के वॉलंटियर ने अखबार को बताया- संतोष में किसी प्रकार के और लक्षण नहीं थे। न तो उसे बुखार था और न ही कफ। दरअसल, 12वीं कक्षा में पढ़ने वाले हमीद को एक वॉट्सऐप ग्रुप पर संतोष की बिगड़ती तबीयत के बारे में जानकारी मिली थी, जिसके बाद वह आनन-फानन में उसकी मदद के लिए गया था।

बकौल हमीद, “संतोष का ऑक्सीजन स्तर 84 फीसदी पर आ गया था। मैं इसके बाद 108 और 1912 पर कॉल्स करने लगा। कुछ कॉल्स में से एक का जवाब दिया गया, जिसमें हमें एक अस्पताल से जोड़ा गया। हमें 108 पर कॉल करने के बाद एंबुलेंस मिली और एक बीबीएमपी अधिकारी। हालांकि, एंबुलेंस के लिए भी हमें 45 मिनट तक का इंतजार करना पड़ा था।”

बताया जाता है कि सभी छह अस्पतालों ने संतोष और हमीद को यह कहते हुए लौटा दिया कि उनके पास ऑक्सीजन की कमी है, जबकि बेड नहीं है। जब भी अस्पताल मना करता, तो हमीद 108 नंबर पर कॉल करता। हमीद के मुताबिक, “एक पल ऐसा आया, जब दूसरी तरफ से जवाब देने वाला शख्स मुझ पर चिल्लाने लगा और कहा कि मैं अपने काम से काम रखूं, क्योंकि मुझे कोरोना नहीं है।” फिर अस्पताल पहुंचने पर परिजन ने संतोष को बाहर निकाला और दूसरी एंबुलेंस का इंतजार करने लगे। ऐसा करते करते बेड की तलाश में हम 40 किमी तक भटकते रहे।

गुरुवार सुबह उत्तरी बेंगलुरू में एक अस्पताल के सामने 10 बजकर 15 मिनट पर संतोष की एंबुलेंस में ही मौत हो गई और उस दौरान उसका ऑक्सीजन लेवल गिरकर 34 फीसदी पर आ गया था। संतोष, यूपी के गोरखपुर से 20 साल पहले वहां आया था। वह पेंटिंग कॉन्ट्रैक्टर था और उसके परिवार में पत्नी और दो बच्चे (एक 10वीं में और दूसरा ग्रैजुएशन में) हैं। हमीद ने आगे बताया, हमने उसके शव को हब्बल श्मशान भेज दिया। उसकी पत्नी तीन से चार दफा बेहोश हुई थी, जिस नजारे को मैं कभी भुला नहीं पाऊंगा। यह दर्द बेहद झकझोर देने वाला है।

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