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Karnataka Hijab Row: कॉलेज में हिजाब पहनने को लेकर अड़ी मुस्लिम छात्राएं, प्रिंसिपल ने 24 लड़कियों को कर दिया सस्पेंड

सीडीसी ने साफ तौर पर कहा है कि क्लास और कॉलेज परिसर में हिजाब की इजाजत नहीं होगी। अगर छात्राएं फिर भी नियमों का उल्लंघन करती हैं, तो हमारे पास सख्त कार्रवाई करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है।

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कर्नाटक हिजाब विवाद (Express photo by Jithendra M)।

कर्नाटक के उप्पिनंगडी में गवर्नमेंट फर्स्ट ग्रेड कॉलेज ने सोमवार (6 जून, 2022) को कक्षाओं में हिजाब पहनने के बाद 24 छात्राओं को शनिवार तक के लिए निलंबित कर दिया। सूत्रों ने कहा कि अधिकारियों ने कॉलेज की ड्रेस कोड का पालन करने का आदेश जारी किया, लेकिन लड़कियों ने हिजाब पहनने पर जोर दिया।

कॉलेज डेवलपमेंट कमेटी (सीडीसी) ने कहा कि लड़कियों को गलियारे और कक्षाओं में हिजाब पहनने की अनुमति नहीं है। कॉलेज के एक अधिकारी ने कहा, “कल सीडीसी और हाई कोर्ट के आदेश के बावजूद छात्राओं ने ड्रेस कोड के नियमों का कई बार उल्लंघन कर कॉलेज में काफी दिक्कतें पैदा कीं। शिक्षकों को उन्हें समझाने की कोशिश की, लेकिन वो समझने और सुनने के लिए तैयार नहीं थीं।

इसके बाद कॉलेज के प्रिंसिपल ने सभी शिक्षकों से परामर्श किया और लड़कियों को चार दिनों तक कक्षाओं से दूर रखने का फैसला किया। सीडीसी ने साफ तौर पर कहा है कि क्लास और कॉरिडोर में हिजाब की इजाजत नहीं होगी। अगर लड़कियां फिर भी नियमों का उल्लंघन करती हैं, तो हमारे पास सख्त कार्रवाई करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है।

अधिकारी ने कहा, ‘हमने कई बार अभिभावकों को संस्थान में बुलाया और उन्हें यूनिफॉर्म से जुड़े नियमों के बारे में बताया। हालांकि सीडीसी के फैसले से माता-पिता को कोई दिक्कत नहीं हुई, लेकिन बच्चे हिजाब पहनने पर तुले हुए हैं. ड्रेस कोड का पालन करने की आवश्यकता के बारे में छात्रों को समझाने की कोशिश से शिक्षक थक गए हैं। ‘

पिछले हफ्ते इसी कॉलेज, जो मैंगलोर यूनिवर्सिटी से मान्यता प्राप्त है, ने छह लड़कियों को हिजाब पहनने के आरोप में दो दिन के लिए सस्पेंड कर दिया। लड़कों के एक समूह ने हिजाब पर प्रतिबंध लगाने की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन करने के बाद यह फैसला लिया। लड़कियों के एक वर्ग ने भी हिजाब समर्थक विरोध प्रदर्शन किया।

कॉलेज द्वारा जारी किए गए प्रॉस्पेक्टस के अनुसार, लड़कियों को पहले ड्रेस और शॉल को हेडस्कार्फ़ के रूप में पहनने की अनुमति थी। हालांकि, लड़कों के एक समूह के विरोध और 15 मार्च के कर्नाटक उच्च न्यायालय के आदेश के बाद, कॉलेज ने नियमों को कड़ा करने और परिसर में ड्रेस कोड का पालन अनिवार्य करने का फैसला किया।

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