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BJP का दामन थामेंगे पूर्व राष्ट्रपति सर्वपल्ली राधाकृष्णन के पौत्र, पिछले साल कहा था इन पार्टियों में कभी नहीं होंगे शामिल

भारत के पूर्व राष्ट्रपति राधाकृष्णन के पौत्र सुब्रह्मण्य शर्मा आज (26जनवरी) को बीजेपी में शामिल होंगे। शर्मा इसके पहले विधानसभा चुनाव लड़ चुके है हालांकि उन्हें जीत नहीं मिली थी।

पूर्व राष्ट्रपति सर्वपल्ली राधाकृष्णन फोटो सोर्स- जनसत्ता

भारत के पूर्व राष्ट्रपति राधाकृष्णन के पौत्र सुब्रह्मण्य शर्मा आज (26जनवरी) को बीजेपी में शामिल होंगे। बता दें कि पार्टी ने एक विज्ञप्ति जारी कर जानकारी दी कि सुब्रह्मण्य गणतंत्र दिवस समारोह के बाद पार्टी मुख्यालय में प्रदेश बीजेपी के प्रमुख बीएस येदियुरप्पा की मौजूदगी में पार्टी में शामिल होंगे। सुब्रह्मण्य शर्मा इसके पहले विधानसभा चुनाव लड़ चुके है हालांकि उन्हें जीत नहीं मिली थी। गौरतलब है कि बीते साल शर्मा ने दावा किया था कि उनका बीजेपी, कांग्रेस और जनता दल-सेक्युलर (जेडी-एस) में से किसी एक भी दल में शामिल होने का कोई इरादा नहीं हैं।

दरअसल, पूर्व राष्ट्रपति के पौत्र सुब्रह्मण्य शर्मा काफी दिनों से राजनीति में सक्रिय थे। इस बीच शर्मा ने कर्नाटक में 2018 के विधानसभा चुनावों में भी शिरकत की थी। उन्होंने मल्लेश्वरम निर्वाचन क्षेत्र से ऑल इंडिया महिला एम्पावरमेंट पार्टी के उम्मीदवार के तौर पर विधानसभा चुनाव लड़ा था। लेकिन इस चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। सुब्रह्मण्य शर्मा ने अखिल भारतीय महिला सशक्तिकरण पार्टी का प्रतिनिधित्व किया था। फ़िलहाल अब वो बीजेपी में शामिल हो रहें हैं। बता दें कि एनडीटीवी के मुताबिक बीते साल सुब्रह्मण्य शर्मा ने दावा किया था कि उनका बीजेपी, कांग्रेस और जनता दल-सेक्युलर (जेडी-एस) में से किसी एक भी दल में शामिल होने का कोई इरादा नहीं हैं। उन्होंने आरोप लगाया था कि इन पार्टियों ने राजनीतिक स्वार्थ के चलते कभी जनता के मुद्दों को लेकर काम नहीं किया है।

बता दें कि सुब्रमण्यम शर्मा करीब एक दशक पहले (2006 में) चेन्नई से बेंगलुरु शिफ्ट हो गए थे। उनके परिवार के स्वामित्व वाला सुदीक्ष ग्रुप विविध व्यवसायों में शामिल हैं। जो फार्मेसी, फिल्में और डेयरी फार्मिंग के कारोबार में भी हैं।

बता दें कि भारत रत्न से सम्मानित डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जन्म दक्षिण भारत के तिरुत्तनि स्थान में हुआ था, जो चेन्नई से 64 किमी उत्तर-पूर्व में स्थित है। गौरतलब है कि राजनीति में आने से पहले राधाकृष्णन ने अपने जीवन के 40 साल अध्यापन कार्य में बिताए थे। इसलिए उन्होंने शिक्षकों को सम्मान देने के लिए अपने जन्मदिन को ‘शिक्षक दिवस’ के रूप में मनाने की बात कही थी। उनके जन्मदिवस 5 सितम्बर को शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है।

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