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भयंकर बारिश से मुश्किल में फंसी पत्नी ने दिव्यांग पति संग यूं गुजारे 72 घंटे, कभी टूटे घर की छत तो फिर पेड़ की डाली बना सहारा

पिछले हफ्ते उत्तर-पूर्वी कर्नाटक में भयंकर बारिश से हालात बेहद खराब हो गए थे। जब एनडीआरएफ की एक टीम जैसे-तैसे बेल्लारी नाला तक पहुंची तो रत्नाबाई गिवेड़ी (35) और उसके पति कडप्पा बीजी (38) की खुशी का ठिकाना नहीं था।

Author बेलगाम | Published on: August 16, 2019 9:17 AM
भयंकर बारिश से मुश्किल में फंसी पत्नी ने दिव्यांग पति संग यूं गुजारे 72 घंटे फोटो सोर्स- जॉनसन टी ए

मध्य प्रदेश-छत्तीसगढ़ से लेकर केरल-कर्नाटक तक जबर्दस्त बारिश के चलते लाखों लोगों की जिंदगी मुश्किल हो गई है। बाढ़ में फंसे कर्नाटक के एक दंपती की दर्दनाक कहानी सामने आई है। यहां दिव्यांग पति और उसकी लाचार पत्नी तीन दिनों तक पहले घर की छत और फिर आम के पेड़ पर जिंदगी से जंग लड़ते नजर आए। घटना बेलागावी से करीब 25 किमी दूर स्थित गांव कबालपुरा की है। दरअसल पिछले हफ्ते उत्तर-पूर्वी कर्नाटक में भयंकर बारिश से हालात बेहद खराब हो गए थे। जब एनडीआरएफ की एक टीम जैसे-तैसे बेल्लारी नाला तक पहुंची तो रत्नाबाई गिवेड़ी (35) और उसके पति कडप्पा बीजी (38) की खुशी का ठिकाना नहीं था। ये दोनों करीब पांच एकड़ में फैले गन्ने और आम के खेतों में मजदूरी करते और किराये से रहते थे।

यूं बीते तीन दिनः पहले दिन दोनों ने फार्म हाऊस के सामने से हटकर छत की तरफ गए। दूसरे दिन कडप्पा ने पत्नी को बचाने के लिए एक प्लास्टिक की शीट का सहारा लिया। तीसरे दिन घर टूट गया तो उन्हें एक आम के पेड़ पर चढ़कर जान बचानी पड़ी। रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद दोनों को घायल अवस्था में नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उन्हें प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई। यह बेघर दंपती अब मंदिर में जीवनयापन कर रहा है।

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बचपन से पोलियो से पीड़ित कडप्पा ने अपनी दर्दनाक दास्तां बताते हुए कहा, ‘दूसरे दिन जब वह प्लास्टिक शीट लेने गई तो उसके पैर पर घर का कुछ हिस्सा गिर गया, तब हम ज्यादा डर गए। फिर जब मैं आम के पेड़ पर चढ़ा तो उसे रस्सी के सहारे ऊपर खींचा। बाढ़ के दृश्य आंखों में उमड़ रहे थे, जिसके चलते हम सो भी नहीं पाए। बाढ़ से पहले हमारे पास फार्म हाऊस से खाने, रहने और नियमित कमाई का जरिया था, अब सबकुछ खत्म हो चुका है, हमारे पास कुछ नहीं बचा।’

मंदिर में पति के साथ जिंदगी गुजार रहीं रत्नाबाई ने कहा, ‘हमने कभी किसी का कुछ नहीं बिगाड़ा, किसी से धोखाधड़ी नहीं की। मुझे लगता है इसीलिए भगवान ने हमें बचा लिया।’ दिव्यांग कडप्पा तैर सकते हैं, इसलिए पहले दंपती ने पानी को पार करने की भी सोची लेकिन लहरे तेज थीं। रत्नाबाई ने कहा, ‘हमने फैसला किया था, मौत आई तो साथ ही मरेंगे। हमने अपना सबकुछ खो दिया। हमारे पास खाना बनाने के लिए बर्तन तक नहीं है। मंदिर में फिलहाल हमें खाना मिल रहा है। जब से हम मुसीबत में थे तब से फार्म हाउस के मालिक हमें दूर से एक टॉर्च के जरिये देखने की कोशिश कर रहे थे, उसकी रोशनी देखकर मन में उम्मीद बंधी की कहीं से मदद मिलेगी।’

आम-गन्ने की फसलों और ट्रैक्टर को खोने वाले फार्म हाऊस के मालिक ने कहा, ‘कडप्पा और रत्नाबाई मेरे लिए परिवार की तरह है। मैं रातभर उन्हें दूर से देखता रहा। दोनों को करीब तीन दिनों तक आईसीयू में रखा गया।’ राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी ने दंपती को मदद राशि के तौर पर 10 हजार रुपए दिए। वहीं विधायक लक्ष्मी हेबलकर ने रत्नाबाई को साड़ी और शॉल दी, दोनों के पास फिलहाल यही सामान है।

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