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मुसलमानों के लिए बोले कुमारस्‍वामी- बीजेपी को जितवा कर कराया अपना ही नुकसान

जनता दल सेक्युलर के नेता एचडी कुमारस्वामी ने कहा कि भाजपा ने अपने दम पर 104 सीटें नहीं लाई हैं। योजनाबद्ध तरीके से मुस्लिम समुदाय को यह बताया गया कि विधानसभा चुनाव जीतने के बाद जेडीएस भाजपा के साथ जा सकती है। उन्होंने इस बार के विधानसभा चुनावों में पिछली बार की तुलना में कम सीटें मिलने पर भी टिप्पणी की है।

16 मई को बैंगलुरु में राज्यपाल वजुभाई वाला से मिलकर सरकार बनाने का दावा पेश करने के बाद मीडिया से बात करते जेडीएस अध्यक्ष एचडी कुमारस्वामी (बीच में) (फोटो-पीटीआई)

कर्नाटक में कांग्रेस और जनता दल सेक्युलर (जेडीएस) ने चुनाव बाद गठजोड़ की घोषणा कर भाजपा को राज्य की सत्ता से दूर रखने में सफल रही। लेकिन, राज्य के भावी मुख्यमंत्री और जेडीएस नेता एचडी. कुमारस्वामी को पिछले विधानसभा चुनाव के मुकाबले कम सीटें मिलने की टीस है। उन्होंने कहा कि बीजेपी ने मुस्लिम समुदाय की मदद से 104 सीटें हासिल कीं। ‘इकोनोमिक टाइम्स’ को दिए इंटरव्यू में कुमारस्वामी ने कहा, ‘भाजपा ने अपने दम पर 104 सीटें नहीं लाई हैं। योजनाबद्ध तरीके से मुस्लिम समुदाय को यह बताया गया कि विधानसभा चुनाव जीतने के बाद जेडीएस भाजपा के साथ जा सकती है। कांग्रेस पार्टी ने नहीं, बल्कि कुछ लोगों ने ऐसा किया है। मुल्लाओं और सेवानिवृत्त मुस्लिम अधिकारियों की एक टीम ने पूरे राज्य की यात्रा कर जेडीएस के पक्ष में मतदान न करने की अपील की थी। उन्हें ऐसा करने के लिए किसने प्रोत्साहित किया, अब यह बात अप्रसांगिक हो चुकी है। मुस्लिम समुदाय के निर्णय के कारण ही भाजपा को 104 सीटें मिलीं। मुस्लिम समुदाय के फैसले के कारण ही मैं ऐसी परिस्थिति में पहुंचा। यह आपके लिए ही (मुस्लिम समुदाय) नुकसानदेह होगा, मेरे लिए नहीं।’

इस तरह नहीं बनना चाहता था ‘किंग’: जेडीएस को वर्ष 2013 के विधानसभा चुनावों में 40 सीटें मिलीं थी, लेकिन इस बार पार्टी को 37 सीटों से ही संतोष करना पड़ा। कुमारस्वामी ने ‘किंगमेकर’ से इस तरह ‘किंग’ बनने से भी ज्यादा खुश नजर नहीं आए। उन्होंने कहा, ‘मैं जनादेश के बदौलत ‘किंग’ (मुख्यमंत्री) बनना चाहता था, इस तरह (कांग्रेस से गठजोड़ कर) से नहीं। मैं एक राजनीतिक घटनाक्रम के तहत वर्ष 2006 में मुख्यमंत्री बना था। आज भी मेरी स्थिति समान ही है। जनता के आशीर्वाद से ऐसा (सीएम बनना) नहीं हुआ है। कर्नाटक की जनता यह क्यों नहीं समझती है कि मैं क्या अनुभव करता हूं? वे मुझ पर भरोसा क्यों नहीं करते हैं? मुझे यह बहुत बुरा लगता है। मैँ एक राजनीतिज्ञ नहीं हूं, मैं एक भावुक इंसान हूं। मैं जानता हूं कि जनता दिक्कतें क्या हैं और उनकी अपेक्षाएं क्या हैं। ऐसे में यदि मुझे कोई समाधान लाना होगा…तो लोग इसमें भाजपा और कांग्रेस को देखेंगे। मेरे विचार में जनता को मुझे एक मौका देना चाहिए, लेकिन जेडीएस को पिछले साल की तुलना में कम सीटें मिली हैं।’

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