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Special Marriage Act 1954 में अजब क्लॉज, लिखा- ‘मूर्ख’ और ‘पागल’ नहीं रजिस्टर्ड करा सकते शादी

द नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ एंड न्यूरोसाइंस (नीमहंस) में मनोचिकित्सक डॉ प्रतिमा मूर्ति ने बताया कि 'पागल' और 'मूर्ख' जैसे शब्दों का इस्तेमाल कानूनी तौर पर बंद कर दिया गया है और यह बदलाव सभी अधिनियमों में दिखना चाहिए।

Author बेंगलुरू | Published on: September 19, 2019 6:41 PM
प्रतीकात्मक तस्वीर फोटो सोर्स- इंडियन एक्सप्रेस

अगर आप धर्मनिरपेक्ष तरीके से में शादी के बंधन में बंधना चाहते हैं तो आपको अपनी शादी रजिस्टर करने से पहले यह साबित करना होगा कि आप न मूर्ख हैं और न ही पागल। दरअसल स्पेशल मैरिज एक्ट 1954 के फॉर्म नंबर III के क्लॉज के मुताबिक सभी भारतीय नागरिक चाहे वो किसी भी धर्म या विश्वास से ताल्लुक रखते हों शादी के बंधन में बंध सकते हैं। यह एक्ट आपको यह विशेष अधिकार देता है। इस एक्ट के अंतर्गत आवेदकों को बताना कि शादी कर रहे दोनों लोगों में से कोई भी पागल या मूर्ख नहीं हैं।

नहीं होना चाहिए ‘पागल’ और ‘मूर्ख’ जैसे शब्दों का इस्तेमालः हालांकि यह क्लॉज वैध कानूनी दस्तावेज का एक हिस्सा हो सकता है, लेकिन काफी लोगों के लिए ये शब्द तुच्छ और असंवेदनशील हैं। मनोचिकित्सकों के मुताबिक नए कानून के आधार पर ‘पागल’ शब्द का इस्तेमाल अब नहीं किया जाता है। ऑस्ट्रेलिया बेस्ड किरण ( बदला हुए नाम) नाम के एक एनिमेटर ने बताया,’ मुझे याद है दो साल पहले मैंने अपने फॉर्म में इस क्लॉज को पढ़ा था और मुझे यकीन ही नहीं हो रहा था कि ऐसा सच में लिखा है। मुझे पता है क्लॉज में लिखी लाइन का मतलब ये है कि व्यक्ति सुंतिलत दिमाग का होना चाहिए, पर जिन शब्दों का प्रयोग करके इसे लिखा गया है वह गलत है।’
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दो साल पहले रजिस्टर की थी शादीः किरण ने साल 2017 में शहर के एक सब रजिस्ट्रार के ऑफिस में अपनी शादी रजिस्टर करवाई थी। उन्होंने कहा कोई व्यक्ति जो मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी हुई बीमारी के जूझ रहा है उसके लिए ‘पागल’ और ‘मूर्ख’ शब्द एक अतिरिक्त ट्रॉमा का कारण बन सकता है।
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स्पेशल मैरिज एक्ट से लिया गया क्लॉजः इस पूरे मामले पर बेंगलुरू की सोशियोलोजिस्ट आनंद इनबनथ ने कहा ‘हममें से कोई मूर्ख या पागल नहीं हैं’ यह क्लॉज स्पेशल मैरिज एक्ट से लिया गया है। उन्होने कहा कि क्लॉज में सही शब्दों का इस्तेमाल नहीं किया गया है और इसमें आज के समय के हिसाब से सही शब्दों का इस्तेमाल करने की जरूरत है। उन्होने आगे कहा दूसरी बात ये है कि यह क्लॉज अतार्किक भी है। जहां तक बात दिमागी रूप से स्वस्थ व्यक्ति की है वहां पर स्वप्रमाणिकता की जरूरत नहीं है। इसकी जगह पर आवेदकों से यह सवाल किया जाना चाहिए कि क्या दो लोग अपनी मर्जी से शादी करना चाहते है न कि किसी तरह के दबाव में।

अधिनियमों में किया जाए सही शब्दों का इस्तेमालः द नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ एंड न्यूरोसाइंस (नीमहंस) में मनोचिकित्सक डॉ प्रतिमा मूर्ति ने बताया कि ‘पागल’ और ‘मूर्ख’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल कानूनी तौर पर बंद कर दिया गया है और यह बदलाव सभी अधिनियमों में दिखना चाहिए। दा मेंटल हेल्थ एक्ट 1987 के मुताबिक ‘पागल’और ‘दिमागी रूप से परेशान व्यक्ति’ इस तरह के शब्दों को बदला जाना चाहिए। साथ ही अधिनियमों में सही शब्दों का इस्तेमाल किया जाना चाहिए।

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