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Karnataka: Mid Day Meal में 80% बच्चों को अंडे पसंद, बहुत कम खा रहे केले

Karnataka: जुलाई 2022 में एक पायलट स्टडी के बाद जिसमें बच्चों के आहार में अंडे शामिल किए जाने के बाद उत्साहजनक परिणाम देखे गए।

Karnataka: Mid Day Meal में 80% बच्चों को अंडे पसंद, बहुत कम खा रहे केले
Karnataka में मिड डे मील योजना में अंडे का वितरण किया जाता है। (express file photo)

सनथ प्रसाद

कर्नाटक (Karnataka) एक ऐसा राज्य है जहां मिड डे मील योजना (mid-day meal scheme) में अंडे का वितरण किया जाता है। राजनीतिक और धार्मिक नेताओं ने इसे मुद्दा बना दिया। जबकि बच्चों ने अपनी पसंद को स्पष्ट कर दिया। द इंडियन एक्सप्रेस को प्राप्त आंकड़ों के अनुसार लगभग 80 प्रतिशत मिड डे मील लाभार्थियों ने केले और चिक्की जैसे विकल्पों के बजाय अंडे को चुना है।

47.97 लाख छात्रों में से 38.37 लाख ने अंडे को चुना

लोक शिक्षण विभाग (Department of Public Instruction) द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों से पता चलता है कि 14 दिसंबर तक सरकारी स्कूलों में कक्षा 1 से 8 तक के 47.97 लाख छात्रों में से 38.37 लाख छात्रों ने अंडे, 3.37 लाख ने केले और 2.27 लाख ने चिक्की पसंद की। इस दौरान बाकी बच्चे अनुपस्थित रहे।

जुलाई 2022 में एक पायलट स्टडी के बाद जिसमें बच्चों के आहार में अंडे शामिल किए जाने के बाद उत्साहजनक परिणाम देखे गए। बता दें कि राज्य के स्कूल शिक्षा विभाग (state Department of School Education) ने घोषणा की कि कक्षा 1 से 8 तक के बच्चे गर्म पके भोजन के अलावा अंडे, केले और चिक्की में से कुछ भी चुन सकते हैं। पूरक पोषाहार कार्यक्रम के तहत आदेश में कहा गया है कि पूरक पोषण (पीएम पोषण शक्ति निर्माण के तहत) वर्तमान शैक्षणिक वर्ष 2022 के लिए राज्य के सभी जिलों में वर्ष में 46 दिन प्रदान किया जाएगा।

राज्य भर में अंडे चुनने वाले 38.37 लाख छात्रों में से अधिकांश 15.67 लाख छात्र बेलगावी डिवीजन से थे। इसके बाद बेंगलुरु डिवीजन (8.65 लाख), कलबुर्गी डिवीजन (8.33 लाख) और मैसूरु डिवीजन (5.70 लाख) के बच्चे थे।

द संडे एक्सप्रेस से बात करते हुए स्कूल शिक्षा मंत्री बीसी नागेश (School Education minister BC Nagesh) ने कहा, “हमने यह सुनिश्चित करने के लिए सभी जिलों में मिड डे मील में अंडे दिए हैं कि कुपोषण शिक्षा को बाधित नहीं करे। भोजन एक बहस का विषय है और इस पर सभी के अपने विचार हैं। हालांकि पायलट स्टडी लागू होने के बाद कल्याण कर्नाटक क्षेत्र (Kalyan-Karnataka region) से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिलने पर हमने अन्य जिलों में भी कुपोषण से लड़ने के लिए अंडे को शामिल करने का फैसला किया।”

दिसंबर 2021 और मार्च 2022 के बीच कर्नाटक सरकार ने एक पायलट स्टडी किया था, जिसके तहत सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़े कल्याण-कर्नाटक क्षेत्र में मिड डे मील योजना के तहत अंडे दिए गए। इसमें बीदर, कलबुर्गी, बल्लारी, विजयनगर, कोप्पला, रायचूर और यादगिरि जिले शामिल हैं।

हालांकि पायलट स्टडी को धार्मिक नेताओं और मठों के कड़े विरोध का सामना करना पड़ा। इन्होने कहा कि अंडे पेश करने से शाकाहारी छात्रों के खिलाफ भेदभाव होगा। लिंगायत द्रष्टा चन्नबासवानंद स्वामीजी (Lingayat seer Channabasavananda Swamiji) को दिसंबर 2021 में यह कहा था, “यदि अंडे दिए जाते हैं तो स्कूल सैन्य होटलों में बदल जाएंगे। इसकी जगह अनाज और दालें देनी चाहिए। अगर नियम वापस नहीं लिया जाता है, तो गंभीर विरोध होगा।” हरिहर पंचमस्ली मठ के पुजारी स्वामी वचनानंद गुरु सहित अन्य लोगों ने कहा कि अंडे पेश करने से ​​​​हमारे बच्चे भटक जाएंगे।

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First published on: 22-01-2023 at 11:37:05 am
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