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विवाद बढ़ाने में लगी है मोदी सरकार: सिब्बल

सिब्बल ने भाजपा नेताओं की ओर इशारा करते हुए कहा कि लोगों को भाषण देकर और सपना दिखाकर सत्ता में तो आ सकते हैं, लेकिन सपने को पूरा करना मुश्किल होता है।

Author भोपाल | February 29, 2016 12:04 AM
कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल। (फाइल फोटो)

पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं जाने माने वकील कपिल सिब्बल ने भाजपा की अगुवाई वाली केंद्र की एनडीए सरकार पर विकास के मुद्दे को दरकिनार कर विवादों को बढ़ाने का आरोप लगाते हुए कहा कि इस वातावरण में लोकतंत्र आगे नहीं बढ़ सकता है। संस्था ‘संदर्भ’ द्वारा रविवार यहां ‘संविधान और देशभक्ति’ विषय पर आयोजित एक कार्यक्रम में सिब्बल ने कहा,‘कई सालों बाद केंद्र में एक गैर कांग्रेसी सरकार को पूर्ण बहुमत मिला। लोगों को उम्मीद थी वादों के मुताबिक यह सरकार विकास करेगी लेकिन यह विकास के बजाय विवादों को बढ़ा रही है। ऐसे में विपक्ष भी इसकी प्रतिक्रिया व्यक्त करता है।’

उन्होंने कहा, ‘देश में ऐसे वातावरण में लोकतंत्र आगे नहीं बढ़ सकता है। जब तक यह भाषा बंद नहीं होगी, तब तक लोकतंत्र आगे नहीं बढ़ेगा।’ सिब्बल ने भाजपा नेताओं की ओर इशारा करते हुए कहा कि लोगों को भाषण देकर और सपना दिखाकर सत्ता में तो आ सकते हैं, लेकिन सपने को पूरा करना मुश्किल होता है। उन्होंने कहा कि मेरा देशप्रेम देश के प्रति है। किसी सरकार के प्रति नहीं।

उन्होंने कहा कि देशभक्ति का मतलब समझने में हम सब को वक्त लगेगा। हिंदुस्तान अद्भुत देश है। इसकी दुनिया में मिसाल नहीं है। हर देश की पहचान उसकी भाषा और संस्कृति से होती है। भारत की एक भाषा और संस्कृति नहीं है इसलिए यहां कौन देशभक्त है और कौन नहीं इसका जवाब आसान नहीं है।

उन्होंने कहा कि देश की सभी संस्कृतियों को एक हार में पिरो कर हमारा संविधान सभी भाषाओं और संस्कृतियों को बढ़ावा और संरक्षण देता है। सिब्बल ने कहा कि विश्वविद्यालय सार्वजनिक स्थान नहीं, निजी स्थान होते हैं और देश को बचाना है तो युवाओं को बोलने देना होगा। उन्होंने कहा कि यदि पुलिस विश्वविद्यालयों में प्रवेश करेगी तो वहां की स्वायतत्ता खत्म हो जाएगी।

उन्होंने शीर्ष अदालत के एक आदेश का हवाला देते हुए कहा कि केवल नारों के आधार पर किसी पर देशद्रोह का
मामला नहीं बनता है। यदि किसी व्यक्ति के द्वारा नारों के साथ राज्य के खिलाफ योजना और हिंसा की जा रही है तो देशद्रोह का मामला लागू होता है। सिब्बल ने कहा कहा कि भारत में समस्या इसलिए आ रही है क्योंकि हमने देश में शिक्षा पर इतना ध्यान नहीं दिया जितना कि देना चाहिए था। आज भी 70 से 80 करोड़ आबादी को रोज खाने की चिंता पहले है।

उन्होंने कहा कि देश में संचार काफी तेज हो गया है और इस वजह से लोग दुनिया से शीघ्र सीखते हैं और उन्हें दुनिया के बराबर चीजें तुरंत चाहिए। इसलिए लोगों की सरकार और राजनेताओं से उम्मीदें बढ़ गई हैं। जब लोगों की बढ़ती उम्मीदें पूरी नहीं हो पाती तो वे सड़क पर आ जाते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार और जनता के बीच की लक्ष्मण रेखा खत्म हो रही है। राजनीतिज्ञ के तौर पर हम जनता की उम्मीदों पर खरे उतरने में विफल हो गए हैं। उन्होंने मीडिया पर निशाना साधते हुए कहा,‘देश का मीडिया इसी तरह चलता रहा तो देश बर्बादी की ओर चला जाएगा।’

इसके साथ ही सोशल मीडिया को भी खतरनाक बताते हुए उन्होंने कहा कि इसमें शाम को देखो तो लगता है कि एक धमासान युद्ध हो रहा है और कुछ चैनल किसी भी मुद्दे पर फैसला भी दे देते हैं। आरक्षण के मुद्दे पर पूछे गए सवाल पर सिब्बल ने कहा,‘यह एक गंभीर मामला है। आरक्षण को खत्म नहीं किया जा सकता। निजी क्षेत्र को बढ़ावा मिलने से सरकारी नौकरियां कम होती जा रही हैं और आरक्षण बढ़ रहा है, ऐसे में यह झगड़ा तो होगा ही।

उन्होंने कहा कि यदि आर्थिक तरक्की कर रोजगार के अवसर बढ़ाए जाएं तो यह संघर्ष खत्म किया जा सकता है। बातचीत कार्यक्रम में उपस्थित वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक तन्खा ने कहा सबको अपनी बात कहने का अधिकार है। देशभक्ति किसी एक समुदाय की नहीं देश की बपौती है। बातचीत कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ पत्रकार दीपक तिवारी ने किया।

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