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बाबा का ढाबा वाले बुजुर्ग ने की ख़ुदकुशी की कोशिश, हालत गंभीर

दक्षिणी दिल्ली के मालवीय नगर इलाके में मशहूर बाबा का ढाबा चलाने वाले कांता प्रसाद (80) ने गुरुवार रात नींद की गोलियां खाकर आत्महत्या करने की कोशिश की।

बाबा का ढाबा सोशल मीडिया पर रातों रात फेमस हो गया था।

दक्षिणी दिल्ली के मालवीय नगर इलाके में मशहूर बाबा का ढाबा चलाने वाले कांता प्रसाद (80) ने गुरुवार रात नींद की गोलियां खाकर आत्महत्या करने की कोशिश की। उन्हें सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया जहां उन्हें आईसीयू में भर्ती कराया गया है। डीसीपी (दक्षिण) अतुल ठाकुर ने कहा, “हमने अस्पताल से सैंपल जमा किया है जिसमें शराब और नींद की गोलियों का सेवन बेहोशी का कारण बताया गया है। उनके बेटे करण का भी बयान दर्ज किया गया है। आगे की जांच जारी है।”

पुलिस ने कहा कि उन्हें गुरुवार की देर रात एक पीसीआर कॉल मिली कि आत्महत्या का प्रयास करने वाला एक व्यक्ति अस्पताल पहुंचा है। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया, “पुलिस मौके पर पहुंची और पाया कि वह कांता प्रसाद है। फिलहाल उनका इलाज चल रहा है। उनकी पत्नी ने पुलिस को सूचित किया कि वह पिछले कुछ दिनों से उदास थे। ” उनकी पत्नी ने यह भी कहा कि प्रसाद को पिछले साल दिसंबर में अपने द्वारा खोले गए रेस्तरां को बंद करना पड़ा और सड़क किनारे अपने पुराने स्टाल पर वापस आ गए क्योंकि नए रेस्तरां को चलाने की लागत लगभग 1 लाख रुपये थी जबकि उनकी आय केवल 30,000 रुपये थी।

पिछले साल, प्रसाद ने यूट्यूबर गौरव वासन के खिलाफ धोखाधड़ी की एफआईआर दर्ज की थी, जो कथित तौर पर उनकी और उनकी पत्नी की मदद के लिए जुटाए गए धन के दुरुपयोग के लिए थी।

वासन ने पिछले साल 7 अक्टूबर को प्रसाद और उनकी पत्नी के वीडियो को शूट किया था, जिसमें जोड़े को मालवीय नगर में भोजनालय में ग्राहकों की कमी के बारे में बात करते हुए दिखाया गया था, जिसके बाद कई लोगों ने पैसे दान किए।

नवंबर में, प्रसाद ने द इंडियन एक्सप्रेस को बताया था कि उन्हें वासन से केवल 2 लाख रुपये का चेक मिला था और दावा किया था कि लोग केवल सेल्फी लेने के लिए आए थे और वीडियो के कारण उनकी बिक्री नहीं बढ़ी थी। पिछले साल कामयाबी के बाद, प्रसाद ने नया रेस्तरां खोलने के लिए 5 लाख रुपये का निवेश किया और तीन कर्मचारियों को काम पर रखा था। कामयाबी के कुछ दिनों के बाद, लोगों का आना कम हो गया और प्रसाद को इसे बंद करना पड़ा।

उन्होंने बताया, ‘औसत मासिक बिक्री कभी भी 40,000 रुपये के पार नहीं गई। सारा नुकसान मुझे उठाना पड़ा। अंत में, मुझे लगता है कि हमें एक नया रेस्तरां खोलने की गलत सलाह दी गई थी। 5 लाख रुपये के कुल निवेश में से, हम रेस्तरां बंद होने के बाद कुर्सियों, बर्तनों और खाना पकाने की मशीनों की बिक्री से केवल 36,000 रुपये मिले।”

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