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कानपुर हिंसा: पत्‍थरबाजी के बाद सपा विधायकों पर फूट रहा लोगों का गुस्‍सा, नहीं पहुंच रहे जनता के बीच

कानपुर हिंसा के मुख्य मास्टरमांइड के बारे में बताते हुए इरफान सोलंकी ने कहा कि जफर हयात हाशमी वो आदमी है, जिसने 2022 के चुनाव में कांग्रेस के उम्मीदवार को लड़ाया था। वो हमारा कट्टर विरोधी है।

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कानपुर हिंसा के बाद आज की तस्वीर। ( फोटो सोर्स: @alok_pandey)।

कानपुर हिंसा के बाद क्षेत्रीय लोगों का गुस्सा सपा विधायकों पर फूट रहा है। लोगों ने सपा विधायकों के शहर में पोस्टर लगाए हैं। पोस्टर में सपा विधायकों को ‘शादी समारोह में संपर्क’ करने वाला और उद्घाटन करने वाला विधायक बताया गया है। क्षेत्रीय लोगों ने दोनों सपा विधायक इरफान सोलंकी और अमिताभ बाजपेयी के पोस्टर लगाए हैं। वहीं सोशल मीडिया पर भी पोस्ट को वायरल किया जा रहा है। इतना ही नहीं शहर में लगे कुछ मुख्यद्वार पर सपा विधायकों के नाम को पोत दिया गया है।

सपा विधायक इरफान सोलंकी ने दी सफाई
कानपुर हिंसा मामले पर सपा विधायक इरफान सोलंकी ने मामले पर सफाई देते हुए कहा कि इस पूरे घटनाक्रम से समाजवादी पार्टी का कोई लेनादेना नहीं है। उन्होंने कहा कि माहौल खराब न हो इसलिए जनता के बीच नहीं गए। हम क्षेत्रीय विधायक हैं तो कोई भी व्यक्ति हमारे साथ फोटो खींचा सकता है। उसके बाद किसी पर अपराध सिद्ध हो जाए तो उसकी जिम्मेदारी मेरी नहीं है।

कानपुर हिंसा के मुख्य मास्टरमांइड के बारे में बताते हुए इरफान सोलंकी ने कहा कि जफर हयात हाशमी वो आदमी है, जिसने 2022 के चुनाव में कांग्रेस के उम्मीदवार को लड़ाया था। वो हमारा कट्टर विरोधी है। उन्होंने कहा कि चुनाव खत्म होने के बाद हम सभी चीजों को भूलकर आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे हैं। उसके बाद जो घटना हुई उसके जिम्मेदार हम नहीं हैं। समाजवादी पार्टी हमेशा निर्दोष के साथ खड़ी है। निर्दोष को बचाने का काम करती है। उन्होंने कहा कि अगर कोई अपराधी है तो पहले अपराध सिद्ध होगा, उसके बाद वो मुजरिम बनेगा।

वहीं डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने कहा, उत्तर प्रदेश में कानून का राज स्थापित है। किसी को भी दंगा-फसाद करने की अनुमति नहीं है। उन्होंने कहा कि हम हर मामले पर बहुत बारीक नजर बनाए हुए हैं। साथ ही कानून तोड़ने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करेंगे। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश का पुलिस-प्रशासन अलर्ट पर है। इसी कारण हम उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था को पटरी पर ला पाए हैं।

कानपुर में तीन जून को हुई हिंसा के बाद अब कानपुर पुलिस और जिला प्रशासन ने नई सड़क इलाके के आसपास बनी ऊंची इमारतों की जांच शुरू कर दी है।

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