Kanpur-Lucknow Expressway: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के करीबी दो शहर यानी उन्नाव और कानपुर के लोगों के लिए 13 जुलाई का दिन एक खुशखबरी लेकर आया है क्योंकि सोमवार को लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेस-वेका उद्घाटन हो गया है। सड़कमार्ग से जो दूरी तय करने में लोगों को 3 से 4 घंटे तक लग जाते थे, वो दूरी अब महज 40 से 50 मिनट में पूरी हो जाएगी।
इस एक्सप्रेस वे निर्माण की वजह से न केवल कानपुर उन्नाव बल्कि कानपुर देहात और बुंदेलखंड तक के लोगों के लिए लखनऊ जाना बेहद आसान हो जाएगा। अहम बात यह भी है कि एक्सप्रेस वे के उद्घाटन के साथ ही हरदोई-लखनऊ NH पैकेज फोर का लोकार्पण और इंजीनियरिंग कॉलेज चौराहे से 4 लेन फ्लाईओवर का शिलान्यास भी किया गया है।
इस प्रोजेक्ट की वजह से मध्य यूपी के पूरे क्षेत्र में सड़क यातायात को काफी मजबूती मिलने का अनुमान लगाया गया है। साथ ही यूपी सरकार इसे अर्थव्यवस्था की दृष्टि से भी एक अहम फैक्टर मान रही है, क्योंकि कानपुर, चमड़ा और टेक्सटाइल के लिहाज से प्रदेश का अहम शहर माना जाता है।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने किया उद्घाटन
बता दें कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को इस एक्सप्रेस वे का उद्घाटन किया है। 4200 करोड़ रुपये की लागत से बने 63 किलोमीटर लंबे कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे में लोगों की सुविधाओं का भी पूरा ध्यान रखा गया है।
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा निर्मित इस नए एक्सप्रेसवे के चालू होने से दोनों महानगरों के बीच का सफर 3 घंटे की जगह सिर्फ 40 मिनट में तय हो सकेगा। उद्घाटन के बाद तीनों नेताओं ने खुद कार से उन्नाव से लखनऊ के सरोजनी नगर तक यात्रा की और इसके ट्रायल टेस्ट के साथ ही इसे आम जनता के लिए खोल दिया गया है।
रफ्तार से बातें कर सकेंगे बड़े वाहन
कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेस वे की खास बात यह है कि इस पर वाहनों की अधिकतम सीमा 120 किलोमीटर प्रति घंटा रखी गई है। इसके चलते लोगों को ड्राइविंग में सहजता होगी। ध्यान देने वाली बात यह भी है कि एक्सप्रेस वे पर सिर्फ कार, वैन और अन्य चार-पहिया वाहनों को ही चलने की अनुमति होगा। नियमों के अनुसार, इस एक्सप्रेस-वे पर दोपहिया वाहनों को चलने की अनुमति नहीं दी गई है।
क्यों है इस एक्सप्रेस-वे का महत्व?
एक्सप्रेस-वे के अहम बिंदुओं की बात करें तो ये निम्नलिखित हैं-
3 घंटे का सफर सिर्फ 40-50 मिनट में: वर्तमान में NH-27 पर भारी ट्रैफिक, जाम और शहरी रुकावटों की वजह से कानपुर से लखनऊ जाने में 2.5 से 3 घंटे लग जाते हैं। इस 63 किलोमीटर लंबे 6-लेन एक्सप्रेसवे के शुरू होने से यह दूरी महज 40 से 50 मिनट में पूरी हो जाएगी।
रफ़्तार और ईंधन की बचत: इस एक्सप्रेसवे पर गाड़ियों की अधिकतम रफ्तार 120 किमी/घंटा तय की गई है। बिना रुकावट के चलने से गाड़ियों का ईंधन बचेगा और प्रदूषण में भी कमी आएगी।
बिना रुके टोल कलेक्शन: यह देश का पहला ऐसा एक्सप्रेसवे है, जहां Barrier-less Tolling System का इस्तेमाल हो रहा है। यानी आपको टोल टैक्स देने के लिए गाड़ी को कतार में रोकने की जरूरत नहीं होगी; ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) और FASTag की मदद से चलते-चलते ही टोल कट जाएगा।
AI और स्मार्ट सिक्योरिटी: इस पूरे रूट पर 80 से ज्यादा हाई-डेफिनिशन और PTZ कैमरे लगे हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित ऑटोमैटिक ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ATMS) से ओवरस्पीडिंग करने वालों का अपने आप चालान कट जाएगा। साथ ही, किसी भी आपातकालीन स्थिति या दुर्घटना के समय मात्र 10 से 15 मिनट के भीतर एम्बुलेंस और रिस्पांस गाड़ियां मौके पर पहुंच सकेंगी।
लॉजिस्टिक्स और वेयरहाउसिंग: उत्तर प्रदेश में कानपुर चमड़ा, टेक्सटाइल और भारी उद्योगों का केंद्र रहा है, जबकि लखनऊ बड़ा व्यापारिक बाजार है। एक्सप्रेसवे के उद्घाटन से दोनों शहरों के बीच माल की ढुलाई बेहद तेज और सस्ती हो जाएगी। इससे कंपनियों के लिए ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट घटेगी।
डिफेंस कॉरिडोर को रफ्तार: उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के दो महत्वपूर्ण नोड्स कानपुर और लखनऊ हैं। यह एक्सप्रेसवे इन दोनों नोड्स के बीच लॉजिस्टिक्स और मैन्युफैक्चरिंग कनेक्टिविटी को अभूतपूर्व मजबूती देगा।
जमीनों की कीमतें और नए टाउनशिप: इस एक्सप्रेसवे के रूट में रियल एस्टेट सेक्टर को बहुत बड़ा बूस्ट मिलने का अनुमान है। कई बड़ी कंपनियां और सरकार यहां इंडस्ट्रियल लॉजिस्टिक्स पार्क, कमर्शियल हब और आवासीय सोसायटियां विकसित कर रही हैं, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
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दक्षिण-पूर्वी दिल्ली के ओखला इंडस्ट्रियल एरिया में प्लॉट नंबर X-57 पर एक ऊंचे काले लोहे के गेट के पीछे खड़ी तीन मंजिला इमारत बाहर से बिल्कुल सामान्य दिखती थी। बेसमेंट में पर्दों का गोदाम था, पहली मंजिल पर महिलाओं के कपड़ों की सिलाई और कढ़ाई का काम चलता था जबकि दूसरी मंजिल खाली पड़ी रहती थी। लेकिन इस इमारत के बेसमेंट पर पिछले चार सालों से ऐसा कुछ हो रहा था जिसके बारे में आसपास के लोगों को भी कोई अंदाजा नहीं था। पढ़िए पूरी खबर…
