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अब मध्य प्रदेश में बीजेपी को हराने के ल‍िए मायावती से संपर्क साध रहे हैं कमलनाथ?

एमपी में दलितों की मौजूदगी 15 प्रतिशत है। चंबल और उत्तरप्रदेश की सीमा से सटे कुछ इलाकों में बसपा मजबूत मानी जाती है। यहीं वजह है कि कांग्रेस चुनाव से पहले बसपा से पींगे बढ़ाने में जुटी है।

Author June 1, 2018 3:29 PM
कांग्रेस नेता कमलनाथ

देश में हाल में हुए कुछ उप चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के लिए सबसे बड़ी चुनौती साबित हुई है विपक्षी एकता। खासकर यूपी में सपा-कांग्रेस-बसपा गठबंधन ने भाजपा को बड़ा झटका दिया है। इसी साल भाजपा शासित एक और राज्य मध्य प्रदेश में भी विधानसभा चुनाव होने हैं। खबर है कि इस चुनाव से पहले कांग्रेस बड़ा गेम खेलने वाली है। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो कांग्रेस इस चुनाव में मायावती की पार्टी बीएसपी से गठबंधन कर सकती है। खबर है कि मध्य प्रदेश में गठबंधन को लेकर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मध्य प्रदेश के चुनाव प्रभारी कमलनाथ ने बसपा सुप्रीमो मायावती से संपर्क भी किया है। अब अटकलें यह लगाई जा रही हैं कि दोनों ही पार्टियां चुनाव पूर्व यहां गठबंधन कर सकती हैं या फिर चुनाव के दौरान बीजेपी के वोट शेयर को झटका देने और उसके जातीय समीकरण को बिगाड़ने के लिए दोनों ही पार्टियां अपने-अपने उम्मीदवार भी उतार सकती हैं।

एमपी में दलितों की मौजूदगी 15 प्रतिशत है। चंबल और उत्तरप्रदेश की सीमा से सटे कुछ इलाकों में बसपा मजबूत मानी जाती है। यहीं वजह है कि कांग्रेस चुनाव से पहले बसपा से पींगे बढ़ाने में जुटी है। हालांकि राज्य में बसपा कोई बहुत बड़ी ताकत तो नहीं है लेकिन यह सच है कि मायावती की पार्टी ने राज्य में पिछले कई चुनावों के दौरान कांग्रेस को झटका जरूर दिया है। लगता है कांग्रेस इस बार राज्य के पुराने चुनावी इतिहास से सबक ले रही है।

-2003 के विधानसभा चुनाव में 230 विधानसभा सीटों में से कांग्रेस महज 38 सीटें जीत पाई थी जबकि बसपा को महज 2 सीटें मिली थीं। लेकिन इस चुनाव में कांग्रेस करीब 25 सीटें सिर्फ बसपा की वजह से हार गई थी, जबकि बसपा 14 सीटों पर इसलिए हार गई क्योंकि कांग्रेस के साथ उसके वोट बट गए थे। यानी इस साल 39 सीटें दोनों पार्टियां सिर्फ इसलिए हार गईं क्योंकि दोनों अलग-अलग चुनाव लड़ रहे थे।

-2008 में कांग्रेस यहां विधानसभा चुनाव में 71 सीटों पर जीती थी, जबकि पिछले चुनाव में 173 सीटें जीतने वाली बीजेपी 143 सीटों पर जीत के साथ सत्ता पाने में कामयाब रही थी। राजनीतिक विश्लेषकों ने उस वक्त कहा था कि चुनाव में बसपा ने कांग्रेस को 39 सीटों पर झटका दिया था। जबकि खुद बसपा को 14 सीटों का नुकसान हुआ था। यानी 71+39+14 का आंकड़ा अगर जुड़ा रहता तो सीटें 124 में तब्दील हो जाती।

राजनीतिक गलियारे में इस संभावित गठबंधन को लेकर यह चर्चा हो रही है कि इस बार अगर यह गठबंधन होता है तो कांग्रेस बसपा को कुल 15 सीटें देगी। इन 15 में 4 वो सीटें हैं जिनपर बसपा ने पिछले चुनाव में जीत हासिल की थी, जबकि 11 वो सीटें हैं जिनपर बसपा नंबर-2 के पोजिशन पर रही थी। हालांकि अभी इन सभी बातों के सिर्फ कयास लगाए जा रहे है। हो सकता है कि इस गणित में आगे जाकर काफी फर्क देखने को मिले। लेकिन इतना तय है कि अगर यह गठबंधन मध्यप्रदेश के चुनावी दंगल में उतरता है तो भाजपा के लिए परेशानी जरूर बढ़ जाएगी।

 

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