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कमला मिल हादसा: ‘नशे में धुत थे लोग, वॉशरूम की तरफ भागी महिलाएं, अंदर ही दम घुटने से हुई मौत’

''इमारत में आग लगने के दौरान बचाव वाला कोई रास्ता नहीं था। वहां केवल एक छोटा सा एक्जिट था।''

आग लगने के कुछ ही मिनट पहले खुशबू ने अपने दोस्तों के साथ 28वें जन्मदिन का जश्न मनाया था

मुंबई के लोअर परेल इलाके में गुरुवार की रात कमला मिल्स में लगी भीषण आग से हुए हादसे में जो लोग अपनी जान बचाने में कामयाब हुए, उन्होंने दिल दहला देने वाली आपबीती बयां की है। हादसे में 16 लोगों की मौत हो गई और करीब 2 दर्जन लोग गंभीर रूप से घायल हो हुए जिनका इलाज चल रहा है। हादसे में बचे लोकेश पारेख बताया कि रात के करीब 1 बजे उन्होंने इमारत की दूसरी मंजिल पर बने रेस्टोरेंट में खाना खाने का निर्णय लिया, जिसकी वजह से वह आग में फंसने से बच गए। उन्होंने बताया कि वह भी अन्य लोगों की तरह पहले खुद को बचाने के लिए वॉशरूम में घुसे थे, लेकिन आग बुझने का इंतजार करने के बजाय सीधे सीढ़ियों की तरफ भागे।

दादर में रहने वाले पारेख के एक रिश्तेदार प्रतीक ठाकुर भी इस हादसे में झुलस गए जिनका भाटिया अस्पताल में इलाज चल रहा है। ठाकुर ने बताया कि आधी रात के करीब आठ रेस्टोरेंट में एक परिवार के आठ लोग खाना खा रहे थे जब आग लगी। उन्होंने कहा कि उन्हें 99 फीसदी यकीन है कि आग हुक्के वजह से लगी। ठाकुर ने बताया कि जैसे ही उन्हें लगा कि तिरपाल का शेड होने के कारण आग मिनटों भीषण रूप ले लेगी तो वह लोगों से भागकर बचने के लिए चिल्लाने लगे। ठाकुर ने बताया कि पारेख और उनके साथ के लोगों ने वॉशरूम में आग बुझने का इंतजार नहीं किया इसलिए बिना खरोंच के बाहर निकल आए। जिन लोगों ने वॉशरूम में आग बुझने का इंतजार किया, उनका दम घुट गया।

ठाकुर ने यह भी बताया कि लोगों ने शराब पी रखी थी, नशें में होने की वजह से उन्हें होश नहीं था कि कहां भागें। ठाकुर के मुताबिक उन्होंने देखा था कि 10-15 लोग जान बचाने के लिए भागे थे। ठाकुर की मानें तो जब उन्हें पता चला कि उनकी पत्नी तोरल अंदर रह गई हैं तो वह उन्हें बचाने के लिए फिर से अंदर की ओर घुसे। उनके हाथ झुलस गए थे, लेकिन तभी पत्नी के भाई ने उन्हें वहां से बाहर खींचा।

29 वर्षीय तोरल ने दावा किया कि इमारत में आग लगने के दौरान बचाव वाला कोई रास्ता नहीं था। वहां केवल एक छोटा सा एक्जिट था जिसकी वजह अफरा-तफरी मच गई थी। उन्होंने बताया कि पूरी खुली हुई जगह पर तिरपाल का शेड था जिसकी वजह से तेजी से आग फैल गई और उसकी चपेट में पब आ गए।

ठाकुर ने बताया कि एक सुरक्षाकर्मी वॉशरूम के अंदर था और वह दरवाजा खोलने के लिए मना कर रहा था। वह कहता रहा कि अगर दरवाजा खुला तो आग अंदर फैल जाएगी। डीजे ने उसकी बात नहीं मानी और दरवाजा खोल दिया, फिर सभी वहां निकल भागे। पारेख के बाहर आने के करीब 10 मिनट बाद पूरी छत ढह गई। इसी तरह किसी ने किचन की खिड़की से कूदकर जान बचाई तो किसी तरह खुद को बचाने में कामयाब हुआ। फिलहाल इस हादसे के पीछे वजह यही सामने आ रही है कि इमारत में आग बुझाने की साधन नहीं थे, जिसकी वजह से इतना बड़ा हादसा हुआ।

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