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CM कमलनाथ की निकाह स्कीम की नई शर्त, शौचालय में खड़े दूल्हे की ‘Selfie’ भेजो, तभी मिलेंगे 51000 रुपए!

भोपाल के जहांगीराबाद इलाके में रहने वाले एक युवक ने नाम छिपाने की शर्त पर बताया, ‘‘सोचिए कि मैरिज सर्टिफिकेट पर दूल्हे का ऐसा फोटोग्राफ लगेगा, जिसमें वह टॉयलेट के अंदर खड़ा है। मुझे यह भी बताया गया है कि काजी तब तक निकाह नहीं पढ़ेगा, जब तक मैं उसे ऐसा फोटो नहीं दे दूंगा।’’

प्रतीकात्मक तस्वीर, फोटो सोर्स- सोशल मीडिया

मध्य प्रदेश सरकार ने मुख्यमंत्री कन्या विवाह/निकाह योजना के तहत दुल्हन को 51 हजार रुपए देने का ऐलान किया है। हालांकि, इस योजना के तहत एक अजब शर्त भी रखी है। ऐसे में दूल्हे को टॉयलेट में खड़े होकर सेल्फी लेनी होगी, जिसे एप्लिकेशन फॉर्म में लगाना अनिवार्य किया गया है। बता दें कि इस सरकारी योजना का फायदा उठाने वाले मध्य प्रदेश के दूल्हों के लिए यह एक ऐसा प्री-वेडिंग शूट साबित हो रहा है, जिसे वे याद नहीं रखना चाहते हैं।

यह है नियम: जानकारी के मुताबिक, मुख्यमंत्री कन्या विवाह/निकाह योजना के आवेदन फॉर्म में शर्त है कि दुल्हन के होने वाले पति के घर में टॉयलेट होना अनिवार्य है। इसके चलते सरकारी अधिकारी कहीं भी टॉयलेट चेक करने नहीं जा रहे हैं। वे दूल्हे से डिमांड करते हैं कि वह टॉयलेट में खींची गई एक स्टैंडिंग सेल्फी उन्हें भेजे।

National Hindi News, 10 October 2019 Top Headlines Updates: देश-दुनिया की हर खबर पढ़ने के लिए यहां करें क्लिक

भोपाल निगम भी कर रहा यही डिमांड: बताया जा रहा है कि टॉयलेट में खड़े होकर फोटो खिंचवाने में दूल्हों को शर्मिंदगी का सामना करना पड़ रहा है। यह शर्त सिर्फ ग्रामीण इलाकों में ही सीमित नहीं है। प्रदेश की राजधानी भोपाल के नगर निगम के अधिकारी भी दूल्हों से यही डिमांड कर रहे हैं।

दूल्हों ने यूं बयां किया दर्द: टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, भोपाल के जहांगीराबाद इलाके में रहने वाले एक युवक ने नाम छिपाने की शर्त पर बताया, ‘‘सोचिए कि मैरिज सर्टिफिकेट पर दूल्हे का ऐसा फोटोग्राफ लगेगा, जिसमें वह टॉयलेट के अंदर खड़ा है। मुझे यह भी बताया गया है कि काजी तब तक निकाह नहीं पढ़ेगा, जब तक मैं उसे ऐसा फोटो नहीं दे दूंगा।’’ बता दें कि यह युवक उन 74 दूल्हों में शामिल था, जो गुरुवार (10 अक्टूबर) को भोपाल की सेंट्रल लाइब्रेरी में सामूहिक विवाह करने वाले हैं।

अधिकारियों ने दी यह जानकारी: सामाजिक न्याय और विकलांग कल्याण विभाग के प्रमुख सचिव जेएन कनसोटिया ने बताया, ‘‘शादी से पहले दूल्हों से टॉयलेट के सबूत वाली तस्वीर मांगना गलत चीज नहीं है। सामाजिक न्याय विभाग ने इस तरह का कोई निर्देश जारी नहीं किया है। हालांकि, इस पॉलिसी को और भी बेहतर ढंग से लागू किया जा सकता है।’’ बताया जा रहा है कि स्कीम में टॉयलेट होने की शर्त 2013 से लागू है, लेकिन फोटोग्राफ को कुछ समय पहले ही अनिवार्य किया गया है।

पहले यह थी शर्त: सीएम विवाह योजना के इंचार्ज सीबी मिश्रा ने बताया कि पहले इस पॉलिसी में रियायत बरती जाती थी। उस वक्त दूल्हो को शादी से 30 दिन पहले बताना होता था कि उन्होंने टॉयलेट बनवा लिया है। इसके बाद कागजी कार्यवाही पूरी कर दी जाती थी। उन्होंने कहा कि टॉयलेट में खींची गई दूल्हे की तस्वीर लगाना गलत नहीं है। यह शादी के कार्ड का हिस्सा नहीं है।

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