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उत्तर प्रदेश: इस बार सिर्फ खास का होगा आम

आम की नई प्रजातियों की खोज और नस्ल सुधार के लिए पद्मश्री से नवाजे गए कलीमुल्ला कहते हैं कि जमाने बाद, आम की इतनी कमजोर फसल देख रहा हूं।

मलिहाबाद के आम उत्पादक पद्मश्री हाजी कलीमुल्ला आम के बगीचे में आम को दिखाते हुए। देश भर में दशहरी आमों के लिए लखनऊ का मलिहाबाद क्षेत्र मशहूर है।

इस बार आम खास लोगों के लिए है। रुज्जी कीट ने फलों के इस बेताज बादशाह को आम लोगों से दूर कर दिया है। सुगंध और स्वाद की वजह से हर दिल अजीज मलिहाबादी दशहरी की फसल इस साल बहुत कमजोर हुई है। आम की नई प्रजातियों की खोज और नस्ल सुधार के लिए पद्मश्री से नवाजे गए कलीमुल्ला कहते हैं कि जमाने बाद, आम की इतनी कमजोर फसल देख रहा हूं। एक तो मौसम का मिजाज। दूसरे इस रुज्जी कीट ने आम को इस मर्तबा आम लोगों से दूर किया है। फसल कम होने की वजह से इस साल आम महंगे होंगे। नरेंद्र मोदी, अटल बिहारी वाजपेयी, सोनिया गांधी, सचिन तेंदुलकर, ऐश्वर्य राय समेत तमाम नामचीन हस्तियों के नाम पर आम की नई प्रजाति विकसित कर उन्हें समर्पित करने वाले कलीमुल्ला इस बार उचटे से हैं। कहते हैं, रुज्जी कीट ने रातों-रात आम की बागों पर हमला कर दिया। कुछ ही घंटों में आम की आधी से अधिक फसल तबाह हो गई।

आम के बागवानों को भारी नुकसान हुआ। बौर आते वक्त अधिक ठंड होने की वजह से पहले ही तीस फीसद आम कम होने की आशंका थी। रुज्जी ने आकर बागवानों को तबाह कर दिया। आम की फसल बचाने के लिए पहले जिस तादात में कीटनाशकों का प्रयोग बागों में किया जाता था, उसकी दोगुनी मात्रा डालने के बाद भी ये कीड़े नहीं मरते। ये आम को अंदर से खा जाते हैं जिसकी वजह से उसे फेंकने के अलावा कोई चारा नहीं बचता। मलिहाबाद के आम बागवान बताते हैं कि इस मर्तबा आगरा, मथुरा, बागपत, हाथरस, मेरठ, मुरादाबाद, मुजफ्फ रनगर, हरदोई, कानपुर देहात, फतेहपुर, प्रतापगढ़, इलाहाबाद, वाराणसी समेत प्रदेश के तीन दर्जन से अधिक जिलों में तेज आंधी और कीटों ने फसल को भारी नुकसान पहुंचाया है। बागवान कहते हैं, हमें भारी नुकसान से बचाने के लिए सरकार को आगे आना होगा। हर साल आम 20 मई के आस-पास बागों से टूटना शुरू हो जाता था। लेकिन इस बार जून के पहले हफ्ते से आम की टूट शुरू होगी। इसी वजह से मलिहाबादी दशहरी के दीदार में थोड़ा वक्त और गुजारना होगा।

वहीं सत्रहवीं लोकसभा के चुनाव परिणामों पर पद्मश्री कलीमुल्ला आम से जुड़ा वाकया बताते हैं। वो कहते हैं, इस बार भी आम की कुछ नई प्रजातियां तैयार की हैं। उनके पकने और स्वाद के बाद तय करूंगा कि उन्हें किसका नाम दूं। इस बार लोकसभा चुनाव में अमित शाह की रणनीति का मैं कायल हो गया।
इसलिए जो सबसे बेहतरीन और स्वादिष्ट आम होगा, उसे अमित शाह का नाम दूंगा। वो ऐसा आम होगा जिसे लोग चखकर दाद देंगे। जैसे इस वक्त अमित शाह को उनकी शानदार रणनीति के लिए दाद मिल रही है।

कुछ और नई प्रजातियों में और किसका नाम देंगे? के सवाल पर वो कहते हैं, अभी सोचा नहीं है। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के नाम पर आम का नाम रखने के सवाल पर वे कहते हैं, अभी मैं न राहुल को इस काबिल मानता हूं और न ही प्रियंका को। अब तक इन दोनों ने ऐसा कोई काम नहीं किया है जो मिसाल बनें। कलीमुल्ला हर साल अमनी आम की बाग में नई प्रजातियों के लिए कुछ न कुछ नया करते रहते हैं।

एक शाख पर 350 नस्लें: मलिहाबाद इलाके में कलीमुल्ला की आम के बाग की सबसे बड़ी खासियत आम का वह नायाब पेड़ है जिसमें आम की 350 प्रजातियां फलती हैं। शाखों पर एक साथ 350 प्रजातियों के आम के दीदार शायद ही दुनिया में कहीं और हों। किसी का हुस्न करेले की तरह का है तो कोई घमंड में बैंगनी हुआ जा रहा है। बैंगनी का मतलब दिखने में हू-ब-हू बैंगनी। कोई दिल के आकार का है तो किसी का वजन लगभग एक किलो। कलीमुल्ला इस पेड़ को भारत के नाम से पुकारते हैं। वे कहते हैं, जब एक पेड़ पर 350 प्रजातियों के आम मिल जुल कर रह सकते हैं तो हम इंसान क्यों नहीं। फिलहाल फलों का राजा आम इस बार जलवाफरोश होगा तो, लेकिन बहुत कम दिनों के लिए इसके दीदार होंगे। साथ ही इस बार आम को पाने के लिए आप को अपनी जेबें भी थोड़ी ज्यादा ढीली करनी पड़ेगी।

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