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अयोध्या विवाद में मध्यस्थ बने जस्टिस कलीफुल्ला के नाम हैं कई बड़े फैसले, कश्मीर में किया था यह काम

अयोध्या विवाद के मध्यस्थ बनाए गए जस्टिस कलीफुल्ला के नाम कई बड़े फैसले हैं। उन्हें कश्मीर के लोगों के मन में भरोसा पैदा करने के लिए भी जाना जाता है।

Author Updated: March 9, 2019 4:58 PM
जस्टिस एफएम इब्राहिम कलीफुल्ला (एक्सप्रेस फाइल फोटो)

अयोध्या विवादित जमीन के मामले में मध्यस्थ बनाए गए जस्टिस फकीर मोहम्मद इब्राहिम कलीफुल्ला का नाम मुश्किल मामलों को सुलझाने के लिए जाना जाता है। उनके नाम पर कई बड़े मामलों के फैसले जुड़े हैं। 2016 में जब वे सुप्रीम कोर्ट से सेवानिवृत हो रहे थे, तब तत्कालीन चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर ने भी उनकी तारीफ की थी। जस्टिस ठाकुर ने कहा था, ‘‘जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रहते हुए जस्टिस कलीफुल्ला ने पूरे राज्य की यात्राएं कीं और कश्मीरियों के मन में भरोसा पैदा किया।’’

बता दें कि अयोध्या जमीन विवाद के रूप में जस्टिस कलीफुल्ला ने शुक्रवार को चुनौतियों भरे एक और सफर की शुरुआत कर दी है। वे श्रीश्री रविशंकर और वरिष्ठ वकील श्रीराम पंचू के साथ इस मामले में मध्यस्थता करेंगे। उन्हें इस पैनल का प्रमुख बनाया गया है। इस पैनल का काम अयोध्या में लंबे समय से चल रहे राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद जमीन विवाद का हल ढूंढना है। तमिलनाडु के शिवगंगा जिले में स्थित कराईकुडी से आने वाले जस्टिस कलीफुल्ला के पिता स्वर्गीय एम फकीर मोहम्मद भी न्यायाधीश थे।

श्रम कानून के क्षेत्र में सक्रिय कामकाज के बाद उन्हें मार्च 2000 में मद्रास हाईकोर्ट का स्थायी जज बनाया गया था। 18 सितंबर 2011 से 2 अप्रैल 2012 तक वे जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस भी रहे। इसके बाद उन्हें सुप्रीम कोर्ट का जज भी बनाया गया। सुप्रीम कोर्ट में रहते हुए उन्होंने BCCI से जुड़ा बड़ा फैसला दिया था, यह फैसला उनके रिटायरमेंट से एक दिन पहले दिया गया था। इसमें BCCI को अपने कामकाज और संरचना में बड़े बदलाव करने पड़े थे।

 

इस फैसले के बाद उनके विदाई समारोह में जस्टिस ठाकुर ने कहा था, ‘‘BCCI का मामला सुलझाते हुए मुझे ऐसा लगा, जैसे मैं भारतीय क्रिकेट टीम के किसी पूर्व कप्तान के साथ बैठा हूं। इस खेल को उसका गौरव लौटाने में मदद के लिए मैं उनका आभारी हूं। कुछ भी हमेशा के लिए नहीं होता, लेकिन मुझे लगता है कि जस्टिस कलीफुल्ला के साथ मेरा रिश्ता हमेशा बना रहेगा।’’

इसके अलावा जस्टिस कलीफुल्ला पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या करने वालों की सजा कम करने के केस की सुनवाई से भी जुड़े थे। उनके नाम पर वैदिक ज्योतिष को भारतीय विश्वविद्यालयों में विज्ञान के विषय के रूप में पढ़ाने का फैसला भी जुड़ा है।

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