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चीफ जस्टिस का मोदी सरकार को जवाब- न्यायपालिका तभी हस्तक्षेप करती है जब कार्यपालिका नाकाम हो

न्यायिक हस्तक्षेप के मोदी सरकार के आरोपों को खारिज करते हुए भारत के प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति टीएस ठाकुर ने कहा है कि न्यायपालिका तभी हस्तक्षेप करती है जब कार्यपालिका अपनी संवैधानिक जिम्मेदारियों को निभाने में विफल हो जाती है।
Author नई दिल्ली | June 7, 2016 03:59 am
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया जस्टिस टी.एस.ठाकुर (फाइल फोटो)

न्यायिक हस्तक्षेप के मोदी सरकार के आरोपों को खारिज करते हुए भारत के प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति टीएस ठाकुर ने कहा है कि न्यायपालिका तभी हस्तक्षेप करती है जब कार्यपालिका अपनी संवैधानिक जिम्मेदारियों को निभाने में विफल हो जाती है। उन्होंने यह भी कहा, सरकार को आरोप मढ़ने के बजाय अपना काम करना चाहिए और लोग अदालतों में तभी आते हैं जब वे कार्यपालिका से निराश हो जाते हैं।

प्रधान न्यायाधीश ने एक चैनल को दिए साक्षात्कार में कहा, अदालतें केवल अपनी संवैधानिक जिम्मेदारी अदा करती हैं और अगर सरकार अपना काम करेगी तो इसकी जरूरत नहीं होगी। कार्यपालिका और न्यायपालिका में रस्साकशी के बीच सीजेआइ ने कहा कि अगर सरकारी एजंसियों की ओर से अनदेखी और नाकामी रहती है तो न्यायपालिका निश्चित रूप से अपनी भूमिका अदा करेगी।

सरकारी कामकाज में कथित न्यायिक हस्तक्षेप के संबंध में वित्त मंत्री अरुण जेटली के हालिया बयान के बारे में पूछने पर सीजेआइ ठाकुर ने कहा, हम केवल संविधान द्वारा निर्दिष्ट अपने कर्तव्यों को पूरा करते हैं। अगर सरकारें अपना काम बेहतर तरीके से करें तो हस्तक्षेप की कोई जरूरत नहीं पड़ेगी। न्यायपालिका में बड़ी संख्या में खाली पड़े पदों के संबंध में न्यायमूर्ति ठाकुर ने कहा, मैंने कई बार प्रधानमंत्री से अनुरोध किया है।
और इस मुद्दे पर केंद्र को एक रिपोर्ट भी भेज रहा हूं।

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  1. S
    SANJIVGUPTA
    Jun 7, 2016 at 8:45 am
    ठाकुर जी कोर्ट में करोडो मुकदद्मे अटके हुए है कब तक फैसला करवा दोगे , बेचारा मिडल क्लास और गरीब वयक्ति को कब तारीख पे तारीख मिलती रहेंगी
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    Reply
    1. Upendra Sharma
      Jun 7, 2016 at 7:00 am
      शायद इसी लिए कोर्ट के कामों मैं सालो लग जाते हैं की आप अपने काम टाइम पर न करके सरकार को क्या करना चाहिए इस पर ध्यान देते हो ?
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      Reply
      1. N
        nc
        Jun 7, 2016 at 3:04 am
        अरुण जेटली बिना मतलब के टिप्पणी करते रहते है उसका ये जवाब है बात अगर बढ़ाओगे तो बढ़ेगी नहीं तो बेकार के बहस में विवाद ही होंगे
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        Reply
        1. R
          radha
          Jun 7, 2016 at 9:23 am
          दोनों के सिस्टम में कमियां हैं. जरुरत है सुधर की और कार्यान्वयन की.
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          1. Parmatma Rai
            Jun 7, 2016 at 2:33 am
            लेकिन "तारीख पे तारीख" के लिए कौन जिम्मेवार है ?
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            1. S
              Sanjeev
              Jul 30, 2016 at 5:07 am
              ईस अंग्रेजी कानून से बेहतर तो पंचायती राज था जिसमे गरीबो को न्याय बिना धन खर्च किये, बिना समय गवाये और सर्वमान्य होता था ! आज का कानून सिर्फ और सिर्फ धनी और बाहुबलियों के लिए है ! मोदी सरकार को पंचायती राज पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए और इसके साथ पंचायती न्याय के लिए उचित मानदंड भी निर्धारित करना चाहिए !
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              1. S
                sanjay
                Jun 7, 2016 at 11:59 am
                ईस देश की कार्यपालिका एवं न्यायपालिका दोनों ने कोई ऐसी मिशाल कायम नहीं की जिससे ईस संस्थाओं पर लोगो का विश्वास कायम हो सके। जब न्याय पाने के लिये गरीब को चक्कर काटते हुवे सालो साल लग जाते हो यह बात न्यायपालिका को पता नहीं है यदि होती तो वह मोदीजी के अनुसार दो घण्टे अतिरिक्त समय देकर मिशाल कायम करती ! कार्यपालिका के लिये जनता का समर्थन पांच साल में एक बार लेना होता है जिससे यह प्रभावित होती है लेकिन न्यायपालिका की कोई भी मज़बूरी नहीं है वह स्वतंत्र है फिर भी कार्य नहीं हो रहा है।
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                1. S
                  sanjay
                  Jun 7, 2016 at 11:20 am
                  जज साहब यह बात ी बोल रहे है की कार्यपालिका नाकाम हो रही है,लेकिन न्यायपालिका कितनी ईस देश में सक्सेस हो रही है यह भी जज साहब बताइये। मोदीजी ने कुर्सी पर बैठते ही कहा था की पेंडिग कार्य यदि किसी भी कार्यालयों संस्थाओं में पड़ा हुआ होवे तो अधिकारियो को सोना नहीं चाहिये अर्थात आराम नहीं करना चाहिये। दिनरात कार्य करके पेंडिंग कार्य को समाप्त करना चाहिये। यदि यह बात जजमहोदयजी अपने यहाँ मुकदमों के बारे में प्रकाश डालते और कहते की हमने कम स्टाफ होने बाद भी दिनरात मेहनत कर लोगो को त्वरित न्याय दिया !
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                  1. S
                    sanjay
                    Jun 7, 2016 at 12:14 pm
                    यह मोदी सरकार को जवाब नहीं है यदि दो साल के कार्यकाल के आधार पर मोदी दोषी है और ६० साल वाली कांग्रेस निर्दोष है तो ऐसे मिडिया को हमारा धन्यवाद ! मोदीजी ने न्यायपालिका को दो घंटे अतिरिक्त कार्य करने का आइना क्या दिखाया न्यायपालिका आगबबूला हो गई ! जब घर में माे लंबित पड़े हो तो दूसरों को नसीहत नहीं दी जा सकती है !आजादी के बाद से ही न्यायपालिका के चोखट से ऐसी कोई भी मिशाल कायम होते नहीं दिखी जिसके कारण मोदीजी ने दुखी मन से दो घंटे अतिरिक्त कार्य हेतु न्यायपालिका से गुहार की !
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                    1. S
                      snp
                      Jun 7, 2016 at 6:31 am
                      अदालतओ को चाहिए न्याय करे जो वो करते नहीं है सबसे ज्यादा भ्रस्टाचार न्यापालिका में ही है ९५ प्रतिसत फैसला अपराधियों के पछ में होता है न्याय सिर्फ पैसे वालो को मिलाता है चीफ जस्टियस इस पर ध्यान दे ,ना की सरकार चलाये ,सरकार चलना हो तो चुनाव लड़े,और एक बात जजों की नियुक्ति का पूरा अधिकार जजों को क्यू चाहिए क्या भाई भतीजो को नियुक्त करने के लिए
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