न्यायपालिका व कार्यपालिका के अधिकार क्षेत्र का मुद्दा रास में

कांग्रेस के राजीव शुक्ला ने कहा कि एक आयोग गठित किया जाना चाहिए जो न्यायपालिका और कार्यपालिका के अधिकार क्षेत्र को परिभाषित करे।

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बुधवार (4 मई) को राज्यसभा की कार्यवाही का एक दृश्य। (पीटीआई फोटो)

राज्यसभा में बुधवार (4 मई) को कांग्रेस के एक सदस्य ने कार्यपालिका और न्यायपालिका द्वारा एक दूसरे के अधिकार क्षेत्र में हस्तक्षेप का मुद्दा उठाते हुए एक आयोग गठित करने की मांग की ताकि इनके अधिकार क्षेत्रों की व्यापक व्याख्या की जा सके। कांग्रेस के राजीव शुक्ला ने शून्यकाल में यह मुद्दा उठाते हुए कहा ‘अक्सर कार्यपालिका में न्यायपालिका के हस्तक्षेप की शिकायत मिली है या फिर कहा जाता है कि कार्यपालिका न्यायपालिका के साथ सहयोग नहीं कर रही है। माहौल असहयोग का बन जाता है। स्थिति यह है कि भारत के प्रधान न्यायाधीश कथित तौर पर रो पड़े।’

उन्होंने कहा कि न्यायपालिका में अवसंरचना संबंधी जरूरत और नियुक्तियों पर कार्यपालिका बैठ जाती है तो दूसरी ओर न्यायाधीश तय करते हैं कि मंत्रियों के लिए घर कितने कमरों वाला होगा। शुक्ला ने कहा, ‘सरकार को एक साझा मंच बनाना चाहिए और तय करना चाहिए कि कौन क्या करने जा रहा है। अस्पष्टता से काम नहीं होगा। क्रिकेट के क्षेत्र में या भारतीय चिकित्सा परिषद में सुधार के लिए सुप्रीम कोर्ट के विचार का हम स्वागत करते हैं लेकिन न्यायिक सुधार भी तो होने चाहिए। यह कब होगा।’

उन्होंने कहा कि एक आयोग गठित किया जाना चाहिए जो न्यायपालिका और कार्यपालिका के अधिकार क्षेत्र को परिभाषित करे। शून्यकाल में ही जद (एकी) के केसी त्यागी ने रक्षा क्षेत्र में सहयोग के लिए हाल ही में अमेरिका के साथ हुए भारत के एक समझौते का मुद्दा उठाते हुए कहा कि इस समझौते के तहत दोनों देश हर तरह के रक्षा आदान प्रदान पर सैद्धांतिक तौर पर सहमत हो गए हैं ताकि एक दूसरे की रक्षा संपत्तियों का और रक्षा अड्डों का रक्षा संबंधी कार्यों के लिए उपयोग किया जा सके।

त्यागी ने कहा कि यह गुटनिरपेक्ष देशों की नीति के पूरी तरह खिलाफ है। यह अमेरिका के आगे भारत की विदेश नीति का एक तरह से समर्पण है। इससे जाहिर होता है कि बाजार की नीति हम पर हावी हो रही है। जद (एकी) के अली अनवर अंसारी ने मुंगेर के जमालपुर में स्थित ‘इंडियन रेलवे इंस्टीट्यूट आॅफ मैकेनिकल एंड इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग’ का मुद्दा उठाते हुए कहा कि 1927 से कार्यरत इस संस्थान में एससीआरए प्रशिक्षण योजना चलती है। इसके लिए चयन यूपीएससी की परीक्षा के माध्यम से होता है और फिर चयनित छात्रों के लिए चार साल की एपरेन्टिसशिप होती है और यह अवधि पूरी होने पर उन्हें मैकेनिकल इंजीनियरिंग में स्नातक की डिग्री दी जाती है।

उन्होंने कहा कि रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष ने यूपीएससी को अगले साल से यह परीक्षा आयोजित न करने के लिए कहा है। बोर्ड के अनुसार, अब एससीआरए के लिए बीटेक उत्तीर्ण छात्रों को लिया जाएगा। अंसारी ने कहा कि यह निर्णय बदला जाना चाहिए क्योंकि इससे निर्धन और पिछड़े छात्रों के हित प्रभावित होंगे। कांग्रेस के मधुसूदन मिस्त्री ने आदर्श ग्राम योजना का मुद्दा उठाते हुए कहा कि उन्होंने गुजरात में साबरकांठा लोकसभा सीट के एक गांव को चुना जो अत्यंत पिछड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि गांव का आदर्श ग्राम के तौर पर विकास करने के उद्देश्य से उन्होंने 23 कार्यों की सूची बना कर राज्य सरकार को सौंपी थी लेकिन अब तक उन्हें कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली।

शिवसेना के संजय राउत ने मुंबई की आदर्श हाउसिंग सोसायटी का मुद्दा उठाते हुए कहा कि हाई कोर्ट ने नियमों का उल्लंघन कर बनाई गई इस इमारत को गिराने का आदेश दिया है। उन्होंने कहा कि इस इमारत में मजदूरों का श्रम लगा है और सामान लगा है इसलिए इसे गिराए जाने के बजाय राष्ट्रीय संपत्ति घोषित कर देना चाहिए और यहां सेना का कार्यालय खोला जाना चाहिए या करगिल के शहीदों के परिजनों के लिए छात्रावास के तौर पर इसका उपयोग किया जाना चाहिए।

कांग्रेस के सुब्बीरामी रेड्डी ने मानसिक चिकित्सालयों में महिलाओं की दयनीय स्थिति का मुद्दा उठाते हुए कहा कि महिला आयोग ने देश के विभिन्न मानसिक महिला चिकित्सालयों का दौरा करने पर पाया कि वहां न तो मूलभूत सुविधाएं हैं, न पर्याप्त संख्या में कर्मचारी हैं और न ही ऐसी महिलाओं के परिवार वाले उनकी सुध लेते हैं। उन्होंने सरकार से इस संबंध में तत्काल सुधारात्मक कदम उठाने की मांग की।

इसी पार्टी की विप्लव ठाकुर ने अनाथालयों में रह रहे बच्चों का मुद्दा उठाते हुए कहा कि इन अनाथालयों में पर्याप्त सुविधाएं मुहैया कराई जानी चाहिए ताकि पहले से ही अपने अभिभावकों को खो कर जीवन की एक बहुत बड़ी खुशी से वंचित हो चुके ऐसे बच्चों को आगे बढ़ने की राह मिल सके। कांग्रेस के आनंद भास्कर रपोलू ने बढ़ती बेरोजगारी का मुद्दा उठाते हुए कहा कि बेरोजगारों की संख्या को देखते हुए रोजगारों का सृजन पर्याप्त नहीं है और इस दिशा में समुचित प्रयास किए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि शिक्षा प्रणाली में भी सुधार कर उसे रोजगार के लिए मददगार बनाने की पहल की जानी चाहिए।

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