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पत्रकार हत्याकांड : एक ड्राइवर की जिद ने पूरा डेरा डुबो दिया…

सिरसा के पत्रकार रामचंद्र छत्र पति की हत्या के मामले में सीबीआई की विशेष अदालत राम रहीम को पचास हजार के जुर्माने के साथ उम्रकैद की सजा सुना चुकी है।

Gurmeet Ram Rahim Singh, Journalist Murder Case: राम रहीम (फोटो सोर्स- इंडियन एक्सप्रेस)

सिरसा के पत्रकार रामचंद्र छत्र पति की हत्या के मामले में सीबीआई की विशेष अदालत राम रहीम को पचास हजार के जुर्माने के साथ उम्रकैद की सजा सुना चुकी है। वहीं गुरमीत राम रहीम के साथ तीन अन्य आरोपियों कुलदीप सिंह, निर्मल सिंह और कृष्ण लाल को भी उम्रकैद की सजा सुनाई गई है।लेकिन यह पूरा मामला पत्रकार रामचंद्र छत्रपति से नहीं, बल्कि राम रहीम के एक ड्राइवर की जिद से शुरू हुआ, जिसकी वजह से पूरा डेरा डूब गया।

यहां से शुरू हुआ था असल मसला : कहा जाता है कि 30 मई, 2002 को सिरसा के एक बाज़ार में पुलिस बेतरतीब ढंग से खड़ी गाड़ियां हटाने पहुंची थी। इनमें से एक गाड़ी डेरा सच्चा सौदा की थी। पुलिस ने गाड़ी हटाने के लिए कहा तो ड्राइवर अड़ गया और डेरा की धौंस दिखाने लगा। बहस बढ़ी तो पुलिस अधिकारी ने एक पर्चा निकाल लिया, जो डेरे की एक साध्वी के खत की कॉपी थी। उसी शाम इस खत की कॉपियां सिरसा के बाजार में बांटी गईं और रामचंद्र छत्रपति ने अपने अखबार ‘पूरा सच’ में ये वाकया छाप दिया, जिसमें साध्वी के खत और उसके मजमून का पूरा जिक्र था। जानकार बताते हैं कि ड्राइवर के अड़ने से पहले ही यह खत डेरे से बाहर आ चुका था, लेकिन राम रहीम के खिलाफ बोलने की हिम्मत उस वक्त तक किसी में नहीं थी। जरा-सी बहस में आम हुआ यह खत रामचंद्र छत्रपति तक पहुंच गया और डेरे की तबाही का कारण बना।

डेरे के खिलाफ लगातार रिपोर्टिंग कर रहे थे छत्रपति : कहा जाता है कि साध्वियों से रेप यह पहला मामला नहीं था, जब पत्रकार छत्रपति ने डेरा सच्चा सौदा के खिलाफ रिपोर्टिंग की थी। वे डेरे में होने वाले भ्रष्टाचार पर लगातार खबरें प्रकाशित कर रहे थे। हालांकि, ऐसा डेरा, जहां कई राज्यों के सीएम हाजिरी लगाते थे, उसे एक स्थानीय अखबार से खतरा लगा ही नहीं। 13 मई, 2002 को डेरे की एक साध्वी ने तत्कालीन पीएम अटल बिहारी वाजपेयी को एक लेटर लिखकर साध्वियों के यौन शोषण और रेप के बारे में बताया। वहीं, इस लेटर की कॉपी पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट, हरियाणा पुलिस के अफसरों और मीडिया को भी भेजी गई। इस पर छिटपुट रिपोर्टिंग हुई, लेकिन डेरे का कुछ नहीं बिगड़ा। हालांकि, सिरसा में इस मसले की चर्चा दबी जबान में होने लगी थी।

साध्वी के भाई को मार डाला : 10 जुलाई, 2002 को खबर आई कि डेरा सच्चा सौदा में मैनेजर रहे रंजीत सिंह की हत्या हो गई है। बताया जाता है कि रंजीत उस साध्वी के भाई थे और गुमनाम खत आने से कुछ समय पहले ही वे अपनी बहन को लेकर कुरुक्षेत्र चले गए थे। ऐसे में डेरे को लगा कि उस खत के पीछे रंजीत हैं और उनकी हत्या करा दी गई। इसके बाद डेरे का ध्यान छत्रपति पर गया और उनका भी मर्डर करा दिया गया। उनकी हत्या के बाद डेरे के खिलाफ न्याय प्रणाली का ध्यान गया और डेरे के खिलाफ सीबीआई जांच शुरू हो गई।

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