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गौरी लंकेश मर्डर: सनातन संस्‍था की किताब के हिसाब से काम करते थे हत्‍यारे, SIT का दावा

चार्जशीट में आगे कहा गया कि समूह के सदस्य जिस किताब के हिसाब से काम करते, उसका नाम 'क्षत्रिय धर्म साधना' है, इसे सनातन संस्था ने प्रकाशित किया।

Author Updated: November 25, 2018 11:53 AM
पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या पिछले साल सितंबर में उनके घर के बाहर कर दी गई थी। (एक्सप्रेस फोटो)

मशहूर पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या एक ऐसे समूह ने की थी जिसके प्रमुख सदस्यों ने एक किताब के दिशानिर्देशों के हिसाब से काम किया। कर्नाटक पुलिस एसआईटी ने गौरी लंकेश हत्या मामले में दाखिल की अतिरिक्त चार्जशीट में यह बात कही है। चार्जशीट में आगे कहा गया कि समूह के सदस्य जिस किताब के हिसाब से काम करते, उसका नाम ‘क्षत्रिय धर्म साधना’ है, इसे सनातन संस्था ने प्रकाशित किया। 96 पेजों की क्षत्रिय धर्म साधना संस्था के संस्थापक जयंत अठावले द्वारा लिखी गई, जिसमें हिन्दू धर्म की रक्षा के लिए योद्धाओं के कर्तव्यों की रूपरेखा तैयार करने का जिक्र है।

एसआईटी द्वारा शुक्रवार (23 नवंबर, 2018) को 9,235 पेजों की अतिरिक्त चार्जशीट में कहा गया है कि 5 सितंबर, 2017 को पत्रकार की हत्या में 18 लोग शामिल थे। सभी 18 आरोपियों का नाम चार्जशीट में दर्ज है। इनमें से 16 गिरफ्तार किए जा चुके हैं, जबकि फरार चल रहे अन्य दो आरोपियों में से एक की पहचान ऋषिकेश देवडीकर के रूप में की गई। वह हिंदू जनजागृति समिति से जुड़े सनातन संस्था का सदस्य रह चुका है। एसआईटी ने पूर्व में ऋषिकेश देवडीकर की पहचान मुरली उर्फ शिवा के रूप में की थी।

एसआईटी ने शनिवार नई चार्जशीट के बारे में कहा, ‘जांच में अभी तक सामने आया है कि सभी 18 आरोपी संगठित क्राइम सिंडिकेट के सक्रिय सदस्य हैं। इस सिंडीकेट की स्थापना 2010-11 में डॉक्टर वीरेंद्र तावडे (बड़े भाईसाहब) की लीडरशिप में की गई। तावडे सनातन प्रभात का पूर्व सदस्य है जिसने इस सिंडीकेट को आर्थिक मदद मुहैया कराई। एसआईटी के मुताबिक क्षत्रिय धर्म साधना में लिखे कथनों के अनुसार गौरी लंकेश के लेखों और भाषणों के आधार पर ‘दुर्जन’ के रूप में उनकी पहचान कर हत्या कर दी गई।

हालांकि पुणे के ईएनटी डॉक्टर वीरेंद्र तावडे, हिंदू जनजागृति समिति के कार्यकर्ता, जिसने इस ग्रुप को बनाया, सीबीआई साल 2016 में पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है। तावडे को तर्कवादी डॉक्टर नरेंद्र दाभोलकर की हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया गया। इस ग्रुप ने बाद में पुणे के एचजेएस संयोजक अमोल काले (37) के नेतृत्व में काम किया। एसआईटी के मुताबिक संगठन का नेतृत्व काले ने संभाला। इस सिंडीकेट के मुख्य सदस्य अमित देगवेकर (सनातन संस्था गोवा आश्रम का निवासी), विकास पाटिल उर्फ दावा (गायब संदिग्ध) और ऋषिकेश देवडीकर उर्फ मुरली हैं।

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