टीवीके नेता जोसेफ विजय ने एक फिल्मी अभिनेता के रूप में तमिलनाडु के लोगों के दिलों में लंबे समय तक अपनी खास जगह बनाई है। उन्होंने लगभग तीस वर्षों तक फिल्मों और टेलीविजन के माध्यम से हर घर में अपनी पहचान स्थापित की। अपने करियर की शुरुआत में वे मुख्य रूप से एक रोमांटिक हीरो के रूप में लोकप्रिय हुए। उनकी फिल्मों – जैसे पूवे उनक्कागा, काधलुक्कु मरियाधै, लव टुडे और थुल्लाधा मनमुम थुल्लुम – में वे एक सरल, भावुक और संवेदनशील युवा के रूप में नजर आए, जिसने दर्शकों के साथ गहरा भावनात्मक जुड़ाव बनाया।

बाद में वह बड़े एक्शन और मास हीरो बन गए। घिल्ली, थिरुपाची, शिवकाशी, पोकीरी, थुप्पाकी, कथ्थी, मर्सल, मास्टर, बीस्ट, वरिसु, और लियो जैसी फिल्मों ने उन्हें एक बड़े स्टार के रूप में स्थापित किया। उनके डांस स्टेप्स और स्टाइल ने युवाओं को बहुत प्रभावित किया।

तमिलनाडु में सिनेमा सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि संस्कृति और राजनीति का हिस्सा भी रहा है। अन्नादुरै और करुणानिधि ने थिएटर और फिल्मों के जरिए द्रविड़ विचारधारा को आगे बढ़ाया। एमजीआर और जयललिता ने फिल्मों से सीधे राजनीति में बड़ी सफलता पाई।

विजय भी इसी परंपरा का हिस्सा बने, लेकिन अलग तरीके से। वह किसी पार्टी या आंदोलन से नहीं आए, बल्कि फैन फॉलोइंग से आए। फिल्मों में उनका किरदार अक्सर कमजोरों की रक्षा करने वाला और भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ने वाला रहा है। यही छवि धीरे-धीरे लोगों की राजनीतिक सोच से जुड़ गई।

राजनीति में प्रवेश और टीवीके का निर्माण

विजय शुरू में बहुत शांत और निजी जीवन जीते थे। उनके पिता एस ए चंद्रशेखर उनके करियर और फैन संगठन को संभालते थे। 2009 में फैन संगठन बना, जो बाद में सामाजिक गतिविधियों का केंद्र बन गया। 2020 में जब उनके पिता ने बिना अनुमति राजनीतिक पार्टी बनाने की कोशिश की तो विजय ने उनसे दूरी बना ली और कानूनी कदम भी उठाए।

विजय अपने परिवार और निजी जीवन को बहुत गोपनीय रखते हैं। उनकी मां शोभा चंद्रशेखर, गायिका और फिल्म लेखिका रही हैं। उनकी पत्नी संगीता और बच्चे सार्वजनिक जीवन से दूर रहते हैं। 2017 में उनकी फिल्म मर्सल पर विवाद हुआ, जब भाजपा ने इसमें जीएसटी और डिजिटल इंडिया पर की गई टिप्पणियों पर आपत्ति जताई। भाजपा नेता एच राजा ने उनकी धार्मिक पहचान का भी उल्लेख किया, जिससे विवाद और बढ़ गया। विजय ने सीधे प्रतिक्रिया नहीं दी, लेकिन उनके पिता ने उनका बचाव किया।

2023 में उन्होंने छात्रों को संबोधित करते हुए अंबेडकर, पेरियार और कामराज के बारे में पढ़ने की सलाह दी और वोट खरीदने की राजनीति का विरोध किया। फरवरी 2024 में उन्होंने अपनी पार्टी टीवीके शुरू की। अक्टूबर 2024 में विक्रवंडी में बड़ी रैली की, जिसमें द्रविड़ प्रतीक और तमिल पहचान के संकेत दिखे। वहीं उन्होंने एक प्रसिद्ध लाइन भी कही कि वह छोटा लड़का एक खतरनाक लड़का है।

चुनावी जीत, रणनीति और भविष्य की चुनौती

टीवीके के पास कोई पुराना संगठन नहीं था, लेकिन फैन नेटवर्क पहले से मौजूद था, जो सामाजिक काम करता था और लोगों की समस्याओं का डेटा भी रखता था। विजय ने सीमित प्रचार किया और बहुत कम रैलियां कीं। इसके बावजूद उनके भाषण और वीडियो बहुत वायरल हुए। यूट्यूब और सोशल मीडिया पर उनकी हर बात पर व्यापक चर्चा हुई।

उन्होंने भ्रष्टाचार और वोट खरीदने के खिलाफ खुलकर बातें कीं। उन्होंने कहा कि वह जनता का पैसा नहीं लेते, क्योंकि उन्होंने पहले ही पर्याप्त कमाई कर ली है। उन्होंने भाजपा और द्रमुक दोनों की आलोचना की, लेकिन एआईएडीएमके से सीधा टकराव कम रखा। चुनाव परिणाम में उनकी पार्टी कई सीटों पर दूसरे स्थान पर रही और बड़ी सफलता हासिल की। कुछ जगहों पर जीत भी मिली, जिससे यह संकेत मिला कि भविष्य में गठबंधन की संभावना बन सकती है।

परिणाम के बाद पनायूर स्थित उनके घर के बाहर सुरक्षा बढ़ा दी गई। उनके करीबी सलाहकारों में बुसी आनंद, आधव अर्जुन, सीटीआर निर्मल कुमार, और के सेंगोट्टैयन शामिल हैं। जीत के बाद उनके घर में परिवार से मुलाकात हुई और एक ज्योतिषी भी आया। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर वह मुख्यमंत्री बनते हैं, तो सरकार कैसे चलाएंगे।

उनके समर्थक मानते हैं कि फिल्म उद्योग चलाना भी एक बड़े प्रबंधन जैसा है, जबकि आलोचक कहते हैं कि शासन पूरी तरह अलग जिम्मेदारी है।चुनाव के बाद कई जगह गठबंधन की चर्चाएं तेज हो गईं, और अलग-अलग दल उनके साथ सरकार बनाने की संभावना देख रहे हैं। तमिलनाडु ने इस बार केवल एक अभिनेता को नहीं, बल्कि एक नई राजनीतिक संभावना को चुना है, जो अब एक बड़े जनादेश के साथ सामने आया है।

यह भी पढ़ें: सिनेमा से सत्ता तक: विजय की एंट्री ने बदली तमिलनाडु की राजनीति, क्या शुरू हुआ नया युग

तमिलनाडु में सिनेमा और सियासत का खासा प्रभाव रहा है, जहां कई लोकप्रिय अभिनेताओं ने फिल्मी परदे से निकलकर सत्ता के गलियारों तक का सफर तय किया है। राज्य में अभिनेता से नेता बनने की परंपरा की नींव एमजी रामचंद्रन ने रखी थी। उन्होंने वर्ष 1972 में द्रमुक से अलग होकर अन्नाद्रमुक पार्टी का गठन किया और लंबे समय तक राज्य की सत्ता संभाली। अब तमिल सिनेमा के मशहूर अभिनेता विजय भी उनकी राह पर हैं। उनकी पार्टी टीवीके राज्य विधानसभा चुनावों में 108 सीटें जीतकर सबसे बड़े दल के रूप में उभरी है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां पर करें क्लिक