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राजस्थान: गहलोत और वसुंधरा पुत्रों को लेकर आकर्षण

जोधपुर सीट से पहली बार चुनावी मैदान में उतरे मुख्यमंत्री के बेटे वैभव यूं तो कांग्रेस की राजनीति में 2003 से ही सक्रिय है। उन्होंने युवक कांग्रेस से होते हुए प्रदेश कांग्रेस में मौजूदा में महासचिव पद की जिम्मेदारी भी संभाली है।

Author April 8, 2019 3:29 AM
वैभव गहलोत और दुष्यंत सिंह।

राजस्थान में जोधपुर और झालावाड़ लोकसभा सीटें सबसे ज्यादा आकर्षण वाली बन गई हैं। इन दोनों सीटों पर प्रदेश के दिग्गज नेताओं मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बेटे वैभव गहलोत और झालावाड़ से पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के पुत्र दुष्यंत सिंह चुनाव मैदान में हैं। दुष्यंत सिंह चौथी बार सांसद बनने के लिए मैदान में उतरे है तो वैभव गहलोत पहली बार सियासी पारी खेलेंगे। दोनों को ही इस बार कड़े मुकाबले का सामना करना पड़ रहा है। जोधपुर में वैभव का मुकाबला केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत से होगा। दुष्यंत सिंह के सामने कांग्रेस ने भाजपा से जुड़े रहे युवा नेता प्रमोद शर्मा को पार्टी में शामिल कर चुनावी मैदान में उतारा है।

जोधपुर सीट से पहली बार चुनावी मैदान में उतरे मुख्यमंत्री के बेटे वैभव यूं तो कांग्रेस की राजनीति में 2003 से ही सक्रिय है। उन्होंने युवक कांग्रेस से होते हुए प्रदेश कांग्रेस में मौजूदा में महासचिव पद की जिम्मेदारी भी संभाली है। जोधपुर सीट से उनके पिता अशोक गहलोत पांच बार सांसद रहे हैं और प्रदेश में अभी तीसरी बार मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। जोधपुर इलाके में गहलोत का खासा प्रभाव है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत जिस सादगी से राजनीति करते हैं उसी तरह की सादगी की झलक वैभव गहलोत भी दे रहे हैं। वैभव भी पार्टी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं की भावनाओं के बलबूते अपनी सियासत करते हैं। उनका मुकाबला भाजपा के दिग्गज नेता केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत से हो रहा है। शेखावत का कहना है कि वैभव गहलोत तो प्रवासी के तौर पर जोधपुर आते हैं। शेखावत ने वैभव की उम्मीदवारी को वंशवाद से भी जोड़ा। शेखावत का कहना है कि उनका चुनाव पार्टी कार्यकर्ता लड़ रहे हैं। देश की जनता नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री बनाना चाहती है और राष्ट्रवाद की पक्षधर जनता उनके साथ है। जोधपुर में पांच साल में उन्होंने ऐतिहासिक काम करवाएं।

दूसरी तरफ वैभव गहलोत का कहना है कि उनके लिए वंशवाद की बात करना गलत है। वे 15 साल से लगातार सक्रिय हैं और कांग्रेस के आंदोलनों में लाठियां भी खाई हैं। शेखावत के उन्हें प्रवासी बताए जाने पर वैभव का कहना है कि जोधपुर उनका गृह क्षेत्र है फिर उन्हें कैसे प्रवासी बताया जा रहा है। हर चुनाव चुनौती होता है, कांग्रेस कार्यकर्ताओं की बदौलत चुनाव लड़ा जाएगा। उन्होंने अपने पिता अशोक गहलोत से तुलना किए जाने पर कहा कि इतना बडा कद मेरा नहीं है। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने जो समर्थन और प्यार दिया है, उसका शुक्रगुजार हूं। जोधपुर की तरह ही झालावाड संसदीय क्षेत्र पर भी प्रदेश के राजनीतिको की निगाहें लगी हुई हैं। इस सीट से पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष वसुंधरा राजे के बेटे दुष्यंत सिंह चौथी बार सांसद बनने के लिए फिर से मैदान में उतरे हैं। भाजपा और पहले जनसंघ का मजबूत इलाका रहा यह क्षेत्र 1989 से ही वसुंधरा राजे की राजनीतिक जमीन रही है। राजे इस सीट से पांच बार सांसद बनीं हैं और झालावाड़ से विधायक बनती आ रही हैं।

इस बार दुष्यंत सिंह के मुकाबले के लिए कांग्रेस ने प्रमोद शर्मा को मैदान में उतारा है। शर्मा विधानसभा चुनाव से पहले तक भाजपा की युवा मोर्चा के उपाध्यक्ष थे। उन्होंने भाजपा को छोड़ कर कांग्रेस का दामन थाम लिया था। प्रदेश के खनिज मंत्री प्रमोद जैन भाया का इस संसदीय क्षेत्र के बारां जिले में तगड़ा प्रभाव है। उनकी सिफारिश पर ही कांग्रेस ने युवा प्रमोद शर्मा को इस कठिन सीट पर उतारा है। दुष्यंत सिंह का कहना है कि चौथी बार पार्टी नेतृत्व ने उन पर भरोसा किया है और उस पर खरा उतरूंगा। उनका कहना है कि मोदी सरकार ने पांच साल तक जो काम किए हैं जनता उससे खुश है। क्षेत्र के अफीम उत्पादक किसानों की समस्याओं को हल करना उनकी पहली प्राथमिकता होगी। दूसरी तरफ इलाके के दिग्गज कांग्रेस नेता और खनिज मंत्री प्रमोद जैन भाया का कहना है कि इस बार बदलाव की लहर चलेगी। झालावाड़ सीट से तीस साल से एक ही परिवार का कब्जा चला आ रहा है। जनता अब इसमें बदलाव लाएगी। प्रदेश की गहलोत सरकार ने अपने छह महीने के कार्यकाल में ही कई कल्याणकारी योजनाएं शुरू की हैं। उनकी बदौलत कांगे्रस की मजबूत स्थिति बन गई है।

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