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JNUSU Election 2019: जेएनयू प्रशासन और छात्रसंघ के बीच जुबानी जंग जारी, एक-दूसरे पर लगाए तीखे आरोप

डीन ऑफ स्टूडेंटस उमेश कदम शिकायत निस्तारण प्रकोष्ठ (जीआरसी) के भी अध्यक्ष हैं और उन्होंने दावा किया कि सुबह दस बजे से दोपहर ढाई बजे के बीच चुनाव समिति के सदस्य उनके कार्यालय नहीं आए।

Author नई दिल्ली | Published on: September 12, 2019 8:29 AM
JNU प्रतीकात्मक चित्र फोटो सोर्स- इंडियन एक्सप्रेस

JNUSU Election 2019: जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) छात्रसंघ चुनाव के लिए गठित चुनाव समिति और विश्वविद्यालय प्रशासन में बुधवार को भी जुबानी जंग जारी रही और दोनों ने एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाए। विश्वविद्यालय के डीन ऑफ स्टुडेंटस उमेश कदम ने छात्रों पर उन्हें बंधक बनाने का आरोप लगाया। वहीं जेएनयूएसयू चुनाव समिति के सदस्यों ने दावा किया कि हाल में हुए चुनावों में कथित तौर पर लिंगदोह समिति के दिशानिर्देशों का अनुपालन नहीं करने को लेकर कदम की ओर से जारी समन का जवाब देने वे उनके कार्यालय गए तो उन्हें वहां प्रवेश नहीं दिया गया।

उल्लेखनीय है कि कदम ने सोमवार को छात्रों द्वारा संचालित चुनाव समिति के सदस्यों को नोटिस जारी कर मामले में बुधवार सुबह 10 बजे तक जवाब देने को कहा था। डीन ऑफ स्टूडेंटस उमेश कदम शिकायत निस्तारण प्रकोष्ठ (जीआरसी) के भी अध्यक्ष हैं और उन्होंने दावा किया कि सुबह दस बजे से दोपहर ढाई बजे के बीच चुनाव समिति के सदस्य उनके कार्यालय नहीं आए। वे शाम साढ़े पांच बजे आए तब हमने कार्यालय बंद होने का समय होने की वजह से उनका जवाब स्वीकार करने से मना कर दिया। इसके बाद वे कार्यालय के गेट पर ही बैठ गए और कई घंटे तक उन्हें बंधक बनाए रखा। इससे उनका रक्तचाप बढ़ गया और उन्हें घबराहट होने पर स्वास्थ्य केंद्र जाना पड़ा।

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नोटिस में जीआरसी स्पष्ट किया है कि चुनाव समिति ने चुनाव के आयोजन में लिंगदोह समिति की 10 बिंदुओं पर लिंगदोह समिति की सिफारिशों का उल्लंघन किया है। जीआरसी ने अपने जारी नोटिस में कहा है कि लिंगदोह समिति के अनुसार चुनाव प्रक्रिया 10 दिन में पूरा होना चाहिए लेकिन चुनाव प्रक्रिया 14 दिन का समय लिया गया हैं। जो लिंगदोह समिति की सिफारिश का उल्लघंन करता है।

नोटिस में बताया गया है कि चुनाव समिति ने सभी उम्मीदवारों की अंतिम सूची की घोषणा करने से पहले उनकी हाजिरी , अकादमिक बकाया जैसे विषयों की जांच नहीं की है। साथ स्वच्छ चुनाव कराने के लिए एक मतगणना कक्ष में समीक्षक नियुक्त किया गया था लेकिन उसे मतगणना कक्ष में नही दिया गया। विश्र्वविद्यालय के नियमानुसार ,विश्र्वविद्यालय के छात्र ही केवल मतगणना प्रक्रिया में भाग ले सकते है लेकिन मीडिया रिपोर्टस के मुताबिक वहां बाहरी लोग भी मौजूद थे।

हालांकि ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) ने इस जारी नोटिस को वापस लेने की मांग करते हुए विश्र्वविद्यालय प्रशासन से कहा है कि चुनाव समिति पर झूठे आरोप लगाए जा रहे हैं, जिसके लिए जीआरसी चुनाव समिति और जेएनयू समुदाय से माफी मांगें।

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