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प्रदर्शनकारी रोक रहे प्रवेश साक्षात्कार : जेएनयू

जिस्ट्रार के मुताबिक, जेएनयू प्रशासन की ओर से जो भी सुधारात्मक कदम उठाए जा रहे हैं, वे आधिकारिक प्रक्रिया के तहत ही उठाए जा रहे हैं। साथ ही उन्हें विश्वविद्यालय की कार्यकारी परिषद (ईसी) और विद्वत परिषद (एसी) से मंजूरी लेने के बाद ही लागू किया गया है।

दिल्‍ली स्थित जवाहरलाल नेहरू विश्‍वविद्यालय परिसर। (Photo: Express Archive)

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) प्रशासन ने प्रदर्शन कर रहे विद्यार्थियों पर दाखिले के लिए होने वाले साक्षात्कार रोकने का आरोप लगाया है। विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार की ओर से कहा गया है कि प्रदर्शन कर रहे छात्रों की वजह से विश्वविद्यालय की अकादेमिक और शोध गतिविधियों को नुकसान हो रहा है। इतना ही नहीं, कुछ छात्र तो प्रवेश परीक्षा पास कर चुके उम्मीदवारों के साक्षात्कार में भी अड़चन डाल रहे हैं। हालांकि जेएनयू छात्र संघ ने इन आरोपों से इनकार किया है। रजिस्ट्रार प्रमोद कुमार के मुताबिक, 15 मार्च को प्रदर्शनकारी छात्रों ने शिक्षकों और साक्षात्कार देने पहुंचे उम्मीदवारों को स्कूल आॅफ आर्ट्स एंड एस्थेटिक्स (एसएए) भवन में नहीं घुसने दिया, जिसकी वजह से साक्षात्कार नहीं हो पाए। एसएए के डीन प्रोफेसर मजहर आसिफ को भी इस दौरान अपने दफ्तर में नहीं घुसने दिया गया।

रजिस्ट्रार की ओर से इस संबंध में कई वीडियो भी जारी किए गए हैं। इसी तरह जेएनयू के कुछ छात्रों ने सामाजिक विज्ञान संस्थान के ऐतिहासिक अध्ययन केंद्र के नए चेयरपर्सन को भी उनके दफ्तर में घुसने से रोका। इसकी वजह से केंद्र के सामान्य कामकाज में बाधा आ रही है। रजिस्ट्रार के मुताबिक, शिक्षक संघ और छात्र संघ के प्रतिनिधि विश्वविद्यालय प्रशासन पर गलत आरोप लगाकर एक के बाद एक प्रदर्शन कर रहे हैं। इनके कार्यकलापों की वजह से परिसर में नकारात्मक माहौल बन गया है और इससे बड़ी संख्या में विद्यार्थियों के भविष्य से भी खिलवाड़ हो रहा है, जिनमें से काफी गरीब और पिछड़े वर्ग से आते हैं।

रजिस्ट्रार के मुताबिक, जेएनयू प्रशासन की ओर से जो भी सुधारात्मक कदम उठाए जा रहे हैं, वे आधिकारिक प्रक्रिया के तहत ही उठाए जा रहे हैं। साथ ही उन्हें विश्वविद्यालय की कार्यकारी परिषद (ईसी) और विद्वत परिषद (एसी) से मंजूरी लेने के बाद ही लागू किया गया है। ईसी ने ही हाल ही में उन कुछ चेयरपर्सन और डीन को हटाने का निर्णय लिया था जो अनिवार्य उपस्थिति के नियम को लागू करने में आनाकानी कर रहे थे। जब तक इस मामले की जांच पूरी होती है, तब तक ईसी ने उनके स्थान पर कार्यकारी चेयरपर्सन और डीन को काम देखने के लिए नियुक्त किया है। शिक्षक संघ और छात्र संघ इस फैसले का विरोध कर रहे हैं। रजिस्ट्रार के मुताबिक, अपने प्रदर्शनों के दौरान विद्यार्थी रिहायशी क्षेत्रों में जाकर भी नारेबाजी कर रहे हैं। इस गैरकानूनी कृत्य की वजह से घरों में रहने वाले बच्चे और बुजुर्गों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

जेएनयू छात्र संघ के महासचिव शुभ्रांशु ने कहा कि हमने किसी उम्मीदवार को साक्षात्कार देने से नहीं रोका है। जहां तक नए चेयरपर्सन को दफ्तर में जाने से रोकने का सवाल है, केंद्र के विद्यार्थी ही नए चेयरपर्सन का विरोध कर रहे हैं। इसके अलावा शुभ्रांशु ने रिहायशी इलाकों में प्रदर्शन के आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि शनिवार को हमने रेक्टर-एक प्रोफेसर चिंतामणि महापात्रा के घर के बाहर प्रदर्शन किया, लेकिन वह पूरी तरह से शांतिपूर्ण था।

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